50 साल बाद एक पुलिस वाले में बचता ही क्या है, सिवाय उसकी नौकरी के.. अब वो भी नहीं रहेगी

वो जब बचपन में रहा होगा तो उसने वर्दी को देख कर सबसे ज्यादा रोमांच महसूस किया रहा होगा , उसके गांव में पुलिस आई रही होगी तो उसने पहली बार पुलिस वालों का रौब देखा रहा होगा और वहीँ से उसके मन में ये आया होगा कि वो भी पुलिस में भी भर्ती होता.. उसने कई सुबह बरसात , गर्मी और ठंड में जाग कर कई किलोमीटर दौड़ लगाईं रही होगी ये सोच कर कि उसको हर हाल में पुलिस की वर्दी चाहिए. यहाँ तक कि जब सब तैयारियों के बाद उसने इम्तिहान दिए होंगे तब उसने हर मन्दिर पर मत्था टेका रहा होगा कि वो भर्ती हो जाए..

फिर वो वर्दी पहन कर उस हकीकत को देखा रहा होगा कि गाँव में किसी को डांट कर गया पुलिस वाला दिन भर किस किस से , क्या क्या सुनता है और क्या क्या झेलता है .. वो खुद को एक ऐसी व्यवस्था में बंधा पाता है जहाँ पर एक मुलजिम को सुधरने के कई मौके दिए जाते हैं लेकिन पुलिस वाले के लिए मौक़ा शब्द शायद बना ही नहीं है. यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है कि झारखंड के नक्सलियों और कश्मीरी आतंकियों को कई बार सरेंडर करने पर प्रोत्साहन चेक तक दिए गये हैं जिन्होंने कई जवानो को मारा हुआ है ..

पर वो सब जान कर भी , समझ कर भी 1861 में अंग्रेजो के समय काल के कानून से कार्य करता रहता है यद्दपि वो अपने कक्षा 1 से पुलिस के इम्तिहान में यही लिख कर पास होता आया रहा होता है कि भारत 15 अगस्त 1947 में आज़ाद हो गया था.. लेकिन बाद में उसको पता चलता है कि उसको अंग्रेजो के नियमानुसार कार्य करना होगा , ये भी कहना गलत नहीं होगा कि उसको तब एहसास होता है कि ये गुलामी उसने खुद से खुद के लिए चुनी है .. पर तब तक वो घर की , परिवार की समाज की तमाम जिम्मेदारियों से जकड़ चुका होता है..

उसके रिश्तेदारी , परिवार में उसके पुलिस में हो जाने का इतना शोर मच चुका होता है कि जब वो अपनी पत्नी से भी अपनी दुर्दशा बताता है तो उसको चुपचाप काम करने की सलाह मिलती है जिसमे परिवार का बच्चो का सबका हवाला दिया गया रहता है .. उन्ही सब के चलते वो उस वर्दी को लम्बे समय तक अपने शरीर पर रखता है जिसके लिए उनसे बचपन में सपना देखा रहा होता है .. यद्दपि उसको एहसास हो जाता है कि सपने और हकीकत में बहुत अंतर होता है ..

अगर मुद्दे की बात पर आया जाय तो पुलिस के निचले स्तर के स्टाफ के हाथ में ज्यादा कुछ नहीं होता.. वो केवल एक उस रोबोट की तरह निर्देशित किया जाता है जिसकी कमान उच्चाधिकारियों के हाथ में होती है.. लेकिन जब बात उसको गुनाहगार बनाने की हो तो उसको ऐसी सजा दी जाती है जैसे उसके हाथ में ही सब कुछ था और उसने वो सब किया नहीं .. इसका उदहारण कोई भी हिमाचल प्रदेश पुलिस के शिमला कोटखाई मामले से जान सकता है जहाँ शिमला के IG भी जेल में हैं और उसी मामले में सिपाही भी ..

क्या कोई ये खुद नहीं समझ सकता है कि अगर सामने IG बैठ कर आदेश दे रहा हो तो सिपाही में इतना साहस होगा कि वो उसको न कर सके ..  फिर IG और सिपाही के पद और कद में बहुत अंतर होता है लेकिन शिमला में सजा एक जैसी ही मिली है. IG शायद अपने धन बल और ऊंची पहुच से कल महंगा और काबिल वकील कर के बाहर हो जाएँ लेकिन उसी मामले में जेल में बंद वो सिपाही क्या करेंगे जिनके घर वाले खाने तक के मोहताज़ हो चुके हैं… बाद में उन्हें सजा मिल कर घोषणा हो जायेगी कि न्याय हो गया ..

