पहले “भगवा” फिर “गौ रक्षक”.. अब निशाने पर “जय श्री राम”.. सब ध्यान से देख रहा हिन्दू समाज


निश्चित रूप से उन तथाकथित राजनेताओं के जीवटता की भी दाद देनी होगी जो भारत की जनता द्वारा हिन्दू विरोध के चलते पूरी तरह नकार और फर्श पर ला दिए जाने के बाद भी अपनी मानसिकता में इंच मात्र भी बदलाव नहीं कर रहे हैं और ठीक उसी राह पर हैं जिस राह पर वो सब चुनाव के पहले थे.. अभी ज्यादा समय नहीं हुआ जब मोब लिंचिंग के नाम पर गौ माता और गौ भक्तो को किस प्रकार से बदनाम किया गया था जिसमे उन्हें बाकयदा मीडिया के एक वर्ग से खूब प्रचार भी मिला था .

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उस समय ट्रेन की सीट का विवाद भी गाय से जोड़ा गया जो बाद में निराधार कानून की नजर में और जनता की भी नजर में साबित हुआ पर उस प्रकार की साजिश करने वाले नहीं माने और उन्होंने गाय के बाद अब निशाने पर लिया है हिन्दुओं के सबसे पवित्र उद्घोष जय श्री राम को.. यहाँ ध्यान देने योग्य है कि तमाम लोग जानते हैं कि आतंकी हमलो के पहले कौन से नारे लगाए जाते हैं और क्या बोल कर किसी की गर्दन काटी जाती है ये कई वीडियो में कईयों ने देखा होगा ..

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काफी समय पहले भगवा आतंकवाद बोल कर हिन्दुओ को आतंकी घोषित करने की एक गहरी साजिश रची गई थी जिसमे साजिशकर्ता न सिर्फ नाकाम हुए थे बल्कि उनकी राजनीति ही भारत की जनता ने खत्म कर डाली..उसके बाद हिन्दुओ के गाय , गंगा और गीता के मुख्य आधारों में गाय को निशाना बनाया गया जिसमे उन्हें गौ रक्षक होना अपराध जैसा घोषित करने का लक्ष्य मिला .. यहाँ उन्हें सफलता भी मिलती तब दिखी थी जब प्रधानमन्त्री तक ने अपने भाषण में वो कहा जो कई गौ पालको को पीड़ा दे गया था .

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कुछ समय पहले ऐसे ही एक साजिशकर्ता ने अपनी टोपी उछाले जाने का आरोप लगाया था जो बाद में CCTV से निराधार साबित हुआ था . उसके बाद उस खबर को ढिंढोरा बना कर कई दिन तक पीटने वालों ने माफ़ी तक नहीं मांगी थी.. अब एक बार फिर से उन्ही साजिशकर्ताओं ने निशाने पर लिया है जय श्रीराम के उद्घोष को . ये उद्घोष हिन्दू समाज में चेतना जागृत करता है, ये उद्घोष अन्याय के खिलाफ लड़ने की शक्ति देता है. हिन्दू समाज के उस उद्घोष को जबरदस्ती शब्द से जोड़ा जा रहा है .

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यहाँ पर ये ध्यान रखने योग्य है कि अगर इस पूरे मामले की तह तक जाया जाय तो इस पवित्र शब्द के विरोधी भी और दुश्प्र्चारक भी वही लोग हैं जो भगवा आतंकवाद जैसे शब्द के जनक थे . उन्ही के फेसबुक और ट्विटर पर ऐसी भ्रामक और साजिशपूर्ण खबरे देखी जा सकती हैं . यद्दपि पहले भगवा के खिलाफ खड़े होने से वर्ष 2014 में फिर गौ माता के खिलाफ खड़े होने से 2019 में दुनिया ने उनका हश्र देख रखा है.. अब हिन्दू समाज के सर्वोच्च “श्री राम’ के खिलाफ खड़े होने का जनता क्या प्रतिफल उन्हें देती है ये देखने वाली बात होगी

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