महायोद्धा मल्हारराव होल्कर जयंती विशेष- वामपंथी कलमकारों ने इन्हें भी किया अपमानित "भगोड़ा" बता कर.. लेकिन सच था कुछ और ही - Hindi News, हिंदी समाचार, Samachar, Breaking News, Latest Khabar -

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महायोद्धा मल्हारराव होल्कर जयंती विशेष- वामपंथी कलमकारों ने इन्हें भी किया अपमानित “भगोड़ा” बता कर.. लेकिन सच था कुछ और ही


उनका संकल्प भारत में विधर्मियो का प्रतिकार था, उन्होंने अटक से कटक तक भगवा ध्वज ले कर युद्ध लड़ा था . उनकी सेना जय भवानी का उद्घोष किया करती थी , पूजा और धर्मपरायणता उनकी जीवनी में शामिल था. भला नकली कलमकारों को ये रास कहाँ से आता. अगर वर्तमान को देखा जाय तो जिस प्रकार से उन्होंने स्वातंत्र्य वीर सावरकर जी को अपमानित किया वो पहली बार नहीं है. इन्होने सुभाष चन्द्र बोस जी तक को नही छोड़ा था. लेकिन अफ़सोस भारत के पाठ्यक्रमो में उन्ही के बोले शब्द ज्यादातर शामिल किये गये.

लेकिन क्या सिर्फ वीर सावरकार और योद्धा सुभाष चन्द्र बोस तक ही उनकी लेखनी ने जहर घोला.. जी नहीं , उस से पहले भी कई महावीर ऐसे आये जिन्होंने भारत के इतिहास को अपने शौर्य से सुशोभित किया पर उनके साथ अन्याय उनके देहांत के बाद नकली इतिहासकारों ने किया. उन्ही में से एक हैं महायोद्धा मल्हारराव होलकर जी जिनकी आज जयंती है. हैरानी की बात ये है कि इन वीर की जयंती तो दूर , ये हैं कौन ये भी बहुतों को नहीं पता , और पता भी कैसे होता जब कुछ बताया ही नही गया.

अत्याचारी , हत्यारे और लुटेरे मुगलों के गुणगान ने पन्नो को रंग देने वालों ने महायोद्धा मल्हारराव होलकर जी को भी भगोड़ा बता दिया था. लेकिन उसका सच कुछ और ही था. पानीपत की निर्यायक लड़ाई में इस वीर योद्धा मल्हार राव ने लुटेरे और हत्यारे अहमद शाह अब्दाली की सेना को तहस नहस कर दिया था . इस युद्ध में जब विश्वास राव पेशवा वीरगति को प्राप्त हो गये तब मराठो का मनोबल गिरने लगा , ऐसे समय में तत्कालीन मराठों के सेनापति सदाशिव राव भाऊ ने मल्हार राव को बुला कर उनसे उनकी पत्नी पार्वतीबाई को सुरक्षित जगह ले जाने का आग्रह किया क्योकि मराठे अब्दाली की सेना के क्रूर और नारियो के प्रति बेहद ही घृणित नजरिये से वाकिफ थे . इस आदेश का पालन मल्हार राव ने किया जिसे बाद में झोलाछाप चाटुकार इतिहासकारों ने दुसरे रूप में होलकर जी के सैनिक जीवन में भागने की झूठी कहानी गढ़ कर दुष्प्रचारित किया ..

कालान्तर में इस पराक्रमी योद्धा मल्हार राव का स्वर्गवास 20 मई 1766 में आलमपुर में हुई. इस महायोद्धा की एक ही सन्तान थी जो काफी पहले एक युद्ध में बलिदान हो चुकी थी . खांडेराव की मौत के बाद उनकी पत्नी अहिल्याबाई होलकर को मल्हार राव ने सती होने से रोका था. अहिल्या के बेटे और मल्हार राव के पोते माले राव को इंदौर की सत्ता मिली. लेकिन कुछ ही महीनों में उसकी भी मौत हो गई. उसके बाद अहिल्याबाई होलकर ने सत्ता संभाली, जो कि एक कुशल शासिका साबित हुई थी . आज उस महान योद्धा के जन्म दिवस पर सुदर्शन परिवार उन्हें बारम्बार नमन और वन्दन करता है और उनकी वीरगाथा को सच्चे रूपों में जनता के आगे रखने का संकल्प भी लेता है .


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