निश्चित तौर पर धोखा शब्द किसी भी रूप में किसी भी स्थान पर सही नहीं होता.. वो चाहे अन्तराष्ट्रीय धोखा हो जिसमे पाकिस्तान भारत से शांति वार्ता के अगले दिन ही बमबारी कर के धोखा करे.. चाहे वो धोखा राष्ट्रीय स्तर पर हो जिसमे किसी प्रदेश की सरकार को गिराने के लिए किसी के विधायक अपने साथ रातों रात मिला लिए जाएँ और चाहे प्रादेशिक स्तर पर हो जिसमे किसी को पता भी न हो कि उसके साथ क्या होने वाला है और बाद में पता चले कि अब वो उस सेवा में नहीं रहा जिसमें उसने अपनी जवानी बिता दी ..

एक किरायेदार को मकान खाली अचानक ही करवाने पर विवाद होता है लेकिन अचानक ही नौकरी चली जाने का दुःख शायद बहुत ऊपर तक महसूस न हो .. निष्क्रिय और अकर्मण्य लोगों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए ये बात 100 प्रतिशत सही है लेकिन सिर्फ एक ही विभाग में ये नियम क्यों ? ये सवाल तो बनता है .. पुलिस का काम अपराध का दमन है और दिन भर उनको चोर , उच्च्क्को , अपराधियों , बलात्कारियो , आतंकियों के पीछे रहना होता है.. ऐसे में काजल की कोठरी में जा कर कालिख न लगे ये कहाँ से सम्भव है .

अपराध के दमन के लिए खुद को कठोर करना ही पड़ता है.. अपराध का समूल नाश स्कूलों / कालेजों से सम्भव है जहाँ बचपन में एक छात्र बीडी सिगरेट से धीरे धीरे नशे के कारोबार में शामिल होता है .. स्कूल से गायब हो कर ताश खेलने वाले कई आगे चल कर बड़े जुआरी बनते हैं.. कभी वहां से अपराध खत्म करने की शुरुआत क्यों नहीं हुई ये समझ से परे है .. एक वर्ग तो स्कूलों में सेक्स एजुकेशन देने के पक्ष में है जबकि वही वर्ग समाज से बलत्कार और छेड़छाड़ खत्म करना चाहता है ..

क्या इस जड पर कभी वार करने का विचार किया गया है.. शायद नहीं , बल्कि कई की आशा ये है कि कोई कुछ भी हो , कैसा भी हो उसको पुलिस सुधारे .. इस सुधार में पुलिस ने किसी को डांटे , न हाथ उठाये . फिर भी दुर्दांत से दुर्दांत अपराधी सुधारने की जिम्मेदारी पुलिस ने .. ऐसी आशा किस आधार पर होती है ये समझ से परे है .. यद्दपि कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें किसी पुलिस वाले पर कार्यवाही होने में ही समाज की भलाई और स्वर्णिम भविष्य नजर आता है .. असल में ये भी एक विचारधारा है जो शायद जल्द बदलने वाली नहीं ..

अब कई पुलिसकर्मी जबरन रिटायर हो रहे हैं .. सक्रियता का पैमाना क्या रखा गया है ये खुद उन्हें भी नहीं पता है जिन्हें हमेशा के लिए थाने से घर जाने का आदेश मिल गया है .. उनको उनके पक्ष को रखने , अपनी बात को साबित करने का मौका दिया गया है इसमें भी शक है.. उनके भाग्य विधाता ने जो लिख दिया वो अटल है अब.. 50 साल की उम्र के बाद किसी की बेटी बड़ी और शादी योग्य हुई रहती है, किसी का बेटा नौकरी की तलाश में रहता है . किसी की पत्नी बुढ़ापे की आहट से बीमार रहती है ..

ठीक उसी समय एक नई आफत जो शायद पूरे परिवार को प्रभावित करती है .. निश्चित तौर पर निष्क्रियता को सहन नहीं किया जाना चाहिए लेकिन क्या गलत होता कि ये एक साथ सब पर लागू हो.. शिक्षा विभाग , सडक परिवहन , खनन , बिजली या कहीं और .. अगर पुलिस में ही लागू करना हो तो क्या एक चेतावनी दे कर नहीं ? क्या सफाई का मौका देना या खुद को सही साबित करने का अवसर भी देना गलत था ? क्या इस बात की गारंटी है कि कोई भी पुलिस स्टाफ किसी व्यक्तिगत खुन्नस में नहीं निकाला जा रहा ?

