कहीं दलित – सवर्ण के बाद अब ब्राहमण व् क्षत्रिय को आपस में लड़ाने की साजिश तो नहीं अयोध्या में ? मुख्तार अंसारी के एक खास नेता की बयानबाजी खड़े कर रही सवाल


पिछले कुछ समय से प्रभु श्रीराम की धर्मनगरी अयोध्या में एक बार फिर से हलचल है . ये हलचल किसी साम्प्रदायिक उन्माद की नहीं बल्कि जातिवादी विचारधारा के लोगों द्वारा पैदा की गयी लग रही है . यहाँ पर एक ठेकेदार अजय सिंह उस सोनू की मौत हो जाती है जिसको कई लोग मानसिक तनाव के चलते की गयी आत्महत्या बता रहे हैं तो कुछ लोग इसको अयोध्या क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के गोसाईंगंज से विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू द्वारा रची गयी साजिश से हत्या. इस मामले में बीच में बयानबाजी में एक पूर्व विधायक का नाम भी सामने आ रहा है जो खुद को वर्तमान समय में क्षत्रियो का नेता घोषित करने के सभी प्रयास कर रहा है.. जानते हैं इस पूरे मामले को .

इस मामले को समझने के लिए थोडा सा पीछे जाना होगा . मात्र कुछ ही दिन पहले अयोध्या जिले के सिलौनी ग्राम सभा में एक पंचायत होती है जो क्षत्रिय समाज की एकता और आपसी प्रेम को बढाने के लिए आयोजित की जाती है . इस सम्मलेन में मंचासीन तमाम बड़े नेताओं में बस्ती हर्रैया विधानसभा के विधायक अजय सिंह , बलिया से पूर्व प्रधानमन्त्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर और तमाम अन्य लोग शामिल हुए थे . उसी सभा में सब सामान्य रूप से अपने अपने विचार जो सिर्फ क्षत्रिय समाज के ही नहीं बल्कि पूरे सर्व समाज के हित में थे, व्यक्त कर रहे थे .

लेकिन नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया जा रहा है कि उस सभा में एक नेता के निशाने पर क्षत्रिय या सर्व समाज के हित से ज्यादा वर्तमान योगी सरकार रही और घुमा फिरा कर सरकार के तमाम पहलुओं पर ही वार होता रहा . यद्दपि इस से वहां मौजूद बाकी सभी गणमान्य के ऊपर कोई असर नहीं पड़ा लेकिन उस राजनेता के भाव भंगिमा से ऐसा लगा कि वो कहीं न कहीं योगी आदित्यनाथ की सरकार व् उनके पदाधिकारियों से इतना नाराज है जिसका कोई शायद अंत नहीं. इतना ही नहीं वो राजनेता अपनी पार्टी की विचारधारा पर चल कर बाबरी ध्वंस को हिन्दू संगठनो द्वारा किया गया एक गुनाह मानता है और साथ ही साथ उत्तर प्रदेश के सबसे दुर्दांत अपराधियों में से एक मुख्तार अंसारी का बेहद करीबी भी . यद्दपि ये सम्मेलन बेहद शांति और सौहार्दपूर्ण तरीके से बीता जिसमे लगभग सभी ने समाज के हित पर ध्यान दिया .

अगर वोटो को आधार बना कर देखा जाय तो अयोध्या जनपद में अधिकतर लोग ब्राहमण समाज का सबसे बड़ा नेता इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू तिवारी को ही बताते हैं जो पिछले विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर प्रचंड बहुमत से गोसाईगंज विधानसभा से समाजवादी पार्टी के नेता अभय सिंह को हरा कर विधानसभा पहुचे हैं . हालाँकि इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू खुद को समाज के हर वर्ग का सेवक बताते हैं और जतिवाद के बजाय राष्ट्रवाद को प्रमुखता दिया करते हैं जिससे उनकी स्वीकार्यता समाज के हर वर्ग और जाति में लगभग समान रूप से है.. और यही स्वीकार्यता कुछ लोगों को खल रही थी . अगर राष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जाय तो भाजपा के जनाधार को हटाने और छिन्न भिन्न करने के लिए तमाम प्रयास किये जा रहे हैं जिसमे अब तक की सबसे सफल विरोधी राजनीति रही है जातिवादी विचारधारा का प्रचार प्रसार .

अभी कुछ समय पहले ही उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से ले कर महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव तक पूरे भारत भर में दलितों और सवर्णों को लड़ाने की कई कोशिशें की गयी जिसमे से कुछ को सफल भी तब पाया गया जब कई जगहों पर बंद और पुलिस से झडप आदि की घटनाएँ प्रकाश में आई . जांच में कई ऐसे नाम भी सामने आये जो समाज में नेता के रूप में वोट मांगने जाया करते थे . भाजपा के अनुसार वो एक विकृत राजनैतिक साजिश थी .. हालाकि उन्ही विवादों से भारतीय जनता पार्टी को भारी नुक्सान हुआ और राजस्थान , मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े गढ़ ढह गये .. यदि भाजपा के अनुसार ये विपक्ष के कुछ लोगों की साजिश थी तो उस साजिश में विपक्ष के वो लोग काफी सफल भी हुए .. यद्दपि खुद को वामपंथी कहने वाले कई लोग इस बीच में गिरफ्तार भी हुए थे मोदी तक की हत्या की साजिश रचते हुए जिस से भाजपा के इस आरोप को और बल मिला है .

