भले ही कहीं चुनावी मुद्दा प्याज, तेल, बिजली, पानी आदि हों लेकिन पाकिस्तान का चुनाव लड़ा जा रहा इस्लाम और कश्मीर के नाम पर

ये अलग अलग देशो के अलग अलग एजेंडे होते हैं . धर्मनिरपेक्ष देशो अर्थात सेकुलर देशो में चुनावो के मुद्दे सडक, नाली, तेल , बिजली, पानी आदि होते हैं जिस पर कईयों ने सरकारें बनती और बिगड़ती देखी हैं . उन देशो में जो सरकार दिखाना चाहती है वही अधिकांश जनता देखती भी है और उसी अनुसार से अपने विचारो को समाज में भी प्रस्तुत करती है .. लेकिन जहाँ धर्मनिरपेक्षता की सीमाएं समाप्त होती हैं वहां पर शुरू होता है वो सब कुछ जो सेकुलर लोगों के लिए एकदम नया और कभी न देखे और सोचे जाने वाला जैसा होता है . यद्दपि तथाकथित धर्मनिरपेक्षता की सीमायें भारत की सीमओं के बाहर जाते ही दम तोड़ देती हैं .

चाहे वो भारत के पूरब में इस्लामिक मुल्क बंगलादेश हो या भारत के पश्चिम में मौजूद इस्लामिक देश पाकिस्तान हो . यहाँ धर्मनिरपेक्षता और सेकुलर जैसे शब्दों से किसी का कोई भी वास्ता नहीं है . वहां की जनता अपने मत और मजहब को सबसे बेहतर और बाकी सबको अपने आस पास भी नहीं मानती है . कुछ वही माहौल देखने को मिल रहा है भारत के बगल में एक कलंक के समान बसा पाकिस्तान .. भारत के राजनेताओं की एतिहासिक भूल के चलते कई सदियों का दर्द बन चुके पाकिस्तान में आज कल चुनाव प्रचार का बड़ा जोर है और इस जोर में सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे जिस मामले में वो मामला है कश्मीर या इस्लाम ..

पाकिस्तानी नेता खुल कर अपने भाषणों में कश्मीर में भारत की फ़ौज द्वारा हथियार उठा कर लड़ रहे आतंकियों को मुसलमान बता रहे हैं और अपनी सरकार आने पर कश्मीर को कब्ज़ा कर के पाकिस्तान में मिला लेने के बयान दे रहे हैं . यहाँ मामला सिर्फ कश्मीर का ही नहीं है , कई पाकिस्तानियों ने अपने बयानों में म्यन्मार में बौद्धों के रोहिंग्या आतंकियों के खिलाफ चलाये गये अभियान को गलत ठहरा कर वहां की जनता का दिल जीता है और कईयों ने अपनी सरकार बनने पर भारत ही नहीं इजरायल तक को सबक सिखाने की धमकी दे डाली है जिसे मुस्लिम एकता जिंदाबाद के नारे लगा कर वहां की जनता खूब सराह रही है .

उदाहरण के लिए पाकिस्तान में चुनाव के आख़िरी दिन पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन) के वर्तमान प्रमुख शाहबाज़ शरीफ ने लोगों से वादा किया कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनी तो वे देश में कश्मीर का विलय कराएंगे. इस तरह का माहौल तैयार करेंगे कि कश्मीर की आबादी ख़ुद पाकिस्तान में शामिल होने के लिए तैयार हो. ठीक वैसे ही जैसे पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी का आपस में विलय हुआ था. इस से पहले वो बोले थे कि वो मानते हैं कि यह काफी-कुछ वैसा ही होगा जैसे बर्लिन (जर्मनी की राजधानी) की दीवार गिरा दी (जब तीन अक्टूबर 1990 में पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी का विलय हुआ था) गई थी.’ उन्होंने भारत पर आरोप भी लगाया कि वह कश्मीरियों से अमानवीयता से पेश आ रहा है. उन पर अत्याचार कर रहा है. इतना ही नहीं पाकिस्तान के उभरते नेता बिलावल भुट्टो ने भी अपने कई बयानों में कश्मीर और गाजा पट्टी के साथ इजरायल का नाम लिया है .

पाकिस्तान के वजीर ए आज़म बनने की राह में सबसे शसक्त प्रत्याशी माने जाने सकने वाले पूर्व क्रिकेटर और अपनी पत्नी रेहम खान से विवाद कर के चर्चा में आये  इमरान खान ने भी इस मामले में बार बार कश्मीर का नाम ले कर अपनी छवि कट्टरपंथी समाज में अच्छी की है .. इसके साथ ही दुर्दांत आतंकी हाफ़िज़ सईद भी भी  पूरे पाकिस्तान में अपने प्रत्याशी उतारना चाह रहा था जिसके खुले शब्दों में पाकिस्तान ही नहीं भारत का भी इस्लामीकरण करना बताया जाता था .  फिलहाल कुछ नेताओं ने स्थानीय मुद्दे उठाये लेकिन उनका इस पूरे चुनावों में कहीं से भी कोई भी वजूद नहीं है और मुख्य लड़ाई इन्ही कट्टरपन्थियो के बीच होनी है . 

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