मंत्री ने गौ रक्षको को माला पहना दी तो हुआ बवाल. पर आज गौ तस्कर रकबर के घर जो गया उस पर ख़ामोशी क्यों ? क्या अब भी ये मामला रह गया धर्मनिरपेक्ष ?

अभी हाल में ही जेल से निकले कुछ गौ रक्षको को एक केन्द्रीय मंत्री ने माला पहना दी तो उस पर खड़ा हो गया बवंडर .. अचानक ही हर तरफ गूंजने लगे तथाकथित धर्मनिरपेक्षता और मानवता के नारे जिसमे मंत्री को गलत ठहराने और गौ रक्षको को बिना अदालत के आदेश आये बिना हत्यारे ठहराने की हर सम्भव कोशिशे होने लगी . सडक तो दूर संसद तक मचा था इस मामले में शोर .. लेकिन आज जो हुआ क्या उसको धर्मनिरपेक्षता माना जा सकता है ?

ज्ञात हो कि दक्षिण भारत में केरल से ले कर कर्णाटक तक कई हिन्दू नेताओं की हत्या करने के लिए NIA के राडार पर चल रहे PFI अर्थात पापुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया का चेयरमैन ई. अबूबकर आज हरियाणा के कोलगांव में रकबर खान के परिजनों से मुलाकात की . दक्षिण भारत में हिन्दू नेताओं की एक के बाद एक हत्या में संदिग्ध चल रहे इस दुर्दांत संगठन के मुखिया का कल तक धर्मनिरपेक्ष बन रह रकबर के घर वालों ने विधिवत आवभगत किया .. 

गाय की तस्करी के मामले में 21 जुलाई 2018 को भीड़ के हाथ चढ़े रकबर की अलवर मे पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। इस मामले में पहले गौ रक्षको को दोषी बनाया गया उसके बाद भी आक्रोश शांत नहीं हुआ तो पुलिस वालों को भी इस मुद्दे में लपेट लिया गया . हिन्दुओं की श्रृंखलाबद्ध हत्याओ के लिए पूरे दक्षिण भारत में कुख्यात PFI के चेयरमैन से मिल कर रकबर खान का परिवार बहुत शांत दिखा .. रकबर के अब्बा ने युवा पुत्र की हत्या पर खुद को बहुत बड़ा झटका बतया यद्दपि उन्होंने शायद ही कभी गैर कानूनी कार्य अर्थात गौ वंश की सप्लाई के लिए रकबर को रोका रहा हो . हैरानी की बात ये है कि भले ही नेता , पुलिस और कानून रकबर को न्याय दिलाने के लिए धर्मनिरपेक्षता और कानून के सभी सिद्धांत अपना रहा हो लेकिन रकबर का भाई हारून केरल पहुच गया था और वहां जा कर पाॅपुलर फ्रण्ट आॅफ इण्डिया के चैयरमेन के पास जाकर अपने गम का इजहार किया। इतना ही नहीं उसने कई हिन्दुओ की हत्या में जांच के दायरे में चल रहे पाॅपुलर फ्रण्ट आॅफ इण्डिया के चैयरमेन से सहायता माँगी.. इस दुर्दांत संगठन की शरण में गये इस परिवार ने क्या ऐसा कर के धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत निभाया है इसको तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेताओं को जरूर सोचना चाहिए .

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