अयोध्या में विगत ६ दिसम्बर व् संतो की महारैली को पुलिस प्रशासन ने बड़ी चौकसी और सतर्कता से सकुशल निबटा दिया . कहना गलत नहीं होगा कि अयोध्या जिला बाकी अन्य जिलों के मुकाबले अपेक्षाकृत शांत रहा जिसके लिए यहाँ के जनप्रतिनिधियों व् प्रशासनिक अधिकारियो का यहाँ की अधिकाँश जनता धन्यवाद भी करती है.. सबसे ख़ास बात ये रही कि भगवान श्रीराम सबके समान रूप से आराध्य होने के कारण दलित सवर्ण की जातिवादी राजनीती भी यहाँ पनप नहीं पाई थी और सब सही चल रहा था .. ये बात कुछ हिंसा पसंद लोगों को रस नहीं आ रही थी और वो कोई नया पैंतरा अपनाना चाह रहे थे ..

फिर होती है एक मौत जो थी एक ठेकेदार सोनू सिंह की जिनका पूरा नाम था अजय सिंह . इनकी मौत कैंट थाना क्षेत्र के कौशलपुरी कॉलोनी इलाके में हुई जो नगर क्षेत्र में है . इसमें गोसाईगंज विधानसभा से विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू को आरोपी बनाया गया लेकिन जिस तरफ से साक्ष्य या अन्य प्रमाण सामने आये , उसके अनुसार कहानी ठीक वही नहीं जो बताई जा रही है . इसके लिए कुछ एलान भी किये गये जो पुलिस की जांच पूरी होने से पहले ही सामने आने से कुछ और कहानी की तरफ इशारा करने लगे .. यद्दपि एक खास वर्ग की बात करते किसी ने भी अब तक ३ साल से रायबरेली की जेल में बंद सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की आवाज नहीं उठाई जिस पर अपनी वर्दी पर थूकने और बुरी तरह से घेर कर मारने वाले नबी अहमद पर गोली चलाने का आरोप है, तब वो शासन अखिलेश यादव का हुआ करता था  . सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की पत्नी सपना सिंह पिछले ३ सालों से हर दरवाजे पर अपना आंचल फैला चुकी है अपने पति की भीख मांगने के लिए लेकिन किसी ऐसे समूह ने अब तक उनकी मांग पर ध्यान देना तो दूर नजर भी नहीं घुमाई है .

यहाँ ध्यान रखने योग्य है कि उस सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह का प्रयागराज स्थित परिवार भीख मांगने की कगार पर आ गया है और उनके पास मुकदमे की पैरवी तक के लिए कुछ नहीं बचा है ..  यद्दपि इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू ने एक बातचीत के दौरान मौखिक रूप से सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र की भीख मांगने की कगार पर आ गयी पत्नी और बच्चो को हर सम्भव सहायता देने की बात भी कही थी जो उनके सर्व समाज हित की मानसिकता व् मानवीय पहलू को दर्शाता है . जबकि इस मामले में इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू के विरोध में उतरे कुछ लोग तब पूरी ताकत में थे लेकिन उन्होंने एक बार फिर शैलेन्द्र सिंह के परिवार का हालचाल तक नहीं लिया था .

यद्दपि इस मामले में अब तक अयोध्या पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक खब्बू तिवारी समेत दो अज्ञात शूटरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 386, 120 बी, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया है लेकिन फिलहाल पुलिस को विधायक के खिलाफ कोई पुख्ता प्रमाण अब तक नहीं मिले हैं . इस मामले में एसएसपी ने कार्रवाई करते हुए साआदतगंज चौकी इंचार्ज रामेंद्र वर्मा को लाइन हाजिर कर दिया. मृतक अजय प्रताप सिंह मूलतः थाना हैदरगंज के बैती कला गांव के रहने वाले थे और इनकी मां शीला सिंह उसी गांव की ग्राम प्रधान है. यहाँ ये भी जानना जरूरी है कि आरोपित विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू तिवारी इस पूरे मामले पर खामोश बने हुए हैं और उन्होंने पुलिस पर पूरा भरोसा जताया है . वो न्यायपलिका व् प्रशासन को पूरा सहयोग दे रहे हैं और उनका मानना है कि वो अंत में निर्दोष साबित होंगे . इस मामले को जातिवादी स्वरूप में ढालने और ब्राहमण क्षत्रिय के बीच में खाई बनाने की कोशिश करने वालों के मंसूबे भी अब पुलिस की चौकसी के साथ सक्रियता और प्रारम्भिक जांच में ध्वस्त हो चुके हैं  और अयोध्या एक बार फिर से अमन व् चैन की साँस ले रहा है . प्रशंसा की पात्र यहाँ अयोध्या की जनता भी है जो किसी के बहकावे में आये बिना स्थिति पर नजर रखे है और पुलिस की जाँच रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा कर रही है ..


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