पहाड़ से भी ज्यादा मजबूत हैं अपने क्षेत्रों में हिंदूवादी ब्रांड ..हार उनके पास से भी नहीं गुजरती. योगी, राजा भैया, टाइगर राजा. और भी कई नाम

न जाने क्यों ऐसा है जब भी चुनाव खत्म होते हैं जो हर हार या जीत में हिन्दू और हिंदुत्व को निशाना बनाया जाने लगता है .. गाय, मन्दिर, श्रीराम, धर्म आदि अपने आप उन पत्रकारों या पैनलिस्ट के मुंह पर आने लगते हैं जिनके पास अब तक इसका जवाब नही है कि ऐसी कौन सी वजह है जो हिंदूवादी फायरब्रांड के बगल से भी हार नहीं गुजरती है ..इतना ही नही, वो ये भी बताने से कतराते हैं कि भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना आदि का मूल वोटबैंक कौन सा है ..आईये जानते हैं कुछ ऐसे नाम जो शुद्ध हिंदूवादी विचारधारा पर चल रहे हैं और उनके बगल से भी हार गुजर नही सकती है .. ये सभी नाम सवाल हैं उन तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग के लिए जो हर परिणाम में हिन्दू, हिंदुत्व या गाय आदि तलाश लेते हैं ..

1 – योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अगर वर्तमान समय मे भारत का सबसे बड़ा हिंदुत्व या भगवा ब्रांड माना जाय तो कतई गलत नही होगा .. अपनी उग्र हिंदुत्व की छवि के चलते भारत ही नही विदेशों तक चर्चा में रहने वाले योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर में हराने के हर सम्भव प्रयास पहले भी किये जा चुके हैं लेकिन किसी को भी सफलता मिलने की बात तो दूर दिखाई भी नही दी दूर दूर तक भी..नेता, अभिनेता सबको आजमाया गया पर भगवा ब्रांड योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर हराना तो दूर हराने की सोचना भी किसी के लिए बड़ा सपना जैसा है .. उनकी यही भगवा छवि न सिर्फ गोरखपुर बल्कि आस पास के तमाम जिलों या कहें यो पूरे पूर्वांचल में राजनीति की दिशा और दशा तय करती है ..जातिवाद, समाजवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद आदि का नारा देने वाली किसी भी पार्टी ने अब तक उनको टक्कर देने लायक नेता भी नही तैयार किया है ..भगवा छवि के योगी के बगल से हार शब्द गुजरने से भी कतराता है , हाँ उनके अलावा किसी भी चेहरे पर जनता में वो भाव भंगिमा नही आती है …

2 – रघुराज प्रताप सिंह ( राजा भैया )

यकीनन उत्तर प्रदेश के सबसे पर प्रभावी राजनेताओं में से एक है ये नाम. ये वो नाम है जिसमें पुराने समय के रजवाड़ो के स्वरूप को जीवंत रूप में आज भी देखा जा सकता है ..प्रतापगढ का नाम आते ही हर किसी के मुंह से पहला नाम जो निकलता है वो है राजा भैया का..ये न सिर्फ क्षेत्र के घोषित राजा अभी भी है बल्कि हिंदुत्व के फायरब्रांड नामों में भी गिने जाते हैं ..प्रतापगढ के मुस्लिम बहुल अस्थान गांव को एक हिन्दू बच्ची से बलात्कार के बाद जला कर राख कर देने के मामले में इनका नाम उछालने की बहुत कोशिश की गई थी.. इनके पिता की उग्र हिंदुत्व छवि आज भी देखी जा सकती है जब उन्हें मुहर्रम के दिन सरकार नजरबंद कर देती है लेकिन वो झुकने को तैयार नही होते हैं , इनके पिता ने श्रीरामजन्मभूमि मामले में योगदान दिया है और वो विश्व हिंदू परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं.. जीत इनके आस पास ही रहती है.. कभी मायावती द्वारा घोर दमन के शिकार रहे रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया अपने से अथाह प्रेम करने वाली जनता के दम पर ही दुबारा उठ खड़े हुए थे और हिंदुत्व के इस फायरब्रांड नेता के आस पास से भी हार नही गुजरती है .. इनकी लगातार विजय भी हिंदुत्व पर सवाल खड़े करते कई तथाकथित बुद्धिजीवियों के लिए एक बड़ा सवाल है जिस पर वो निरुत्तर रहते हैं ..

3 – टाइगर राजा सिंह –

जब एक तरफ तमाम प्रदेशो की तमाम विधानसभाओं में भारतीय जनता पार्टी के तमाम तथाकथित सेकुलर व शांत स्वभाव के नेताओं को बुरी तरह से पराजय मिल रही थी तब क्लीन स्वीप की तरफ जा रही भारतीय जनता पार्टी को तेलंगाना में TRS की आंधी में एकमात्र सीट जीत कर देने वाले का नाम है टाइगर राजा सिंह. घोषामहाल क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक बने टाईगर राजा सिंह ने भारतीय जनता पार्टी को तेलंगाना में हिंदुत्व की संभावनाओं का एक बड़ा संकेत दिया है .. हमेशा धर्म, राम, गाय, हिन्दू, हिंदुत्व की बात करने वाले टाईगर राजा सिंह न सिर्फ तेलंगाना बल्कि सम्पूर्ण भारत मे हिंदुत्व का एक ऐसा ब्रांड बन चुके हैं जो युवाओं को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहा है .. कांग्रेस के प्रत्याशी को लगभग 40 हजार वोट से हारने वाले राजा सिंह इस से पहले हैदराबाद में कारपोरेटर थे जिसके बाद वो लगातार दूसरी बार विधायक चुन कर आये हैं.. बंगलदेशियो को मार मार कर भगाने के उनके बयान का तथाकथित बुद्धिजीवयों ने बहुत कड़ा विरोध किया था लेकिन ऐसे बयानों ने उल्टा उनके पक्ष में माहौल बनाया और एक बार फिर से विजयश्री प्राप्त करते हुए अपने कदम तेलंगाना के सबसे बड़े हिंदुत्व ब्रांड के रूप में स्थापित करने शुरू कर दिए हैं ..टाईगर कहे जाने वाले राजा सिंह की विजय ने भी हिंदुत्व जैसे शब्दों को हार से जोड़ने वालों को निरुत्तर कर दिया है ..

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