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पाकिस्तान युद्ध में एयरपोर्ट से बर्फ की सिल्लियां हटाईं और चीन युद्ध में सीमा पर रक्तदान किया था संघ ने ..कहीं नहीं दिखे थे तब मज़हबी ठेकेदार

संघ सैनिकों के प्रति कितना सम्मान भाव रखता है, इसका अंजादा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 1965 के ही युद्ध में आधी रात को आरएसएस के दिल्ली कार्यालय में युद्ध के दौरान घायल सैनिकों के लिए खून की कमी की जानकारी प्राप्त हुई और सुबह–सुबह पांच सौ की संख्या में संघ के स्वयंसेवक रक्तदान करने के लिए सैनिक अस्पताल पहुँच गए। अतः कहना न होगा कि सेना के प्रति संघ के सम्मान और समर्पण को किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है, उसकी गाथा इतिहास में दर्ज है।

गौरतलब है कि कई ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं, जो इस बात की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त हैं कि जब-जब देश पर संकट आया है, आरएसएस ने पूरी लगन एवं निष्ठा के साथ सेना की सहायता की है। मसलन, सन 1947 के अक्टूबर महीने के अंत में जम्मू–कश्मीर पर पाकिस्तान द्वारा हुए अचानक हमले के समय राष्ट्रीय स्वयं संघ के स्वयंसेवकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए श्रीनगर हवाई अड्डा जो हिमपात के कारण बर्फ की सिल्लियों से भरा हुआ था, को महज 48 घंटे के अंदर साफ़ कर दिया था। इसके बाद ही वहाँ भारतीय सैनिकों का विमान उतर सका..

संघ के इस सेवाभाव से नेहरू इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने 26 जनवरी, 1963 की गणतंत्र दिवस की परेड में संघ को ससम्मान आमंत्रित किया। उससे भी ज्यादा हैरान कर देने वाली बात यह है कि आरएसएस को इसकी सूचना महज तीन दिन पहले प्राप्त हुई थी, लेकिन अनुशासित संगठन के लिए यह तीन दिन ही बहुत थे। लिहाज़ा तीन हजार पूर्ण गणवेशधारी स्वयं सेवकों ने पूरी तैयारी से पद संचलन किया। तीन दिन में ऐसी तैयारी कर लेना संघ के उसी अनुशासन को दिखाता है, जिसकी बात अपने ताजा बयान में संघ प्रमुख ने की है।

संघ प्रमुख के इस बयान को लेकर राजनीतिक तापमान भी बढ़ गया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस बयान को शर्मनाक बताते हुए इसे सेना और शहीदों का अपमान करार दे डाला। उन्होंने संघ प्रमुख से माफ़ी की मांग की। हालांकि मोहन भागवत पर सेना के अपमान का आरोप लगाने से पूर्व राहुल गांधी को अपने ‘खून की दलाली’ वाले बयान को याद कर लेना चाहिए था, फिर शायद वे संघ प्रमुख पर सेना के अपमान का आरोप लगाने का साहस नहीं कर पाते। साथ ही, जब हमारे जवान सीमा पार जाकर दुश्मनों के बंकरों को तबाह करने वाली सर्जिकल स्ट्राइक किए थे, तो इन्हीं राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस ने उनके पराक्रम पर संशय दिखाते हुए सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत सेना से मांग लिया था। क्या यह सेना का अपमान नहीं था ? इसके लिए कांग्रेस ने अभीतक माफ़ी क्यों नहीं मांगी ?

**आदर्श तिवारी

(उपरोक्त विचार लेखक के अपने स्वतंत्र विचार हैं ,)

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