अग्निवेश की पिटाई पर जमा हुई वो सभी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष शक्तियां जो मौलाना द्वारा महिला की पिटाई पर अब तक थी खामोश

अभी कुछ ही समय की बात है जब एक मौलाना की हरकत बनी थी राष्ट्रीय चर्चा .. लाइव डिबेट में एक महिला दहाड़े मार मार कर रोती रही लेकिन उसका साथ किसी ने नही दिया .. उसके बाद एक अन्य महिला ने उस बेचारी के प्रति सहानभूति क्या दिखा दी उसको पीटना शुरू कर दिया मौलाना ने , जबकि वो उम्र में यकीनन उनसे बड़ी थी .. लेकिन इस मामले में दिखाई गई धर्मनिरपेक्षता और खामोश रह कर पालन किये गए स्वघोषित धर्मनिरपेक्षता के वो सभी नियम, कायदे व कानून जो पिछले 70 वर्षों स्व बना कर रखे गए हैं ..

लेकिन अचानक ही एक नए मामले में वो सभी धर्मनिरपेक्ष शक्तियां बोल पड़ी क्योकि यहाँ उन्हें हिन्दू और हिंदुत्व की खुशबू मिलने लगी .. अचानक ही अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और कई मुस्लिम मज़हबी जानकर इस मुद्दे पर हंगामा और शोर शराबा शुरू कर दिए .. यद्द्पि हिंसा किसी भी प्रकार से उचित नही मानी जा सकती और उसको किसी भी हालत में सही नही ठहराया जा सकता है लेकिन सिर्फ एक वर्ग के लिए बोलना और दूसरे वर्ग के लिए खामोशी सवालों की वजह जरूर बनती है और इसे खुले शब्दो मे पक्षपात कहा जाता है ..

अग्निवेश जो खुद से ही खुद के नाम मे स्वामी लगाया करता था, जबकि वो आर्य समाज व सन्त सभा से बहुत पहले ही निष्काषित था .. जब जब उसने श्रीराम , श्रीकृष्ण व महादेव शिव के खिलाफ आपत्तिजनक व हिन्दू समाज को पीड़ा देती बातें बोली तब किसी भी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेता ने उसका विरोध नही किया था , भले ही आज वो उनके समर्थन में खड़े दिख रहे हैं .. अखिलेश यादव का कहना है कि ये भीड़तंत्र है , अरविंद केजरीवाल तो हिन्दू और हिंदुत्व की परिभाषा पूछने लगे .. इतना ही नही, इस मामले में मुस्लिम जानकर भी सामने आने लगे ..

जमीअत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने हिन्दू समाज के प्रति बार बार अपशब्द बोलने वाले और वामपंथी विचारधारा के करीब माने जाने वाले अग्निवेश पर झारखंड में हुए हमले की कड़ी निंदा की है। मौलाना मदनी ने कहा कि भीड़ बनाकर जिस तरह से असामाजिक तत्वों ने 80 साल के इस नेता पर हमला किया, उनके कपड़े फाड़े, पीटा वह बेहद निंदनीय और शर्मनाक घटना है. उन्होंने के कहा कि एक मज़हबी नेता की बेइज़्ज़ती भारतीय संस्कृति और उसके सभ्य समाज को दाग़दार करने वाला अमल है। जबकि इन्ही मौलाना ने आज तक तसलीमा नसरीन पर जारी मौत के फतवो पर एक शब्द नही बोला है ..

मौलाना ने सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हत्यारा भीड़ पर कण्ट्रोल करने का निर्देश का हवाला भी दिया है, लेकिन 3 तलाक पर निर्देश ही नही आदेश के बावजूद उसका उल्लंघन कर रहे कट्टरपंथी लोगों के खिलाफ एक लाइन नही बोला .. सवाल उठता है कि क्या तथाकथित और उनके द्वारा स्वघोषित धर्मनिरपेक्षता दोगला चरित्र सिखाती है या बोलना वही जायज लगता है जहां हिन्दू और हिंदुत्व के खिलाफ हो ..यकीनन जाग्रत समाज इसे देख रहा है और न सिर्फ देख रहा है बल्कि उसे बेहतर ढंग से समझ भी रहा है .. आशा है कि टी वी की लाइव डिबेट में मौलाना के कोप का शिकार बनी उन नारी शक्तियों को न्याय मिलेगा ..और रही बात भीड़ की तो उस भीड़ से न्याय की शुरुआत हो जिसने मज़हबी उन्मादी नारे लगाते हुए कश्मीर को हिन्दू पुरुषों के रक्त से लाल कर दिया था और हिन्दू महिलाओं की चीखों से घाटी को गुंजा दिया था ..बेहतर होगा कि शुरुआत हो उस भीड़ के इंसाफ से जिसके चलते लाखों को अपना घर और संसार छोड़ कर सदा सदा के लिए भागना पड़ा ..

उपरोक्त विचार लेखक के स्वतंत्र विचार हैं ..

लेखक –

राहुल पांडेय

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज

मो – 9598805228

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