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जज के मुंह से “हिन्दुराष्ट्र” शब्द सुनते ही उबल पड़े वो तमाम जिनके नाम से लगता है कि वो हिन्दू हैं और खामोश रहते हैं “गज़वा ए हिंद” जैसे नारों पर


“सरकार ध्यान रखे कि देश का इस्लामीकरण न होने पाए”..आख़िर इस बयान में ऐसा क्या गलत कह दिया जो बन चुका है शोर शराबे की वजह ? सरकार को अगर गाय, गौ रक्षक, हिन्दू संगठनों के मामले में फटकार मिले तो उसको लोकतंत्र की जीत कहा जाय , लेकिन जब उसी सरकार को इस्लामीकरण के खिलाफ सतर्क रहने की नसीहत दी जाय तो लोकतंत्र खतरे में ? आखिर ऐसा क्यों है ? सवाल ये भी है कि अपने नाम मे सीता, राम, शिव, इंद्र आदि लगाने वाले इन्ही नामो को लेने पर हंगामा क्यों करने लगते हैं .. हिन्दू और हिंदुत्व से आखिर ऐसी कौन सी चिढ़ है इन्हें जो फिलहाल तो समझने योग्य है..और उसको समझने के लिए शायद इस से बेहतर अवसर न आये जब मेघालय के जस्टिस सेन की एक सटीक टिप्पणी पर बवाल मचा हुआ है ..

यहां ये ध्यान रखने योग्य है कि आज अचानक ही संवैधानिक मर्यादा भूल कर अदालत पर ही हिन्दू , हिंदुत्व और हिन्दुराष्ट्र का बहाना ले कर उंगली उठा रहे हिन्दू देवी देवताओं का नाम रख कर खड़े हुए यही तथाकथित बुद्धिजीवी, सेकुलर समाज के कथित ठेकेदार उस समय खामोशी धारण कर लेते हैं जब कई खुली तकरीरों में हजारों लोगों की उन्मादी होने की कगार पर आ चुकी भीड़ के सामने गज़वा ए हिन्द जैसे नारे खुद भी लगाते हैं और बाकी कईयो को लगाने के लिए प्रेरित करते हैं.. जज साहब ने तो अपने आखिरी लाईन में यहां तक कहा है कि वो भारत के शांतिप्रिय मुसलमानों का सम्मान करते हैं लेकिन गज़वा ए हिन्द का नारा लगाती उस भीड़ में हर उसके खिलाफ जहर उगला जाता है जो उनके मत या मज़हब की भावनाओं से सहमत नही होता है..पर अफसोस कि बात है कि आज तक उनके खिलाफ कभी भी एक भी शब्द ही हिन्दू देवी देवताओं का नाम रख कर हिंदुत्व, हिन्दू का ही विरोध करते इन स्वघोषित बुद्धिजीवियों ने नहीं बोला है .. जनता इतना तो सवाल करती है कि आखिर ऐसा क्यों ?

केंद्र की मोदी सरकार भारत को इस्लामिक देश होने से बचाए। यह अपील एक जज ने की है। दरअसल , मेघालय हाई कोर्ट के जज ने एक मामले की सुनवाई के दौरान ऐसी टिप्पणी की जिसका केस से कोई संबंध नहीं था। सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए। जज इतने में ही नहीं रुके उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि देश कहीं इस्लामिक नहीं बन जाए।

मेघालय हाई कोर्ट के जस्टिस एस आर सेन ने सरकार से ऐसे नियम बनाने की अपील की है, जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों में रहने वाले मुस्लिम समुदाय और समूह भारत आकर नहीं बस सकें। न्यायमूर्ति ने कहा कि मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि कोई भारत को इस्लामिक देश बनाने का प्रयास नहीं करे। यदि यह इस्लामिक देश हो गया तो, भारत और दुनिया में बरबादी आ जाएगी। मुझे यकीन है कि मोदीजी की सरकार मामले की गंभीरता को समझेगी और आवश्‍यक कदम उठाने का काम करेगी। आगे उन्होंने कहा कि हमारी सीएम ममता बनर्जी जी राष्ट्रहित में हर तरह से उसका समर्थन करने का काम करेंगी।

न्यायमूर्ति सेन ने मोदी सरकार से अपील की कि वह भारत में कहीं से भी आकर बसे हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, इसाई, खासी, जयंतिया और गारो समुदाय के लोगों को भारत का नागरिक घोषित करे। उन्होंने अपनी अपील में यह भी जोड़ दिया कि आने वाले समय में इन समुदाय के जो भी लोग भारत आएं, उन्हें भारत की नागरिकता प्रदान की जाए। जज ने आगे कहा कि वे भारत में बसे शांतिप्रिय मुसलमानों के विरोधी नहीं हैं।


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