रिहा हुआ पत्नी को टुकड़ों में काट कर मक्खन लगा तंदूर में जलाने वाला पूर्व कांग्रेसी नेता लेकिन दारा सिंह की रिहाई कब, ये किसी को नहीं पता..

वो राजनैतिक हस्ती हुआ करता था . कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं का करीबी .. कांग्रेस के लिए इतना समर्पित था कि कांग्रेस में ही काम करने वाली एक सदस्या से उसने विवाह भी कर लिया और तेजी से सीढियां चढ़ रहा था सफलता की . भले ही उसको सजा मिली उस घिनौने कृत्य की जिसकी माफ़ी की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था .. पर आख़िरकार उसको माफ़ी मिल ही गयी जिसको राजनैतिक हलको में बताया जा रहा है न्याय होंगा .. लेकिन कहीं कोई और है जो अभी तक इसी तरह के न्याय के लिए तरस रहा है .

ज्ञात हो कि न्याय के लिए भटक रहे उस दूसरे व्यक्ति का नाम है दारा सिंह जो उडीसा की क्योंझर जेल में लगभग २१ साल से हिन्दुओ के धर्मांतरण के खिलाफ खुद से आगे बढ़ कर हिंसक रूप में कानून को हाथ में लेने के अपराध में जेल काट रहा है . उसका नाम कहीं भी किसी के जुबान पर नहीं है जबकि कभी वो महीनों ही नहीं सालों तक रहा था मीडिया की सुर्खियाँ . इतना ही नहीं , उसी दारा सिंह पर आये थे लगभग उस समय के हर राजनेता के बयान ..

पर उसकी चर्चा से कहीं दूर कांग्रेस का वो पूर्व कद्दावर नेता आखिरकार रिहा हो गया है जो अपनी पत्नी के टुकड़े टुकड़े काट कर उसमे मक्खन लगा कर उसको जलाता हुआ रंगे हाथों पकड़ा गया था . दिल्ली हाईकोर्ट ने 1995 के तंदूर हत्याकांड के दोषी सुशील शर्मा को रिहा करने का आदेश दिया था . ये आदेश दिसम्बर २०१८ में आया था . हाईकोर्ट ने शर्मा को तुरंत प्रभाव से रिहा करने का ऑर्डर दिया है. इस केस का दोषी सुशील पिछले 23 सालों से तिहाड़ जेल में बंद था वो आज़ाद हो गया .

उसकी बीबी नैना साहनी की बुरी तरह से जली हुई लाश बगिया के किचन के फ़र्श पर पड़ी हुई थी. उसको एक कपड़े से ढका गया था. बगिया रेस्तराँ के मैनेजर केशव कुमार को पुलिस वालों ने पकड़ रखा था.” नैना के शरीर का मुख्य हिस्सा जल चुका था. सिर्फ़ आग नैना के जूड़े को पूरी तरह से नहीं जला पाई थी. आग की गर्मी की वजह से उनकी अतड़ियाँ पेट फाड़ कर बाहर आ गई थीं. अगर लाश आधे घंटे और जलती तो कुछ भी शेष नहीं रहता और हमें जाँच करने में बहुत मुश्किल आती.”

जब नैना साहनी का शव जलाने में दिक्कत आई तो सुशील शर्मा ने बगिया के मैनेजर केशव को मक्खन के चार स्लैब लाने के लिए भेजा उस समय कनॉट प्लेस थाने के एसएचओ निरंजन सिंह बताते हैं, “नैना साहनी के शव को तंदूर के अंदर रख कर नहीं बल्कि तंदूर के ऊपर रख कर जलाया जा रहा था, जैसे चिता को जलाते हैं.” कॉन्स्टेबल कुंजू ने सबसे पहले जली लाश देखी. उस रात 11 बजे कांस्टेबिल कुंजू और होमगार्ड चंदर पाल जनपथ पर गश्त लगा रहे थे.

पत्नी की हत्या करने के बाद शर्मा फरार हो गया. 10 जुलाई 1995 को पुलिस ने उसे बेंगलुरु से गिरफ्तार किया. सुशील शर्मा को यह शक था कि उसकी पत्नी नैना साहनी का किसी और से प्रेम प्रसंग चल रहा है। सुशील ने नैना की जासूसी भी करवाई थी। एक दिन जब वो घर लौटा तो उसने देखा कि नैना टेलीफोन पर किसी से बात कर रही है। नैना ने जैसे ही फोन रखा सुशील ने री-डायल कर दिया। दूसरी तरफ फोन पर मतलूब था। सुशील गुस्‍से में आग बबूला हो गया और उसने नैना पर गोली चला दी। गोली लगते ही नैना की मौत हो गई। इसके बाद सुशील ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर नैना के शव को ठिकाने लगाने का प्लान बनाया।

अब कांग्रेस का वही पूर्व नेता आज़ाद है और खुली हवा में सांस लेगा लेकिन सवाल ये है कि क्या दारा सिंह का अभी नाम कोई लेगा जो लगभग उतने ही समय से उडीसा की जेल में बंद है . आखिर दारा सिंह के लिए ऐसी खबर कब आएगी जिसके माता पिता उसके जेल में रहते ही चल बसे हैं और उनकी अस्थियाँ अभी भी खेतों में गडी अपने अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा कर रही हैं .. क्या मानवाधिकार आयोग या कैदियों की पैरवी करने वालों की लिस्ट में कहीं कोने में भी दारा सिंह का नाम है ये बहुत बड़ा सवाल है …

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