पवित्र मंदिरों में रोजा इफ्तारी देने वाले तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोगों को सीधी चुनौती है भाई प्रेम के सबसे बड़े प्रतीक प्रभु श्री लक्ष्मण जी की मूर्ति का विरोध- श्री सुरेश चव्हाणके जी

ये सर्वविदित सत्य है कि खूनी पंजों को गायत्री समझाना सबसे बड़ी मूर्खता है. लेकिन अफ़सोस इस बात है कि तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के लिए कुछ लोग फिर भी ये मूर्खता करते हैं तथा मौक़ा देते हैं उन खूनी पंजों को अपने ही ऊपर हमला करने का. एक बार फिर से इन खूनी पंजों ने हमला किया है सत्य सनातन पर तथा चुनौती दी है उन तथाकथित धर्मनिरपेक्ष संतों को जिन्होंने भाईचारे के नाम पर लखनऊ में हिन्दुओं की आस्था के केंद्र पावन मंदिर में रोजा इफ्तारी दी थी तथा कोशिश की दुनिया को भाईचारा का सन्देश देने. ये कहना है सुदर्शन टीवी के चेयरमैन तथा राष्ट्र निर्माण संस्था के अध्यक्ष श्री सुरेश चव्हाणके जी का.

बता दें कि जिस भाईचारे के लिए लखनऊ के मंदिर में मुस्लिमों को इफ्तार पार्टी दी गई थी आज उसी मुस्लिम समाज के कट्टरपंथी लखनऊ में श्री लक्ष्मण जी की मूर्ति लगाने के विरोध में अड़ गए हैं. लखनऊ में श्री लक्ष्मण जी की मूर्ति का इस्लामिक कटटरपंथियों द्वारा विरोध किये जाने पर सुदर्शन टीवी के चेयरमैन श्री सुरेश चव्हाणके जी ने कहा है कि लखनऊ में श्री लक्ष्मण जी की मूर्ति का विरोध करना हिन्दू समाज ही नहीं बल्कि उन संतों को भी आईना है तथा चुनौती है जिन्होंने भाईचारे के नाम पर पवित्र मंदिरों में इफ्तारी कराई थी. श्री सुरेश चव्हाणके जी ने कहा है कि हिन्दू संतों ने सोचा था कि अगर वह मंदिर में रोजा इफ्तारी देंगे तो इससे सामजिक समसरसता बढ़ेगी तथा धर्मनिरपेक्षता मज़बूत होगी, वो लोग शायद भूल गए थे कि जिन लोगों से वह धर्मनिरपेक्षता की उममीद कर रहे हैं, उनके लिए धर्मनिरपेक्ष शब्द एक मजाक से अधिक कुछ नहीं है क्योंकि वो लोग शरीयत को मानने वाले हैं तथा जिसके लिए राष्ट्र से भी ज्यादा सर्वप्रिय मजहब हो जाता है. उनकी शरीयत हो जाती है वहां धर्मनिरपेक्षता शब्द का कोई महत्व नहीं रह जाता.

श्री सुरेश चव्हाणके जी ने कहा कि जब इस्लामिक मौलानाओं ने लखनऊ में श्री लक्ष्मण जी की मूर्ति का विरोध किया तो मुझे जरा भी आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि में उनकी फितरत जानता हूँ. श्री चव्हाणके जी ने कहा कि जिस भाईचारे के लिए मंदिर में इफ्तार पार्टी दी गई थी, आज प्रभु श्री लक्ष्मण जी की मूर्ति का विरोध करके मौलानाओं ने उस भाईचारे की धज्जियाँ उड़ा दीं. सुरेश चव्हाणके जी ने कहा कि इस दुनिया में श्री लक्ष्मण जी से बड़ी भाईप्रेम की मिशाल कुछ हो नहीं सकती हैं क्योंकि श्री लक्ष्मण जी अपने भाई के प्रति आस्था, समर्पण के सबसे बड़े प्रतीक हैं. वनवास प्रभु श्रीराम को मिला था लेकिन भाई के प्रति श्री लक्ष्मण जी का समर्पण ही था कि वह महलों का सुख छोड़कर अपने भाई श्रीराम जी के साथ वनवास पर गए तथा कष्ट सहन किये. जिन लक्ष्मण जी ने अपने भाई के लिए अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया आज उन लक्ष्मण जी की मूर्ति का विरोध वो लोग कर रहे हैं तो भाईचारे की बात करते हैं, हिन्दू-मुस्लिम भाई भाई के नारे लगाते हैं. भाई भाई की बात करने वालों को आज भाईप्रेम की सबसे बड़ी प्रेरणा, सबसे बड़े नायक, सबसे बड़े आदर्श श्री लक्ष्मण जी स्वीकार नहीं है जबकि श्री लक्ष्मण जैसा भाई न न तो आज तक हुआ और शायद आगे भी न होगा. और जो लोग श्री लक्ष्मण जी को अपना दुश्मन मानते हों, उनकी मूर्ति लगाने का विरोध करते हों उनसे भाईचारे की उम्मीद करना, मंदिर में इफ्तारी देना सबसे बड़ी मूर्खता तो है ही, श्री लक्ष्मण जी का अपमान भी है और ये सब हिन्दू समाज तथा संतों को जल्द समझनी ही होगी.

Share This Post