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2 पाकिस्तानियों को गिरफ्तार करने के लिए सहारनपुर पुलिस के अथक संघर्ष को जान कर आप खुद कह उठेंगे- “जय जवान”

एक के बाद एक बंगलादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार करती सहारनपुर पुलिस के लिए अब 2 पाकिस्तानियों को गिरफ्तार करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. इसको उपलब्धि इसलिए भी कहा जा सकता है क्योकि इसका सम्बन्ध सीधे भारत की आन्तरिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है और जब नाम किसी पाकिस्तानी का आता है तो न किसी जिले की पुलिस बल्कि प्रदेश और दिल्ली तक एक सनसनी फ़ैल जाती है. यकीनन सहारनपुर पुलिस का ये कार्य ऐसा है जो अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन सकता है .

एक सामान्य व्यक्ति की जानकारी में सिर्फ इतना ही होगा कि पुलिस को सूचना मिली कि २ पाकिस्तानी यहाँ छिपे हैं और उसने छापा मार कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया होगा .. पर असल सच्चाई इस से कही उलट और विपरीत है .. उत्तर प्रदेश के जिले सहारनपुर में कोई अफ्स्पा कानून नहीं लगा है कि पुलिस बिना किसी कारण के किसी को भी उठा सकती है और किसी की भी तलाशी आदि ले सकती है . ये वो प्रदेश है जहाँ मानवाधिकार वालों का सबसे ज्यादा बोलबाला है और साथ में ही अल्पसंख्यक आयोग जैसे कई अन्य संगठन .

फिर भी बात यहीं खत्म नहीं हुई है . ये कहानी असल में वर्ष 1984 से शुरू हुई थी जब सहारनपुर से गिरफ्तार हुए दोनों पाकिस्तनियो की माँ फरहाना परवीन मात्र 10 वर्ष की उम्र में अपने पाकिस्तानी बहनोई जफर के साथ पाकिस्तान चली गई थी.. पाकिस्तान में फरहाना परवीन का निकाह वहीँ के रहने वाले पाकिस्तानी नासिर से हो गया और उसी के चलते 1986 में उन्हें पाकिस्तान की नागरिकता दे दी गयी थी.. लेकिन पाकिस्तानी नासिर ज्यादा दिन सही से नहीं रह पाया ..

इसी के कुछ समय बाद 1987 में पाकिस्तानी शौहर नासिर से फरहाना परवीन का तलाक हो गया था.. जब उसको पाकिस्तान में अपना जीवन बिखरता दिखा तो वो 45 दिन का वीजा ले कर भारत चली आई और इसी बीच उसने सहारनपुर के नानौता निवासी नदीम से निकाह कर लिया .. पाकिस्तान द्वारा मिला 45 दिन का वीजा खत्म होने के बाद फरहाना परवीन को वापस पाकिस्तान जाना पड़ा था.. और वो २ जून 1987 को वापस पाकिस्तान चली गयी थी. उनके साथ उनका शौहर नदीम अहमद भी पाकिस्तान गया था .

पाकिस्तान में ही फरहाना परवीन ने तीन बच्चो अनस, हमद और सजिया को जन्म दिया . और वर्ष 1992 में एक बार फिर से फरहाना परवीन अपने तीनो बच्चो के साथ वापस भारत आ गयी . इस बार फरहाना परवीन का वीजा लॉन्ग टर्म का था और इन्होने एक लम्बे समय तक रहते हुए भारत की नागरिकता पाने की तमाम कोशिशे की.. लेकिन वो सभी आख़िरकार असफल रहीं . वीजा अवधि समाप्त होने के बाद आखिरकार एक बार फिर से 1998 में उन सबको फिर से पाकिस्तान जाना पड़ा .

इस बीच फरहाना परवीन एक और सन्तान अनम को जन्म दिया . भारत में किसी भी हाल में बसने पर आमादा ये सभी 17 जनवरी वर्ष 2002 को ये सभी फिर से लॉन्ग टर्म वीजा ले कर पाकिस्तान से भारत आये और फिर से भारत की स्थाई नागरिकता पाने के प्रयास करने लगे . भारत की नागरिकता न मिलने पर इस परिवार ने अवैध और असंवैधानिक रास्ता अपना लिया और सहारा लेने लगे तमाम फर्जी प्रमाणों और कागजातों को जिसकी अंतिम मंजिल आखिरकार जेल ही थी ..

इसके बाद इन सभी ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिया और सहारनपुर में मटिया महल इलाके में रहने लगे . इसी बीच इन्होने फर्जी प्रमाण पत्रों से वोटर कार्ड , आधार कार्ड और यहाँ तक कि पासपोर्ट भी बनवा डाले . समय के साथ फरहाना परवीन के अब्बू नदीम की मौत हो गयी लेकिन पुलिस की सतर्क निगाहें इन सभी के ऊपर लगी रहीं . पुलिस की सामान्य जांच को भी ये सभी बढ़ा चढा कर प्रताड़ना का नाम देते रहे और खुद को भारत का नागरिक बताते रहे .. जबकि वो सभी गलत थे .

अपने वर्ग विशेष होने को ही अपना विक्टिम कार्ड बना कर इन चारों से खुद को पुलिस द्वारा प्रताड़ित होता बताया जबकि असल में सहारनपुर पुलिस ही सब कुछ सही कर के भी दोषी ठहराई जा रही थी. इतना ही नहीं , शत प्रतिशत न्याय पथ पर चल रही सहारनपुर पुलिस को अदालत तक में खींच लिया गया . एक तरफ पुलिस को अपनी सतर्क निगाहें उन संदिग्ध पाकिस्तानियों पर जमाए रही तो दूसरी तरफ अदालत में जा कर सभी कानूनी कार्यवाही का सामना करती रही .. अदालत ने इसकी बाकायदा जांच करवाई और जांच के बाद ये साबित हुआ कि सहारनपुर पुलिस सही थी.. पुलिस ने आख़िरकार इन दोनों भाइयो को गिफ्तार कर लिया है और इनकी दोनों फरार बहने तलाशी जा रही हैं जिनके जल्द ही गिरफ्तार होने की सम्भावना है .

यद्दपि अगर पुलिस गलत साबित होती तो उसको मीडिया से ले कर राजनीति तक में लगातार मुस्लिम विरोधी होने के आरोप झेलने पड़ते. उन्हें मानवाधिकार के कटघरे में कई बार पेशी देनी होगी और मुंबई के बॉलीवुड तक के ट्विट झेलने पड़ते .. पर जब पुलिस सही साबित हुई और पाकिस्तानी गलत, तब सहारनपुर पुलिस के समर्थन में और उनके सम्मान में बहुत कम लोग खड़े दिखाई दे रहे हैं . फिलहाल सुदर्शन न्यूज तमाम आरोप प्रत्यारोप झेल कर भी अटल और अडिग रही सहारनपुर पुलिस और उसके कप्तान दिनेश कुमार पी को उनकी जांबाजी के लिए बारम्बार साधुवाद देता है जिन्होंने इंच मात्र भी कर्तव्यपथ से बिना विचलित हुए समाज और देशहित का कार्य किया.. ऐसा कार्य बाकी अन्य जनपदों ही नहीं बल्कि प्रदेशो की पुलिस के लिए एक नजीर बन सकते हैं..

 

 

रिपोर्ट –

राहुल

सहायक सम्पादक- सुदर्शन न्यूज

नॉएडा

मो0 – 9598805228

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