राहुल गांधी के भाषण में हमेशा रहा था संघ की शाखाएं समाप्त करने का संकल्प जबकि जैश व लश्कर के ख़िलाफ़ एक भी शब्द नहीं

भारत इस समय युद्ध जैसे हालात झेल रहा है..जितने सैनिक युद्धों में अपने जीवन का बलिदान नही देते हैं उस से ज्यादा तो आंतरिक गद्दारों से लड़ कर बलिदान हो चुके है .. पुलवामा के हमले के बाद पूरे देश मे इस्लामिक आतंक के खिलाफ आक्रोश की लहर फैल चुकी है और भले ही दिखावे के लिए कुछ राजनेता कहते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ वो सरकार के साथ खड़े हैं लेकिन उनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर होता है.. कांग्रेस पार्टी के अगर गत कुछ समय के बयानों पर नजर डाली जाए तो उनके निशाने पर जैश , लश्कर, हिजबुल आदि आतंकी दल नहीं बल्कि प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ही रहा है और राहुल गांधी ने कभी इस्लामिक आतंकवाद और लगाम लगाने की प्रतिबद्धता न दिखाने के बजाय सीधे सीधे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखाएं बन्द करने का एलान किया था जिसका दुष्परिणाम आज देश ही नहीं बल्कि संसार के आगे साफ साफ देखा जा सकता है..

ये कहना कदापि गलत नही होगा कि मन्दिर मन्दिर दिखने वाली काँग्रेस पार्टी एक बार फिर से अपने पुराने ढर्रे पर आती दिख रही है . उसने सीधे सीधे अपनी लड़ाई राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से बताई है और उसको खत्म करने के लिए अपने संकल्प को दोहराया है . निशाने पर सीधे सीधे संघ रहा है कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी के और उनके साथ सभी अन्य पदाधिकारियों के . लेकिन इस पूरे बयानबाजी में कहीं भी भारत की जनता व् सैनिको के लिए संकट बने आतंकी संगठनो का नाम नहीं आया था जिसको उन्मादी तत्वों को कहीं न कहीं बढ़ावा देना ही कहा जायेगा और एक पक्ष को खुश करने के लिए दूसरे पक्ष को साफ साफ आलोचना का शिकार होना माना जायेगा ..

कांग्रेस के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के साथ-साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर जमकर हमला बोला था.. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि जो लोग भारत को धर्म के आधार पर विभाजित करना चाहते हैं, उन्हें देश के निर्माण में अल्पसंख्यकों के योगदान को नहीं भूलना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरएसएस के प्रति झुकाव रखने वाले आईएएस अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि हम मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के विभिन्न सरकारी संस्थानों में मौजूद सभी आरएसएस समर्थक नौकरशाहों को एक-एक कर निकालने का काम करेंगे।इस पूरे भाषण और घोषणा में एक बार भी देश के अन्दर खून बहा रहे आतंकी संगठनों का नाम न लेना हर किसी को हैरान करता रहा..

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