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अब तक जितनी फांसी हुई आतंकियों को वो देशद्रोह के आरोपी थे.. अफजल, याकूब जैसे … तो क्या अब नहीं होंगी ?

राहुल गाँधी ने कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधि बन कर अपनी सरकार आने के बाद देशद्रोह कानून हटाने की घोषणा कर डाली है . ये घोषणा भले ही कांग्रेस पार्टी के लिए उनके तमाम राजनैतिक लाभ और हानि को देख कर की गयी हो लेकिन इसका देश पर सही प्रभाव पड़ेगा इसको ठीक से नहीं कहा जा सकता है . अगर इसका इतिहास में आंकलन किया जाय तो स्थिति कुछ और ही निकलेगी और सामने आएगा कि इस से कहीं न कहीं देश के चरमपंथियों के हौसले बढ़ेंगे ..

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विदित हो कि अगर देशद्रोह के कानून की समीक्षा की जाय तो ये कानून उन पर लागू होता है जो देश की अखंडता आदि पर हमलावर रहे हों . उदाहरण के लिए देशद्रोह उन दुर्दांत आतंकियों पर लागू होता है जो देश को इस्लामिक मुल्क बनाने के लिए न सिर्फ सपने देख रहे हो बल्कि उस पर कार्य भी कर रहे हों .. इतना ही नहीं , देश में रह कर पाकिस्तान के नारे लगाना , ISIS की टी शर्ट पहनना या उसके झंडे लहराना भी देशद्रोह के कानून के अंतर्गत आता था ..

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इसका प्रयोग अक्सर पुलिस करती थी उनके खिलाफ जो अपनी उन्मादी हरकतों से समाज के लिए खतरा बन जाते थे . यही कानून दुर्दांत नक्सलियों के खिलाफ भी लागू होता था जो अपने ही देश के सैनिको के खिलाफ हथियार उठा कर निर्दोशो का खून बहा रहे थे . लेकिन अब अगर कांग्रेस की सरकार बनती है और ये कानून हटता है तो ऐसे तमाम दुर्दांत आतंकी और नक्सली अपने उपर से काफी दबाव कम होता महसूस करेंगे . इसी देशद्रोह के कानून के चलते अफजल गुरु और याकूब मेनन आदि को फांसी के फंदे पर लटकाया जा सका था .. फिर ऐसे कानून के अभाव में ऐसे आतंकियों को मृत्युदंड देना मुश्किल हो जाएगा . इस से पहले भी कांग्रेस सरकार आतंकियो के खिलाफ बेहद सख्त कानून पोटा पर विवाद खड़ा कर चुकी थी जिसके बाद उस के खिलाफ बहुत बयानबाजी हुई थी .

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