रक्त से सने हाथ चूमे जा रहे थे पाकिस्तान में … लेकिन भारत के बॉलीवुड के कुछ लोग फिर भी चाह रहे उन्ही हाथो में अपना हाथ

अभी हाल में ही भारत के गौ हत्यारे को मारने के बाद जेल से जमानत पर छूट कर आये कुछ गौ रक्षको को माला भर पहनाना एक केन्द्रीय मंत्री के लिए भारी पड़ गया था .. उन्हें बाद में सफाई तक देने पड़ी और बताना पड़ा कि अभी वो अदालत से सिद्धदोष नहीं थे और उन्हें अदालत ने ही जमानत दी है इसलिए इसमें कुछ भी ऐसा नहीं था जो विवाद का कारण बनता लेकिन निभाने थे धर्मनिरपेक्षता के नकली सिद्धांत भी और शोर होता रहा . यही वो देश है जहाँ हिरन को मारने , इंसानों को कुचलने वाले सलमान खान और AK 56 रखने वाले अबू सालेम जैसे दुर्दांत अपराधी के साथी संजय दत्त के लिए दुआएं मांगी गयी क्योकि ये धर्मनिरपेक्षता का भारतीय सिद्धांत है . 

भारत के न जाने कितने सैनिको और निर्दोष नागरिको की हत्या करने वाले पाकिस्तान से अगर दोस्ती करने के लिए कोई सबसे ज्यादा आतुर है तो वो है भारत का बॉलीवुड . इतना तय है कि 90 % लोगों से भरा है ये तथाकथित स्टारों का समूह जिन्हें राष्ट्रगीत वन्देमातरम की दूसरी लाइन याद नहीं होगी लेकिन इनकी राष्ट्रभक्ति पर सवाल उठाना तब भारी पड़ जाता है जब इनके ट्विटर के फलोवर इनके देशभक्त होने का सबूत देने लगते हैं . अगर माना जाया तो इनकी देशभक्ति का पहला और सबसे बड़ा पैमाना है इनके ट्विटर पर फालोवर ..उनके अनुसार इंसान और इंसानियत सबसे ऊपर है फिर हिन्दुस्तानी और पाकिस्तानी लेकिन ये वही पाकिस्तान है जहाँ चूमे जा रहे हैं रक्त से सने हाथ .. आज हाफिज सईद का हाथ चूमने के लिए लाईन दिखी जिसने इंसानियत को लहुलुहान किया है .

इसी हाफ़िज़ ने उस मुंबई में भी रक्त बहाया है जहाँ ये तथाकथित स्टार रहते हैं . उस ताज होटल को भी बेगुनाहों के खून से रंगा है जहाँ अक्सर इनका चाय नाश्ता हुआ करता होगा .. लेकिन उसी हाफिज का हाथ चूमने के लिए पाकिस्तान में उनकी लाइन लगी दिखी जो आतंकी नहीं है लेकिन उनकी हरकत बताने के लिए काफी है कि उन्हें क्या पसंद है . ज्ञात हो कि मुंबई , कश्मीर , दिल्ली , लखनऊ , वाराणसी और न जाने कहाँ कहाँ के आतंकी हमले का मास्टरमाइंड और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखिया हाफिज़ सईद ने भी मतदान में हिस्सा लिया है. हाफिज ने लाहौर के एक बूथ पर जाकर अपना वोट डाला. जिस वक्त हाफिज सईद मतदान केंद्र पहुंचा, उस वक्त भारी संख्या में उसके समर्थक भी वहां पर मौजूद थे. वोट डालने के बाद जब हाफिज सईद बाहर निकला तो समर्थकों की भीड़ ने उसका हाथ पकड़ा और चूम लिया. बिना किसी खौफ के हाफिज सईद लाहौर के पोलिंग बूथ पर पहुंचा..

इस मामले में पाकिस्तान में किसी एक ने भी आवाज नहीं उठाई . किसी ने भी हाफ़िज़ को गलत नहीं कहा . जितना बवाल भारत में गौ रक्षको को माला पहनाने पर हुआ था उस का आधा भी  हाथ दुर्दांत आतंकी को चूमने के बाद उस देश में नहीं हुआ जिस देश से मानव और मानवता का नाम ले कर मित्रता की पेशकश की जाती है . कबीर दास ने बहुत पहले इन समस्याओं के लिए लाइन लिखी थी कि – ” कह कबीर कैसे निभे, केर बेर के संग .. वो डोलत रिश आपने , उनके फाटत अंग ” … अर्थात केले और बेर के पेड़ अलग बगल नहीं हो सकते .. बेर अपने अंदाज़ में कांटो के साथ झूमेगा और केले के पेड़ के पत्ते हर बार उसकी मस्ती में फटेंगे .. यकीनन बड़े बड़े डायलोग याद करने की जिम्मेदारी लेने वाले बॉलीवुड को इतना समय नहीं मिला रहा होगा कबीर को पढने का और अगर पढ़ भी लेते तो नाम और पेट का सवाल था .. शायद फर्क न पड़ता .. ***

*** उपरोक्त विचार लेखक के स्वतंत्र विचार हैं . 

लेखक –

राहुल पांडेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

9598805228 


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