हिंदुत्व ब्रांड कृष्णानंद राय की हत्या और मुख्तार की गुलामी के चलते मुन्ना बजरंगी तिरस्कृत हो गया था समाज से. उसकी मौत के बाद जनता खामोश, आवाज सिर्फ मीडिया में

भले ही आज मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह लाख कोशिश कर के अपने पति दुर्दांत माफिया मुन्ना बजरंगी के कत्ल को जनता का आंदोलन बनाना चाह रही हैं लेकिन उसके लिए जनता पूरी तरह से खामोश है और आवाज मात्र मीडिया भर में उठ रही है .. कई जगहों पर तो सिर्फ इसलिए क्योंकि सूबे में योगी आदित्यनाथ की सरकार है ..  सीमा सिंह इस मामले को आनंदपाल के जनांदोलन जैसा बनाने का सोच रही थीं लेकिन खुद मुन्ना बजरंगी के कुकर्म थे जो कहीं से कोई भी इस मामले में बोलने के लिए तैयार नही हो रहा है ..

जब मुस्लिमों का बड़ा नाम बन कर मुख्तार अंसारी तेजी से उभर रहा था तब उसके खिलाफ मोर्चा संभाला था क्षत्रिय बृजेश सिंह ने जिन्होंने मुख्तार की वाराणसी क्षेत्र में घुसपैठ को रोकने की कोशिश की थी ..मुख्तार के साथ गाजीपुर और मऊ जनपद के कई मुस्लिमो की सामूहिक ताकत थी जिसमे से किसी ने भी उसका विरोध नही किया था लेकिन बृजेश सिंह ने जब मुख्तार के खिलाफ हिंदुओं को संगठित करने की कोशिश की तब उनके खिलाफ खुद उनकी ही क्षत्रिय लॉबी में खड़ा हो गया था मुन्ना बजरंगी और मुख्तार की गुलामी में मारना शुरू कर दिया बृजेश सिंह के ही सदस्यों को .. यहीं से मोह भंग हो गया था मुन्ना बजरंगी के लिए खुद उसके ही क्षत्रिय समाज का ..

इसके बाद रही सही कसर मुन्ना बजरंगी न उस क्षेत्र के सबसे बड़े कट्टर हिंदुत्व ब्रांड और भाजपा विधायक कृष्णानन्द राय को मार कर खत्म कर दी .. उस मौके से 6 हिंदुओं का कत्लेआम मात्र मुख्तार के इशारे पर हुआ था जिसे अंजाम दिया था मुन्ना बजरंगी ने .. बस यहीं से उसने अपने लिये बची खुची सहानभूति भी खत्म कर ली .. जीवन भर मुख्तार के पैसों पर पला व उनकी गुलामी बजाया मुन्ना बजरंगी अब मारा गया लेकिन उसकी हत्या पर वही मुख्तार अंसारी और उसकी पूरी टीम खामोश है जिसके लिए उसने अपने ही क्षत्रिय समाज से शत्रुता ले ली और बहा डाला था अपने ही कई सगोत्रीय लोगों का खून ..इसी मुन्ना बजरंगी ने वाराणसी में बृजेश सिंह, विनीत सिंह, चुलबुल सिंह जैसे नामी क्षत्रिय नामो को खत्म करने के लिए तारिक जैसे पेशवर और घोर मज़हबी कट्टरपंथी अपराधी को जिम्मा सौंपा था जो खुद ही लखनऊ में मार डाला गया था ..

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