कभी शामली के बलिदानी अंकित तोमर को खुद कंधा दिया था IPS अजयपाल शर्मा ने, दी थी शाही विदाई.. खुद खड़े रहे थे अस्पताल के बाहर एक बड़े भाई की तरह

अगर उत्तर प्रदेश के किसी पुलिस वाले से आज के उसके मनोभाव को जाना जाय तो सबसे पहले उसके रुंधे गले से एक ही नाम निकलता है और वो है “संभल” .. अपराधियों से जंग और बलिदान ये आज से नहीं बल्कि पुलिस की प्राचीन परम्परा रही है .. ये ही वो विभाग है जो कई लोगों द्वारा अपने लिए तमाम अपशब्द सुन कर भी अड़ा रहता है अपने कर्तव्य पर और कभी शामली के अंकित तोमर तो कभी चित्रकूट के जे पी सिंह की तरह अपना बलिदान दे कर लड़ता रहा है समाज की शांति और सुरक्षा के लिए .

इसमें कहना कुछ भी गलत नहीं होगा कि सेना के बाद अगर किसी ने इस देश के लिए सबसे ज्यादा खून बहाया है तो वो है पुलिस विभाग लेकिन राजनीती के गोल गोल चक्कर में इन्हें वो अपेक्षित सम्मान नहीं मिला जिसके ये हकदार थे.. संभल में बलिदान हुए वीर जवान भी पुलिस के द्वारा त्याग और बलिदान की उसी बड़ी श्रृंखला का हिस्सा था.. अफ़सोस की बात है कि पुलिस विभाग बहार के तमाम आक्षेप सुनने का आदी सा हो गया है लेकिन उसको दर्द तब होता है जब उसको घाव कोई अपना ही दे ..

उनका न तो इतना वेतन होता है और न ही उन्हें इतनी सुविधाएँ कि वो किसी बात पर इतरायें.. उन्हें जीते जी सम्मान कब मिलता है ये शायद बहुत सोच कर कोई पुलिस वाला बता सकेगा लेकिन अपने बलिदान के बाद वो जरूर ये आशा रखता है कि उसकी अंतिम विदाई सम्मान के साथ हो .. बलिदान देने वाला तो चला गया होता है लेकिन जब बलिदान का अपमान होता है तो उसके साथी सिपाहियों की आत्मा तक कराह उठती है और आज कल वही हो रहा है संभल जिले में .

जिस प्रकार से संभल से वीडियो आ रहे हैं उसमें साफ देखा जा सकता है कि बलिदानियों को तिरंगा भी नसीब नहीं हुआ और नीचे एक चादर तक नही रखी गई थी.. उनका खून कफन के बजाय कभी लोडर के लोहे पर बह रहा था और कभी चारपाई सोख रही थी .. उनकी वर्दी जितना खून सोख सकती थी उतना सोख कर भीग गई थी.. उनके जीवित रहते भले मदद नही पहुची लेकिन उनके बलिदान के बाद उनके साथ जो सलूक हुआ उसने पुलिस विभाग को ही नहीं आम जनमानस को भी दुःख के समय भी क्रोधित होने पर मजबूर कर दिया था .

निश्चित तौर पर इसके लिए पूरे पुलिस विभाग को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है . ये कतई नहीं कहा जा सकता है कि पुलिस में हर कोई बड़े पद पर ऐसा ही है . ज्यादा समय की बात नहीं ये जब वर्तमान SP रामपुर अजयपाल शर्मा जी SP शामली थे. उस समय एक मुठभेड़ में शामली पुलिस का एक जांबाज़ अंकित तोमर घायल हुआ था जो मौत से लड़ते हुए आख़िरकार सदा के लिए अमर हो गया था . उस समय एक इंस्पेक्टर भगवत जी भी घायल हुए थे इस मुठभेड़ में दुर्दांत अपराधी को मार गिराते हुए..

उस समय अजयपाल शर्मा ने अंकित तोमर को फ़ौरन ही उच्चतम चिकित्सीय व्यवस्था करवाई और एक बड़े भाई की तरह अस्पताल के आगे खड़े दिखाई दिए थे . उस समय वो कभी भगवान से तो कभी डाक्टरों से प्रार्थना करते देखे गये थे अपने अधीनस्थ के जल्द स्वस्थ हो जाने के लिए.. ये वही चिंता थी जो एक बड़ा भाई अपने छोटे भाई के लिए करता है .. ये इश्वर का विधान था कि हर कोशिश के बाद भी जांबाज़ अंकित तोमर को बचाया नहीं जा सका और उन्होंने नॉएडा में आँखे मूँद ली थी .

लेकिन अपने अधीनस्थ के लिए अजय पाल शर्मा का एक सेनापति के रूप में कर्तव्य यहाँ खत्म नहीं हुआ था . वो अंकित तोमर के परिवार से मिले और हर तरह की मदद का भरोसा अपनी जिम्मेदारी पर दिया.. वो अंकित के माता पिता भाई बहन हर किसी से मिले और भावुक हो कर हर तरह से हिम्मत बंधाई.. इतना ही नहीं अंकित तोमर की अंतिम विदाई के समय अंकित को तिरंगे में रखा गया और शामली पुलिस लाईन को एक योद्धा की अंतिम विदाई के लिए भव्य रूप से सजाया गया .

अंकित तोमर की अंतिम विदाई के समय पुलिस के वाहनों का कभी न खत्म होता दिखने वाला काफिला निकला और हर जुबान पर अंकित तोमर अमर रहें के नारे गूँज रहे थे.. उस समय शामली पुलिस के ट्विटर हैण्डल की प्रोफाइल फोटो भी अजय पाल शर्मा के निर्देश पर अंकित तोमर की लगा ली गई थी जिसे उत्तर प्रदेश पुलिस के कई जिलों के हैंडलो ने लगा लिया लेकिन संभल में बलिदान सिपाहियों की फोटो ट्विटर पर प्रोफाइल एक पल के लिए भी नहीं लगी और इसी के चलते किसी अन्य जिले ने भी वो नहीं किया ..

अजयपाल शर्मा के किये इस कार्य के बाद शामली में जहाँ पुलिस वालों में जोश आया था और उन्होने अपने ऐसे सेनापति के नेतृत्व में अपराधियों से शामली को मुक्त करवा कर ही दम लिया था. उस समय अंकित तोमर की अंतिम यात्रा देखने वाले कैरियर बना रहे युवाओं ने भी पुलिस में जाने की इच्छा जताई थी.. लेकिन अब जो कुछ भी संभल में हुआ उसके बाद न सिर्फ आम जनमानस में रोष देखने को मिल रहा है अपितु खुद पुलिस विभाग में असंतुष्टि देखने को मिल रही है.. यकीनन बलिदान के सम्मान के अजय पाल वाली स्टाइल को पुलिस वाले कभी नहीं भूल पायेगे..

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