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फिल्मों में म्यूजिक डालने वाले मोहम्मद ज़हूर का अंतिम संस्कार हुआ तिरंगे में, जबकि सादे सफ़ेद कफ़न में लपेट दिए जाते हैं पुलिस के बलिदानी

ऐसे नियम और क़ानून को देख कर आप को हैरत हो जाएगी.. इस देश के लिए त्याग और बलिदान किस ने किया और सम्मान का हकदार कौन है इसका आकलन करना आपके लिए बेहद मुश्किल है.. वो धूल – धूप , बरसात झेल कर भी किसी की आफत पर मात्र 2 मिनट में पहुँचते हैं उनके लिए जो नियम बने हैं और जिनका इस देश के लिए त्याग सोचने के बाद भी नही मिलता उनके लिये बने नियम किस ने लागू किये, किये तो क्या सोच कर किये आदि मंथन के मामले हैं.. किसी के बलिदान के बाद तिरंगा मिलना उसके तिरंगे के लिए किए गए त्याग का पैमाना होता है लेकिन वो पैमाना ले कर कौन नापता है ये आज तक पता नहीं चल पाया है..

फिल्मों में म्यूजिक डालने वयोवृद्ध मोहम्मद ज़हूर की मौत के बाद दुनिया भर के अखबारों ने इसको हेडलाइन बनाया.. तमाम जगहों से शोक संवेदना भी आई व VVIP लोगों ने ट्वीट भी किये.. इस माहौल को देख कर एक बार फिर से सक्रिय हो उठी देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में चल रही महाराष्ट्र सरकार और उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी.. बाकायदा पुलिस वालों ने हथियार झुकाए और अंतिम सलामी भी दी गई..इस से पहले दुबई के होटल में मृत पाई गईं श्रीदेवी को भी इसी प्रकार से सम्मान दिया गया था जो काफी चर्चा के साथ विवाद का विषय बना था और राज ठाकरे तक ने इस मामले में सवाल खड़े कर के पूछा था कि आखिर श्रीदेवी ने इस देश के लिए ऐसा क्या किया था ..

अब उसी अंदाज में फिल्मों में म्यूजिक डालने वाले मुहम्मद ज़हूर को भी अंतिम विदाई दी गयी है.. सबसे खास बात तिरंगे की है.. उनके ताबूत पर तिरंगा ओढ़ाया गया जबकि उनके इस देश के लिए त्याग और बलिदान को अब तक कोई स्पष्ट नही कर पाया है.. यहां एक बड़ी विडंबना है, अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के सँभल जिले में अपराधियो के हमले में वीरगति पाने वाले 2 सिपाहियों की शवो की दुर्दशा चर्चा का विषय रही थी.. अपना जीवन समाज की सुरक्षा को समर्पित कर देने वाले दोनों सिपाहियों को जिस प्रकार लोडर में रख कर ले जाया गया था उसके बाद पुलिस विभाग ही नहीं, आम समाज भी बहुत आक्रोशित हुआ था..

इन सिपाहियों को सादे कफ़न में लपेटा गया और पत्तियों के बने हार उनके ऊपर डाल दिये गए थे.. जब सुदर्शन न्यूज ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था तब पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से उत्तर आया था कि उत्तर प्रदेश पुलिस में कफ़न का प्रावधान नहीं है.. उत्तर प्रदेश पुलिस एक ऐसा पुलिस बल है जो आतंक और अपराध दोनों से लड़ रहा है.. कम संख्या बल, अनंत बंदिशें, अत्यधिक दबाव व सीमित संसाधन में जितना कार्य उत्तर प्रदेश का पुलिस स्टाफ कर रहा है वो एक रिकॉर्ड है और भारत ही नहीं, पूरी दुनिया भर के लिए एक बड़ा आदर्श है.. इसके बाद भी उन्हें अंतिम यात्रा में तिरंगे का सम्मान क्यों नही मिलता ये संविधान विशेषज्ञ जरूर सोचें..

सेना के बाद अगर किसी ने इस देश के लिए सबसे ज्यादा बलिदान दिया है तो वो पुलिस विभाग है लेकिन फिर भी उन्हें तिरंगा अंतिम यात्रा में न देना कहीं न कहीं बड़े सवाल खड़े करता है..आज देश का युवा वर्ग ये जरूर विचार कर रहा होगा कि उसके लिए कौन से रास्ता चुनना उचित है, फिल्मों में म्यूजिक देना या वर्दी पहन कर समाज की रक्षा करना . क्या यहां ये बात सही साबित नही होती कि एक ऐसी भी नौकरी है जिसमें न जीते जी सुकून और सम्मान है और न मरने के बाद..

 

रिपोर्ट- 

राहुल पांडेय

सहायक संपादक- सुदर्शन न्यूज

मुख्यालय नोएडा

मोबाइल- 9598805228

मोहम्मद ज़हूर की मौत- 

 

 

संभल के बलिदानी- 

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