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एक व्यक्ति फारुख अब्दुल्ला के घर में घुसा जिसे तत्काल गोली मार दी गयी. फिर वही अब्दुल्ला बोले – “देश में कोई घुसेगा तो गोली मार दोगे क्या ?’

ये वही अब्दुल्ला हैं जो पाकिस्तान तक से घुसपैठ करने वालों के प्रति नरम रुख अपनाने की और पाकिस्तान से मित्रता की पैरवी करते हैं . इनकी पार्टी ने आतंकियों पर कठोर रुख अपनाने के आदेश देने वाले सेना प्रमुख को गली का गुंडा तक कह डाला था लेकिन जब खुद इन पर आई तो दिखा सुरक्षा और स्वयं सर्वोपरि होने का सिद्धांत और मार गिराया गया वो संदिग्ध जिसकी गाडी इनके गेट से टकरा गयी थी .

ज्ञात हो कि राजनीति के दो चेहरे और दो रूप अगर कोई देखना चाहे थो सीधे सीधे अभी दो दिन के अन्दर देश में ही घटी घटनाओं को देख सकता है . सत्ता पक्ष जहाँ बंगलादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को निकालने पर आमादा है तो वहीँ विपक्ष ने इस मामले में सत्ता के सीधे सीधे विरोध में जाते हुए आमने सामने की राजनैतिक जंग का एलान कर दिया है . ममता बनर्जी , कांग्रेस पार्टी के साथ साथ अब्दुल्ला की पार्टी भी बंगलादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के साथ नरमी बरतने की पक्षधर है . यद्दपि विपक्ष के इस फैसले और रूप से जनता अजीब पशोपेश में है और वो जानने की कोशिश कर रही है ऐसी राजनीति के मायने ..

विदित हो कि अभी हाल में ही हैदराबाद के टाइगर राजा सिंह जो भारतीय जनता पार्टी के विधायक भी हैं , के एक बयान कि अगर बंगलादेशी खुद से जाते हैं तो प्रेम से जाएँ वरना उन्हें गोली मार दी जाय .. वाले बयान को विपक्ष ने खूब बड़ा मुद्दा बना कर उछाला और गांधीवादी सिद्धांतो के देश में बम बारूद आदि की बातें करना देश के विरुद्ध कार्य बता दिया .. पर अचानक ही वो तमाम बातें न जाने कहाँ से खो गयी जब एक वाहन अब्दुल्ला के घर के गेट से टकराया .. अभी ये पूरी तरह से निश्चित नहीं हुआ है कि वो वाहन किसी घुसपैठिये का था या एक आम व्यक्ति का वहां एक्सीडेंट हुआ था, लेकिन उसको अब्दुल्ला के घर में घुसपैठ मान कर गोली मार दी गई .. हैरानी की बात ये है कि गाँधी के सिद्धांतो की दुहाई देने वाले अब्दुल्ला और उनकी सहयोगी पार्टियाँ इस मामले में खामोश हैं और उन्होंने अब्दुल्ला के घर में घुसने का मतलब मौत जैसे नियम को तहे दिल से स्वीकार किया है .

सवाल ये है कि अगर अब्दुल्ला के घर की सीमायें इतनी सुरक्षित हैं तो देश की क्यों नहीं .. क्या अब्दुल्ला देश से बड़े हैं या यहाँ केवल उनके जैसे ही लोगों की स्वरचित विचारधारा चलेगी .. अब्दुल्ला ही नहीं बल्कि घुसपैठियों के वकील बने तमाम राजनेताओं के घरो का यही हाल है .. उनके VVIP सिक्योरिटी के आस पास भी फटकने वाले को फ़ौरन ही गोली मारने के आदेश हैं.. लेकिन जिन रोहिंग्याओं के बारे में सुरक्षा एजेंसियां चीख चीख कर बता रही है कि उनके सम्बन्ध आतंकी समूहों से हैं और जिन बंगलादेशियो के कई आपराधिक और आतंकी मामले भारत के थानों में दर्ज हैं उनको देश में रखने और रहने देने की वकालत हो रही है . बेहतर होगा कि जनता खुद फैसला करे इन तमाम मुद्दों पर और राष्ट्रहित में खुद से ही बढाए वो कदम जो अटल सिद्धांतो पर आधारित हो , न कि दोगली विचारधारा पर ..

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