जब दरोगा मुह से ठांय ठांय किया तो कईयों ने उड़ाया मजाक.. अब उन्ही को गोली लगी तो मजाक उड़ाने वालों ने उफ़ तक नहीं किया


आतंक और अपराध से लडती पुलिस जब आखिर फर्जी और आधारहीन आरोपों का भी सामना करना पड़ता है तो ये यकीनन पुलिस से ज्यादा उस समाज के लिए घातक होता है जिसकी रक्षा वो पुलिस वाला कर रहा होता है . शारीरिक रूप से घायल जवान कई बार अपने मोर्चे पर डटा रहता है लेकिन मानसिक रूप से चोटिल रक्षको के लिए मोर्चे पर डटे रहना किसी भी रूप से सम्भव नहीं हो पाता. ये शायद पहले ही देश का ऐसा उदाहरण हो जहाँ पर अपनी ही रक्षा के लिए धूल धूप बरसात में तैनात पुलिस के जवानो के खिलाफ जनता को ललकारा जाता है जबकि वर्दी का मनोबल गिराना किसी भी सुरक्षित समाज की कल्पना करने वाले क्षेत्र के लिए सही नहीं होता .

त्तर प्रदेश के योगीराज में जहाँ पुलिस बेहद चुस्त और दुरुस्त हो कर प्रशासनिक और कानूनी शासन को मजबूती के साथ पटरी पर लाना चाहती है वहीँ उसकी राह में तरह तरफ से रोड़े बिछाये जा रहे हैं . कहीं उसे पत्थरों का सामना करना पड़ रहा , कहीं उसे गोलियां झेलनी पड़ रही .. और अब इन सब बातों से पार पा जाए तो अंतिम हथियार के रूप में उनके ऊपर कमेन्ट करना या ऐसा कुछ करना जिस से वो किसी भी रूप में कटघरे में खड़े हों आदि जो बाद में आरोपों की शक्ल ले लेते हैं और समाज की सुरक्षा में तैनात जवानों के मनोबल पर वार करते हैं . लेकिन अफ़सोस अपने ही लोगो द्वारा वो पुलिस वाला ऐसे आरोप झेलने पर मजबूर किया जाता है .

ऐसा ही एक मामला था सम्भल का जहाँ पर अपराधियों से घिरे एक पुलिस के सब इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने मोर्चा नहीं छोड़ा और डटे रहे थे मौके पर .. यूपी के संभल में कुछ दिन पहले ही बदमाशों को पकड़ने के दौरान एक दरोगा का मुंह से गोली चलाने का वीडियो वायरल हुआ था। दरअसल गोली न चलने पर दरोगा ने मुंह से ठांय-ठांय कर बदमाशों को डराने का प्रयास किया था। इसको लेकर सोशल मीडिया पर यूपी पुलिस का काफी मजाक भी उड़ा था। इस मामले में सबसे दुःख का पहलू ये भी  था कि इस जाबाज़ वर्दीवाले का मजाक उड़ाने में खुद को बड़ी मीडिया वाला कहने वाले भी तमाम लोग थे ..

अब उसी पुलिसवाले को एक अपराधी का पीछा करते हुए गोली लगी है . ये गोली उस पुलिस अधिकारी के कर्ताव्यनिष्ठा को दिखाता है और किसी भी हालत में मौके को न छोड़ने की दृढ़ता को भी दर्शाता है . एसपी यमुना प्रसाद ने बताया कि बाइक सवार दो बदमाशों ने इंस्पेक्टर मनोज कुमार पर फायरिंग कर दी इसके बाद भागने लेग। पुलिस की ओर से जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश घायल हो गया जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बदमाशों की ओर से की गई फायरिंग में घायल इंस्पेक्टर मनोज कुमार को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। लेकिन इस बार उन तमाम लोगों ने उफ़ तक नहीं किया जो कभी इस अधिकारी का मजाक उड़ाने में सबसे आगे रहे . आखिर इसको क्या माना जाय ? पुलिस का अंधविरोध या कुछ और .. अपनी जान हथेली पर रख कर घूमने वालों को उपहास का पात्र बनाना सिर्फ उस पुलिस वाले के लिए ही नहीं बल्कि सबके लिए गलत ही होगा जो चैन की नींद चाहते हैं अपने घरो में . निश्चित तौर पर ये समाज की शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले, आतंक और अपराध से लड़ते पुलिस बल के लिए किसी भी रूप में सार्थक परिणाम नहीं देगा और इसका असर जनता पर जरूर पड़ेगा .

 


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