Breaking News:

जौहर दिवस विशेष- क्या रानी कर्णावती ने क्रूर लुटेरे हत्यारे हुमायु को राखी भेजी थी ? गौरवशाली इतिहास में भी सेकुलरिज्म का घोटाला

अगर आप इस गलतफहमी में हैं कि भारत में सिर्फ कुछ नेताओं ने ही घोटाले किये है और वो घोटाले केवल धन सम्पत्ति अदि के हैं तो शायद आपको पुनर्विचार करने की जरूरत है .. घोटाला सिर्फ राजनीति में नहीं हुआ है बल्कि घोटाला इतिहास में भी हुआ है , घोटालेबाज सिर्फ कुछ राजनेता ही नहीं बल्कि तमाम वो लोग भी हैं जिन्हें भारत के तमाम लोग इतिहासकार बताया करते थे भले ही उन्होंने बाद में पुरष्कार लौटाने से ले कर गाय खा कर सेल्फी आदि भेजी थी .

ज़रा सोचिये कि उस रानी को भी सेकुलर दिखाने की साजिश रच डाली गयी जिसने अपने पति से ले कर संतानों तक को सिर्फ और सिर्फ हिन्दू और हिंदुत्व के लिए लड़ते और बलिदान होते देखा . रानी कर्णावती के जीवन को अगर देखा जाय तो उनके पति राणा संग्राम सिंह ने हिन्दू साम्राज्य बनाने के लिए तमाम हिन्दू सम्राटों को जीवन भर एक सूत्र में पिरोने के प्रयास किये थे और उनके चलते ही न तो गुजरात का क्रूर बहादुरशाह और न ही दिल्ली का हुमायु मेवाड़ को जीतने का सपना पूरा कर पाया था .

क्या ये शिक्षा उन्होंने अपनी उस पत्नी को नहीं दी होगी जो जीवन भर उनके साथ रहीं .. लेकिन उस रानी को हुमायु की राखी भेजने की बात बता कर इतिहास में भी सेकुलरिज्म का घोटाला करने की साजिश रची गयी . जहाँ एक तरफ रानी के क्रूर और लुटरे मुगल शासक हुमायु को राखी भेजने की बात लिखी जा रही है वहीँ उसी समय मेवाड़ के किले में वही रानी अपने राजपूत सामन्तो को ललकार रहीं थी कि वो उठें और अपनी मातृभूमि की तरफ बढ़ रहे विधर्मियो के कदमों को धर्मयुद्ध लड़ कर रोकें .

ज़रा सोचिये कि जो रानी अपने सामंतो को और अपने योद्धाओं को अपने राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए ललकार कर दुश्मन को विधर्मी बता रही थीं वहीँ एक उस मुगल को राखी भेजेंगी जो उनके पति के समय में कई बार मेवाड़ की तरफ कुदृष्टि से देख चुका था . इतना ही नहीं , जिन क्रूर मतांधो से अपने सतीत्व और धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने खुद को अपनी सहेलियों के साथ आग में स्वाहा कर डाला वो उनसे ही मदद मांगेगी .. क्या उनको इस से पहले के युद्धों में क्षत्राणीयों के साथ मुगल सेना की हुई क्रूरता का आभास नहीं था .. यकीनन था , तो क्या वो एक विपत्ति बहादुरशाह को हटाने के लिए दूसरी उस से बड़ी विपत्ति हुमायु को खुद ही निमंत्र्ण देंगी . यकीनन आत्ममंथन के बाद जवाब आएगा कि हरगिज नहीं .

8 मार्च, 1535 को रानी कर्णावती 13000 स्त्रियों के साथ जौहर में कूद गई। 3000 छोटे बच्चों को कुँए और खाई में फेंक दिया गया। ताकि वे मुसलमानों के हाथ न लगे। कुल मिलकर 32000 निर्दोष लोगों को अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा।  बहादुर शाह किले में लूटपाट कर वापिस चला गया। हुमायूँ चित्तोड़ आया। मगर पुरे एक वर्ष के बाद आया।परन्तु किसलिए आया? अपने वार्षिक लगान को इकठ्ठा करने आया। ध्यान दीजिये यही हुमायूँ जब शेरशाह सूरी के डर से रेगिस्तान की धूल छानता फिर रहा था।  हमारे देश का इतिहास सेक्युलर इतिहासकारों ने लिखा है। भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम थे।

Share This Post