शायद बचपन में आपने दादी से श्रीराम या श्रीकृष्ण की कहानियां सुनी होंगी.. पर प्रियंका गाँधी ने अपनी दादी से ये सुना था ?

प्रियंका गांधी ने आख़िरकार भारत की सक्रिय राजनीति में अपने कदम रख ही दिए हैं और उनके आगे एक बेहद मजबूत विरोधी है जिसका नाम नरेन्द्र मोदी है . प्रियंका गांधी के लिए ये चुनाव पहली बार नहीं है , इस से पहले वो कई बार अमेठी और रायबरेली में अपने भाई राहुल गाँधी और माता सोनिया गांधी के लिए प्रचार किया है .. लेकिन इस बार उनका चुनावी दायरा और भी बड़ा है और कहना गलत नही होगा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की दिशा और दशा की पूरी जिम्मेदारी उनकी ही होगी .

प्रियंका गांधी के लिए इस बार का संघर्ष और भी कठिन है . न सिर्फ नरेंद्र मोदी के खिलाफ ही उनको ताल ठोंकनी है बल्कि जिस उत्तर प्रदेश में उन्होंने मोर्चा सम्भाला है वो योगी आदित्यनाथ द्वारा शासित है और उनके नाम का प्रभाव उत्तर प्रदेश में अपने आप में एक ऐसी मिसाल है जिस से पार पाना आसान नहीं है . भगवा छवि वाले हिन्दू हृदय सम्राट कहे जाने वाले योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उनकी माता जी और भाई दोनों ही उसी उत्तर प्रदेश से चुनावी मैदान में आये हैं ..

राहुल गाँधी ने हिन्दू और हिंदुत्व के एकजुटता को भांप लिया है और उन्होंने मन्दिर भ्रमण के साथ अपनी जनेऊ और गोत्र तक आगे कर दिया है . इतना ही नहीं उन्होंने महादेव शिव के दर्शन कैलाश पर जा कर किया है लेकिन प्रियंका गांधी का एक ट्विट बता रहा है उस विचारधारा को जो उनको बचपन में उनके पूर्वजों द्वारा मिले संस्कार का परिचायक भी होगा . ज्ञात हो कि भारत में बच्चो को बचपन में रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाई जाती हैं लेकिन प्रियंका को उनकी दादी ने वो कहानी सुनाई जिस से भारत में बहुत कम लोग ही वाकिफ होंगे .

प्रियंका गांधी ने इस बात को खुद से माना है कि बचपन में उनको उनकी दादी अर्थात इंदिरा गांधी ने  “जोन ऑफ आर्क” की कहानी सुनाई है और उन्होंने अपने अंदर की निडरता और साहस  का श्रेय भी उसी कैथोलिक महिला  जोन ऑफ़ आर्क को दिया है . इस   नाम से पहले बहुत कम लोग वाकिफ थे लेकिन इसको अपने ट्विटर पर डाल कर प्रियंका गांधी ने लोगों के मन में अपने बचपन में मिले संस्कारों की एक झलक दिखा  दी है और इसी बहाने लोगों को उस नाम से परिचित  करवा दिया है  जो उनके लिए एकदम नया था . यद्दपि जॉन ऑफ़ आर्क का भारत की भूमि , इतिहास या संस्कृति से कभी भी कहीं भी दूर दूर तक कोई रिश्ता या वास्ता नहीं था .. फिर प्रियंका गांधी और उनकी  दादी को भारत में मौजूद रानी लक्ष्मी बाई , माँ सीता , रानी चेनम्मा आदि बजाय साहस की शिक्षा लेने के लिए जोन ऑफ़ आर्क ही क्यो       दिखी ये सोचने और समझने का  विषय हो सकता है .

 

देखिए प्रियंका का वो ट्विट –

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