पुलिस बार्डर स्कीम हटाने व पुलिसकर्मियों के किराया माफी का विरोध कर के कानून व्यवस्था दुरुस्त करने के दांव पेंच बताने वाले बस्ती SP के बस्ती में ही ध्वस्त हुई कानून व्यवस्था.. गोलियों से भून डाला गया छात्रसंघ अध्यक्ष कबीर और उन्मादी हुए छात्र

अभी कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश शासन द्वारा विभिन्न जनपदों के पुलिस अधीक्षकों व अन्य उच्चाधिकारियों से एक आख्या मांगी गई थी जिसमें अराजपत्रित पुलिसकर्मियों पर बढ़ रहे भारी दबाव को कम करने व उनके हालात को सुधारने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर आख्या मांगी गई थी.. उस पर विभिन्न जनपदों के पुलिस अधिकारियों ने शासन को बिंदुवार आख्या भेजी थी..इन आख्याओ मे अराजपत्रित पुलिस स्टाफ की बार्डर स्कीम को हटाने व पुलिसकर्मियों के सरकारी वाहनों में किराया आदि की माफ़ी मुख्य बिंदु थे..इस पर तमाम जनपदों के कप्तानों व उच्चाधिकारियों ने अपने अपने विचार रखे थे..

इसमें से ज्यादातर पुलिस अधिकारी इस बात पर सहमत थे कि बार्डर स्कीम की फिर से समीक्षा हो और अराजपत्रित पुलिस स्टाफ के सरकारी वाहनों में किराए की माफी संस्तुति की जाय..सूत्रों के अनुसार व सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक पत्र के मुताबिक बस्ती के वर्तमान पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार ने ये माना था कि बार्डर स्कीम हटाने व किराया माफी आदि की कोई जरूरत नही है और उन्होंने अराजपत्रित पुलिस कर्मियों को उनके वर्तमान हालातों पर चलते रहने की पैरवी की थी..

यद्द्पि इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि होनी बाकी थी लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ पुलिसकर्मी व तमाम पुलिस समर्थकों में उनके खिलाफ चर्चा देखी और सुनी गई थी..फिलहाल चर्चाओं में बताया ये गया था कि अपने तर्को व तथ्यों के साथ पुलिस अधीक्षक बस्ती महोदय ने ये बताने की कोशिश की थी कि अगर उनकी सलाह पर गौर किया गया तो कानून व्यवस्था को सुधारने और चुस्त दुरुस्त करने में मदद मिलेगी.. सम्भवतः उनकी सलाह पर ही गौर हुआ क्योंकि प्रदेश की पुलिस के लिए कोई नया आदेश नहीं आया और हालात ज्यों का त्यों बने रहे पुलिस वालों के लिए..

भले ही सोशल मीडिया में वायरल बस्ती पुलिस प्रमुख की ऐसी आख्या से प्रदेश के पुलिस बल के हालातों में कोई अंतर न आया हो पर प्रदेश की कानून व्यवस्था की मिट्टी जरूर पलीत होती दिखाई दे रही है…पहले झांसी में एक इंस्पेक्टर पर हत्या का कथित आरोप लगा , माता दुर्गा के विसर्जन में कई जगहों पर हंगामा हुआ तो अब कानून व्यवस्था को चुस्त करने के दांव पेंच बताने वाले उन्ही अधीक्षक महोदय के जनपद बस्ती में दिन दहाड़े छात्रसंघ के एक पूर्व अध्यक्ष की बेरहमी से हत्या कर दी गई है..

बस्ती पुलिस अधीक्षक जितना ध्यान पुलिसकर्मियों पर लगाए रहे उसका आधा भी ध्यान अगर वो अपने जिले में पनप रहे अपराध और इस प्रकार की रंजिशों पर लगाये होते तो शायद आज जिस अंदाज में जनपद बस्ती छात्रों के उत्पात से सुलग रहा है, वो न सुलग रहा होता.. फिलहाल सूत्रों के अनुसार छात्रनेता कबीर तिवारी के हत्यारों में से 2 को गश्त कर रहे उन 2 पुलिसकर्मियों ने पकड़ लिया है जिनका भाड़ा आदि माफ करने का विरोध किया गया था.. अपनी जान ओर खेल कर 2 शूटरों को पकड़ना निश्चित रूप से साहस का कार्य था और उन्ही के द्वारा किया गया साहसिक कार्य बस्ती पुलिस का रहा सहा सम्मान बचाये हुए है..

छात्रनेता कबीर की हत्या मामले में पुलिस की टीमें बना दी गई हैं इस अपराध से जुड़े अन्य मुल्जिमो को पकड़ने के लिए जिन्हें शायद अन्य जिलों में भी छापेमारी के लिए जाना पड़े और उस छापेमारी या सुराग लगाने के लिए तमाम जगहों और जिलों में आने जाने के लिए इन पुलिसकर्मियों को किराया भाड़ा कैसे मिलेगा और कहाँ से मिलेगा ये पुलिस अधीक्षक महोदय बस्ती निर्धारित करने का प्रयास कर रहे होंगे..

निश्चित तौर पर जनपद बस्ती से पूरे प्रदेश की पुलिस में गया सन्देश बस्ती पुलिस अधीक्षक की अलग छवि बना चुका है लेकिन उनके दांव पेंच छात्रनेता कबीर की निर्मम हत्या क्यों नही रोक पाए ये बड़ा सवाल है..मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के ठीक बगल का जिला बस्ती आज मुख्यमंत्री के लिए ही सवालिया निशान की वजह बना हुआ है जहां बड़े विश्वास से मुख्यमंत्री ने एक समझदार IPS की तैनाती की रही होगी.. इन हालातों के बाद अब मुख्यमंत्री को तय करना है कि इनके पुलिस विभाग में बदलाव के लिए की गई सिफारिश पर अमल करना कितनी बड़ी समझदारी होगी..

रिपोर्ट-

राहुल पाण्डेय
सहायक सम्पादक- सुदर्शन न्यूज
मुख्यालय – नोएडा
मोबाइल- 9598805228

राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने हेतु हमे आर्थिक सहयोग करे. DONATE NOW पर क्लिक करे
DONATE NOW