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कर्नल पुरोहित, मेजर उपाध्याय को आंतकी व् सेना प्रमुख को गुंडा कहने वाले अचानक कैसे हो गये वर्दी भक्त ? तेज बहादुर से प्रेम या मोदी से नफरत ?

लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है और हर किसी योग्य व्यक्ति को चुनाव भी लड़ने का.. भारत की सेना और अर्धसैनिक बलों के साथ साथ पुलिस के जवानो के लिए आम जनता के साथ साथ उच्चाधिकारियों और राजनेताओं के मन में प्रेम होना जरूरी है क्योकि ये वही वीर हैं जो अपनी जान हथेली पर रख कर देश की बाहरी और आन्तरिक सुरक्षा को संभाला करते हैं .. लेकिन जब कोई व्यक्ति एक ही समय में एक ही प्रकार की वर्दी के लिए २ अलग अलग रूप दिखाए तो सवाल उठना लाज़मी है ..

विदित हो कि वाराणसी से नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय ने ताल ठोंकी है . अजय राय इस से पहले भी पिछले चुनावों में मोदी के खिलाफ लड़ चुके हैं जहाँ उनकी बुरी तरह से हार हुई थी … इस बीच समाजवादी पार्टी ने पहले तो अपना प्रत्याशी खुद को नारी शशक्तिकरण के रूप में प्रमुखता से दिखाने के लिए शालिनी यादव को बनाया था लेकिन एन मौके पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन ने BSF के बर्खास्त तेज बहादुर यादव को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया ..

BSF के तेजबहादुर यादव वही हैं जो भारत के सैनिको के खाने आदि को ले कर अपना लाइव वीडियो बना कर चर्चा में आये थे और उनकी वीडियो भारत से ज्यादा पाकिस्तान में वायरल हुई थी और भारत के सैनिको की खूब फजीहत हुई व मजाक बनाया गया था . फिलहाल एक सैनिक के रूप में उनका सम्मान बरकरार रहा .. अब उन्होंने सीधे मोदी के खिलाफ ताल ठोंकी है और वो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में वाराणसी से मोदी को चुनौती देने के लिए खड़े हैं .

यहाँ तक तो सब कुछ ठीक है लेकिन अचानक ही कुछ चेहरों के साथ कामो का रंग ऐसा बदला जो किसी ने सोचा भी नहीं था .. CRPF के वीरों की नक्सलियों के हाथो वीरगति मिलने पर जरा सा भी दर्द न व्यक्त करने वाले , कश्मीरी पत्थरबाजो के खिलाफ सेना के पैलेट गन का विरोध करने वाले , इलाहबाद कचेहरी काण्ड में सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की फांसी मांगने वाले, कर्नल पुरोहित और मेजर उपाध्याय को आज तक आतंकी बोलने वाले और भारत की सेना के सेनापति को गुंडा बोलने वाले सब अचानक ही वर्दी प्रेमी हो गये .

इंस्पेक्टर मोहनचंद्र शर्मा की वीरगति पर सवाल उठाने वाली पार्टी तो सबसे आगे आ गयी और उसने कांग्रेस से अपना प्रत्याशी हटाने की अपील कर डाली.. यही नहीं टुकड़े टुकड़े गैंग के लिए कुख्यात कुछ लोगों ने तो अचानक ही हुलिया ही बदल दिया और भारत माता की जय किसी भी हाल में न कहने वालों ने तेज बहादुर यादव को माँ भारती का लाल बताना शुरू कर दिया .. अचानक ही उनके लिए भारत भूमि माँ न जाने कैसे हो गयी जबकि उन्होंने इस से पहले कभी भी भारत को माँ नहीं बोल ..

अब सवाल उठता है कि वर्दी के खिलाफ अनगिनत मुकदमे करने वाले , उनको मानवाधिकार की नोटिस भेजने वाले अचानक ही वर्दी भक्त कैसे हो गये है .. सवाल ये भी उठता है कि ये प्रेम सच में वर्दी के लिए ही है या नफरत है नरेंद्र मोदी के खिलाफ जिसके चलते उन्होंने अपने सिद्धांतो तक से समझौता कर डाला है .. उन्ही के सिद्धांत थे कि भारत माता की जय नही कहेंगे पर अचानक ही तेज बहादुर यादव उनके लिए माँ भारती का लाल हो गया . अगर सच में ये भारत माँ के लिए प्रेम है तो इसका स्वागत होना चाहिए लेकिन अगर ये मात्र मोदी के विरोध की तपिश है तो इसको जनता को महसूस करना चाहिए क्योकि सेना और वर्दी के लिए दिखावा चुनावी नहीं बल्कि आत्मिक और सर्वकालिक होना चाहिए .. फ़िलहाल बंद अकल का ताला बनारस का पान खा कर गैरों का भी खुल जाता है तो बनारसियो के पहले से ही खुले ताले यकीनन सब देख , समझ और जान रहे होंगे और वो वही करेंगे जो उचित होगा ..

 

 

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