हिन्दू नेताओं की हत्या का इतिहास बहुत पुराना है. कभी टांडा के रामबाबू की हत्या के बाद लाश पर रोती महिलाओं पर बरसाए गये थे पत्थर

NIA ने बहुत समय रहते एक बड़े नेटवर्क का भंडा फोड़ दिया और तमाम हिन्दू नेताओं की हत्या की साजिश को बहुत पहले ही विफल कर दिया .. ये बहुत बड़ी और बेहद गहरी साजिश आतंक के उन आकाओं द्वारा रची गयी थी जो कश्मीर ही नहीं बल्कि चेचन्या , गाजा तक खून की होली के लिए जिम्मेदार हैं . उनके द्वारा ही भारत के RSS कार्यालय पर हमले और हिंदूवादी नेताओं की श्रृंखलाबद्ध हत्या की साजिश रची गयी थी लेकिन इसका सबसे बुरा पहलू ये है कि जांच पूरी होने से पहले ही तमाम तथाकथित बुद्धिजीवी उन संदिग्ध आतंकियों के समर्थन में खड़े होते दिखाई देने लगे हैं बिना ये जाने कि हिन्दू और हिंदुत्व की बात करने वाले नेताओं को इतिहास में किस तरह से एक सीरीज बना कर मारा गया है .

इस क्रम में कर्नाटक के प्रशांत पुजारी का नाम आता है जिनको केवल गाय और हिंदुत्व की बात करने को अपराध मान कर मार डाला गया . फिर केरल और कर्नाटक के साथ पश्चिम बंगाल में एक के बाद एक उन नेताओं को मार डाला गया जो धर्म और हिन्दू की बात किया करते थे . लेकिन सबसे इनके साथ ही एक और नाम है जो उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल इलाके टांडा से आता है और उनका नाम है रामबाबू गुप्ता .. इन तमाम हत्याओं में एक हत्या रामबाबू गुप्ता की भी है जो २०१३ में केवल धर्म और हिन्दू आदि के नाम लेने के चलते मार दिए गये थे और इसको सुनियोजित तरीके से दबाया गया .

रामबाबू गुप्ता तत्कालीन योगी आदित्यनाथ के समूह हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारी थे .. उनकी बातचीत योगी आदित्यनाथ से अच्छे से थी . रामबाबू गुप्ता के परिजों के अनुसार उनको तत्कालीन समाजवादी पार्टी का विधायक अजीमुल हक किसी भी हाल में और किसी भी रूप में पसंद नहीं करता था . उस समय समाजवादी पार्टी के विधायक की हैसियत क्या थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रामबाबू के परिजनों के चीखते रहने और दिल्ली तक की चौखट पर मत्था टेकने के बाद भी किसी भी पुलिस वाले में इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वो एक दिन के लिए अजीमुल हक को बुला कर पूछताछ ही कर लेता . यद्दपि आज उसी अंबेडकरनगर की पुलिस रामबाबू गुप्ता के परिजनों के लिए शेर हो चुकी है और उनके सशत्र लईसेंस निरस्त करने के साथ साथ उनके ऊपर तमाम धाराएँ भी लगाती जा रही है .

यद्दपि समाजवादी पार्टी की सरकार में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी , प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़े बड़े वादे किये थे पर अब उनकी सरकार में आने एक बाद उस परिवार की उसी अंदाज़ में प्रताड़ना हो रही है लेकिन इस बार पुलिस के द्वारा जो अजीमुल हक को एक बार सवाल जवाब के लिए बुला नहीं पाई थी .  उस समय रामबाबू गुप्ता केस एक एकलौते गवाह राममोहन गुप्ता को भी उनकी दुकान में घुस कर मार डाला गया था लेकिन यही आंबेडकरनगर पुलिस कुछ भी नहीं कर पाई थी जो आज रामबाबू गुप्ता के परिजनों के खिलाफ ही कहर ढा रही है .

इस हत्याकांड में अपने मृत परिजन की लाश पर रो रही और चीख चीत्कार करती महिअलो पर पत्थर बरसे थे .. उनके घर वालों पर लाश को घर के गेट पर रखने के मुकदमे दर्ज कर लिए गये थे .. मृत गवाह राममोहन की लाश को पुलिस वालों ने टांग पकड कर घसीटा भी था और सब चुपचाप देखा जाता रहा क्योकि मामला उनके हिसाब से तथाकथित धर्मनिरपेक्षता को ज़िंदा रखने का था भले ही रामबाबू और राममोहन मृत हो चुके थे . आज NIA पर सवाल उठाते इस बुद्धिजीवी वर्ग ने तब एक बार भी एक ही परिवार की २ लाशें अलग अलग समय में निकलने पर सवाल खड़े नहीं किये थे . रामबाबू गुप्ता हत्याकांड और राममोहन हत्याकांड में असल दोषी अब तक उस कानून की पहुच से दूर हैं जो आज उसी रामबाबू के परिवार वालों के आगे शेर बने घूम रहे हैं . योगी के प्रदेश में और मोदी के केंद्र में होने के बाद भी अगर किसी को जमीनी हकीकत देखनी है तो वो टांडा अम्बेडकरनगर में जा कर देख सकता है जहाँ अभी भी रह रह कर चीखें और कराह सुनाई देती है..

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