स्कूल की प्रार्थना का धर्म घोषित होने के बाद आतंक का मज़हब कौन सा है, इसकी भी घोषणा हो – सुरेश चव्हाणके

गांधी के नाम पर भारत मे अब तक सबसे ज्यादा राजनीति की गई ..कुछ लोगों को उनकी हत्या का दोषी बता कर के हत्यारा घोषित करने के प्रयास हुए तो कुछ ने उनकी टाइटिल को अपने सर पर धारण कर के जनता से उनका अमूल्य वोट लिया और बन बैठे भारत भाग्य विधाता ..लेकिन उन्ही गांधी ने कहा था -” ईश्वर अल्ला तेरो नाम” अर्थात ईश्वर और अल्ला एक ही हैं और भगवान सबका भला करे ..

गांधी की भक्ति का ढोंग कर के कुछ अपनी आबादी के बढ़ने और उस स्तर तक आने की प्रतीक्षा करते रहे जब वो लड़ने की स्थिति में आ जाएं .. तब तक वो संघ , हिन्दू महासभा आदि के खिलाफ गांधी विरोध का डंका पीटते रहे जिस से उनकी साजिश का भंडाफोड़ न हो पाए . वोटों की भिखारी तुष्टिकरण की राजनीति ने सबको चुप रखा .  आखिरकार उन्होंने खुद ही गांधी के सिद्धांतों से बगावत कर दी और घोषित कर दिया कि ईश्वर और अल्ला अलग अलग हैं .. 

उन्होंने गांधी के सिद्धांतों की अवहेलना करते हुए कहा कि ईश्वर हिन्दू है और अल्ला इस्लाम मे ..इसलिए ईश्वर कहना हिंदुत्व है ..इस घटना से कम से कम हिंदूवादी दलों को गांधी का हत्यारा बताने वाले खुद ही गांधी के सिद्धांतों के हत्यारे बन चुके हैं ..यदि ईश्वर वन्दना जिसमे सर्वे भवन्तु सुखिना की मांग होती है ,, को हिंदुत्व से जोड़ा गया है तो अब समय है कि आतंक के मज़हब की भी घोषणा कर ही दी जाय ..दुनिया देख रही है उन तमाम नारों और नामो को जो कत्ल करने से पहले लिए जा रहे हैं .. बस औपचारिक घोषणा भर बाकी है अभी उसकी ..

ये समय बिल्कुल उचित है ईश्वर से सबका सुख मांगने वाले धर्म की घोषणा का साथ ही निर्दोषों , निरपराधों का खून बहा कर अट्टाहास करने वाले आतंक के मज़हब की पहिचान का ..राष्ट्रवादी शक्तियों से आग्रह है कि इस समय आतंक के मज़हब को जिसे तमाम जानते भी हैं , उसको प्रमाणिक रूप से सबके आगे लाने का जिस से समाज उनसे बच कर निर्भयता व शांति की तरफ चल सके …

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