वर्दी वाले तेज बहादुर के लिए न्याय मांगते कुछ ने ही बर्बाद कर डाला है एक वर्दी वाले सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह का जीवन.. भीख मांगने की कगार पर है वो परिवार

एक सुखद अनुभूति हो रही है लोगों को आज कल वर्दी का ऐसा सम्मान देख कर जो शायद ही पहले कभी दिखा हो .. ये वो समय है जब वर्दी वालों पर पत्थर मारने का समर्थन करने वालों ने भी वर्दी की जय बोलना शुरू कर दिया है . तेज बहादुर यादव जो BSF की आंतरिक जांच में दोषी पाए गये थे और उनको बर्खास्त किया गया था अचानक ही चर्चा में आ गये हैं और उन्होंने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के मिले जुले टिकट पर मोदी को चुनौती देनी शुरू कर दी है …

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तेज बहादुर को माँ भारती का लाल बोला जाने लगा जबकि जो ये शब्द बोल रहे हैं वो भारत माता के अस्तित्व को मानते ही नहीं हैं .फिलहाल किस भी रूप में वर्दी का सम्मान हो, ये भारत के लिए शुभ संकेत हैं .. लेकिन जब बात वर्दी की हो तो सिर्फ तेज बहादुर यादव पर ही आ कर नहीं टिकती है .. उत्तर प्रदेश पुलिस का एक सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह भी वर्दी वाला ही एक जांबाज़ था जिसकी जिन्दगी को 4 वर्ष पहले समाजवादी पार्टी के शासन काल में ऐसे मोड़ पर ला कर छोड़ दिया गया जहाँ उसके जीवन में अब शायद ही कुछ बचा हो .

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समाजवादी पार्टी वही पार्टी है जिसने सिपाही तेज बहादुर यादव को टिकट दे कर ये साबित करने की कोशिश की है कि वो वर्दी वालों का बहुत सम्मान करती है .. लेकिन लगभग 4 वर्ष पहले समाजवादी पार्टी के ही शासन काल में समाज के रक्षक उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र के साथ उन्होंने क्या किया इस पर वो बोलने के लिए तैयार नहीं हैं . ये वही सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह है जो इसी विपक्ष के दिए नाम मॉब लिंचिंग का शिकार प्रयागराज की कचेहरी में हो रहा था .

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उसको नबी अहमद के नेतृत्व में कई लोग घेर कर मार रहे थे और वो अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था.. अचानक एक आवाज आई थी और पता चला कि नबी अहमद को गोली लग गई. नबी अहमद वही था जिसके ऊपर आधे दर्जन से ज्यादा केस पहले से ही दर्ज थे .. आधे दर्जन से ज्यादा मुकदमे में संलिप्त कोई पुलिस विभाग के किसी सब इंस्पेक्टर को न्याय के मन्दिर कचेहरी में कैमरे के आगे दौड़ा दौड़ा कर मार रहा था. और बाकायदा वर्दी में ये सब झेल रहा सब इंस्पेक्टर बार बार खुद को बचाने की कोशिश में भाग रहा था .. कुछ ऐसा शासन अखिलेश यादव का जो अचानक ही वर्दी के इतने बड़े शुभचिंतक हो गये हैं .

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अभी तक ये नहीं पता चला कि आधे दर्जन मामलों में पहले से ही वांछित नबी अहमद किस की गोली से मरा लेकिन उसका सारा दोष सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के ऊपर डाल दिया गया था वर्दी प्रेमी अखिलेश यादव के शासन काल में और वो सब इंस्पेक्टर भेज दिया गया जेल की काल कोठरी में जिसके परिवार वालों को उस समय घेर कर मारा गया था और ये सब ख़ामोशी से देख रहे थे अखिलेश यादव .. इतना ही नहीं एक शब्द भी नही सुना उस सब इंस्पेक्टर के परिवार का जिसकी पत्नी रो रो कर चीखती रही कि उसका पति निर्दोष हैं ..

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सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस के जांबाज़ अफसरों में गिना जाता था जिसने कई अपराधियों , गुंडों आदि को घूल चटाई थी .. लेकिन उसकी जांबाजी का अखिलेश यादव के शासन काल में ये प्रतिफल मिला जहाँ उसकी बात तक नहीं सुनी गई . यहाँ तक कि उनकी मदद करने वाले एक आईपीएस अफसर को भी बाद में अंतहीन प्रताड़ना दी गयी जिनकी पत्नी मददगार थी न कि वो खुद .. आज वही समाजवादी पार्टी वर्दी का वर्दी वालों के लिए प्रेम देख कर सवाल तो बनता है कि ये प्यार सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के लिए कहा गया था जिसका परिवार आज भीख मांगने की कगार पर आ चुका है ..

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ख़ास कर अल्पसंख्यकों के खिलाफ पुलिस विभाग के हाथ पैर बांध कर रखने वाली पिछली अखिलेश सरकार में हुई इस घटना के समय सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह इलाहाबाद के शंकरगढ़ थाने के अंतर्गत आने वाली नारीबारी पुलिस चौकी के प्रभारी थे। शैलेन्द्र सिंह के माता पिता की मृत्य हो चुकी है और उनका एकभाई विक्षिप्त हो गया है। इस प्रकार कभी अपने जिले के सबसे जांबाज़ और तेज तर्रार पुलिस सब इंस्पेक्टरों में से गिना जाने वाले शैलेन्द्र सिंह का पूरा परिवार अब बेहद ही डांवाडोल हालत में है। हालात इतने विषम हैं की उनकी पत्नी श्रीमती सपना सिंह को अपने तीन मासूम बच्चो के साथ अपने पिता के घर रहना पड़ रहा है जहाँ जैसे तैसे इस परिवार का गुजारा हो रहा है। हालात ये भी हैं की अब तीनों बच्चो की पढ़ाई आदि भी खतरे में पड़ती जा रही है क्योकि अपने पति का मुकदमा लड़ते लड़ते इस परिवार का सब कुछ बिक चुका है और यही हाल रहा तो कल खाने के लिए भी दिक्कत पैदा हो जायेगी।

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एक पुलिस वाले जो कानून और समाज की रक्षा के लिए वर्दी पहना हो उसकी व् उसके परिवार की ये दुर्दशा किसी पत्थरदिल का भी कलेजा पिघलाने के लिए काफी है। सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह को वर्तमान योगी सरकार से, पुलिस विभाग से और उतना ही राष्ट्रवादी विचारधारा के वकीलों से आशा है की वो उन्हें न्याय दिलाएंगे। यद्द्पि विगत तीन वर्षो में आर्थिक व् सामाजिक रूप से टूट चुके इस परिवार के पास अब पैरवी के लिए मात्र शैलेन्द्र सिंह जी की पत्नी सपना सिंह जी ही हैं जो शायद ही ऐसी कोई चौखट हो जहाँ मत्था टेक कर ना आ चुकी हों अपने पति को न्याय दिलाने की मांग को ले कर। यहाँ सवाल तथाकथित मानवाधिकारियों से भी है, जो नक्सलियों व आतंकवादियों तक के पक्ष में खड़े हो जाते हैं पर निर्दोष पुलिसकर्मियों के पास में नहीं! और अंतिम सवाल – क्या शैलेन्द्र सिंह वर्दी वाला नहीं ?

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रिपोर्ट –

राहुल 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

नॉएडा  

मो 0 – 9598805228

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