यद्दपि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस आदेश की आम जनता में काफी प्रसंशा है , इसी को अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी अपने प्रदेश में लागू करना चाह रहे जो इस अभियान की लोकप्रियता को दर्शाता है पर यहाँ सवाल ये बनता है कि अगर इस छंटनी अभियान के बाद भी अपराध ज्यों का त्यों रहा और समाज की दिशा दशा में फर्क नहीं आया तो क्या इस लिस्ट को बनाने वाले सार्वजानिक रूप से ये स्वीकार करेंगे कि उनसे गलती हुई है और उन्होंने किसी गलत व्यक्ति को बलि का बकरा बना दिया है .. 

क्या अब जरूरी नहीं है कि समाज को सुधारने के लिए जड़ से प्रयास किये जाएँ बजाय कि पत्ते तोड़ने के .. जब मोदी सरकार ने पहली बार बनने के बाद इंटरनेट पर पोर्न और अश्लील वीडियो को बैन किया था तब बॉलीवुड से सोनम कपूर जैसों ने इस कार्यवाही का विरोध किया था और वो प्रतिबन्ध हटाया गया.. फिर बलात्कार बढ़े और किशोर भी उसी प्रवित्ति में लिप्त होते गये .. सोनम कपूर के खिलाफ किसी नारी सम्मान प्रेमी ने आवाज नहीं और कई लोग एक चीज चिल्लाते रहे कि पुलिस गलत , पुलिस गलत … कई बार एक ट्रैफिक पुलिस वाला 50 साल के बाद दमे का मरीज हो जाया करता है और सामान्य ड्यूटी के पुलिसकर्मी भारी दबाव में मनोरोगी . उन्हें मिला 3 माह का एडवांस वेतन उनकी इन्ही बीमारियों के इलाज़ में काम आएगा.. बेटे का कैरियर और बेटी की शादी तो बहुत बाद में देखा जायेगा .. 

कब जिम्मेदारी बड़े बड़े कान्वेंट स्कूलों / कालेजों में लाखों की फीस ले कर बच्चो को पढ़ाने वालों की निर्धारित होगी और अपराध दमन में उनकी भी जिम्मेदारी निर्धारित होगी .. कब अपराधियों के पैरोकारों की जिम्मेदारी तय होगी जो मुलजिम की गिरफ्तारी से पहले ही पुलिस को फोन करना शुरू कर देते हैं उसकी पैरवी में.. अगर एक पुलिस वाले की कॉल डिटेल निकाली जाय तो उस से पहले निश्चित तौर पर उस इलाके के राजनेता कार्यवाही के पात्र बनेंगे जो अपराध और अपराधी को अपने अनुसार देखने की सलाह देते हैं अपनी ताकत का एहसास करवा कर .

उस दबाव से जो भी पुलिस वाला न दबे उसका बोरिया बिस्तर जवानी में भी बंध गया होगा , और जो दब गया उसमे से कोई 50 साल की उम्र में बाँध रहा होगा .. इस अभियान का समर्थन बेहद जरूरी है लेकिन उस संस्था द्वारा जिसका इस विभाग से कोई वास्ता न हो..  , वो हर पहलू को जांचे और सामने वाले को सफाई का , अपनी बात कहने का अवसर दे.. अन्यथा बोरिया बिस्तर बाँध कर घर गया एक वर्दी वाला कम से कम अपने बेटे को इस विभाग में आने से अपनी हर कोशिश कर के रोकेगा.. अंत में सेवानिवृत्त हुए सभी पुलिसकर्मियों को उनके आगे के सुखमय जीवन की मंगलमय शुभकामनाये .. समाज की रक्षा और सुरक्षा के लिए आप द्वारा अपनी जवानी में किये गये आपके कार्यों के लिए हमारी तरफ से आपको सहृदय धन्यवाद .. भले ही कुछ अधिकारियो की जांच में आपको गलत पाया गया हो लेकिन इतना तो तय है कि आपने अपने सेवाकाल में बहुत ऐसे काम भी किये होंगे जिसके लिए आप सैल्यूट के पात्र हैं ..

 

रिपोर्ट – 

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय – नोएडा

मोबाईल – 09598805228 

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