GRP इंस्पेक्टर और सिपाही ही दोषी हैं क्या सहारनपुर डकैती में ? क्या उस से ऊपर कोई नहीं और जरा सा भी नहीं ?

पुलिस विभाग आज से नहीं बल्कि सदा से २ रूपों में जाना जाता रहा है . एक वो हैं जो अपना बलिदान और त्याग दे कर समाज को बचाते हैं और आम जनता का विश्वास बनाये और बचाए रखते हैं , सिपाही अंकित तोमर, सब इंस्पेक्टर जे पी सिंह की तरह , वहीँ दूसरी तरफ वो हैं जो उस वर्दी का ऐसा दुरूपयोग करते हैं जो बन जाती है पूरे पुलिस विभाग और समाज के लिए एक शर्म का विषय. वर्तमान समय में आगरा GRP के इंस्पेक्टर त्यागी उसी श्रेणी में आ रहे हैं जिन्होंने शर्मशार किया है विभाग को ..

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ज्ञात हो कि सहारनपुर पुलिस ने जिस तेजी से एक इंस्पेक्टर को उसके दलालों के साथ गिरफ्तार कर के जेल भेजा है वो प्रसंशा के योग्य है . उनके साथ ही २ अन्य सिपाही भी अभियुक्त बनाये गये हैं जिनकी आज नहीं तो कल गिरफ्तारी तय मानी जा रही है.. वर्दी की आड़ में छिपे ऐसे लोगों को गिरफ्तार करना निश्चित रूप से न्यायप्रियता कही जायेगी लेकिन अगर इसके जांच की सीमा को संकुचित किया जाएगा को इसका अर्थ केवल यही निकल कर आएगा कि दुर्बल के बहाने बल दिखाया जा रहा है .

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आगर यही किसी दुर्दांत अपराधी को GRP आगरा की टीम सहारनपुर में जा कर गिरफ्तार करती तो ट्विटर के साथ प्रेस विज्ञप्ति की पहली लाइन यही होती कि – “श्रीमान पुलिस अधीक्षक आगरा GRP के कुशल नेतृत्व में” .. आज वही टीम जब डकैती के मामले में गिरफ्तार हुई है तो एक किनारे बैठ कर ख़ामोशी ? मतलब समुद्र मंथन से जो अमृत निकले वो सब मेरा , और जो विष निकले वो सब किसी और का .. इस पूरे मामले में कुछ सवाल खड़े होते हैं जिसके जवाब को सहारनपुर पुलिस और GRP आगरा को देने ही होंगे .. पहला सवाल तो ये है कि अगर एक इंस्पेक्टर बाकायदा वर्दी में कहीं निकल रहा हो और वो सिपाहियों से साथ चलने को कहे तो क्या वो मना कर सकते हैं ? एक सिपाही में क्या कितना साहस है कि वो 3 स्टार लगे एक इंस्पेक्टर की बात को मना कर सके वो भी तब जब वो जानते हों कि ये साहब के कितने करीबी हैं .. अपने रिपोर्टिंग अधिकारी की बात को क्या वो टाल सकते थे और अगर हाँ तो किस आधार पर ?

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इसके साथ इंस्पेक्टर त्यागी का पिछला इतिहास भी बेहद खराब बताया जा रहा है .. इस से पहले रेल यात्री के सोने को पीतल आदि से बदलने के मामले में इनके ऊपर जांच आदि चलने की बात सामने आ रही है , इतना ही नहीं इनके ऊपर और भी कई मामले ऐसे बताये जा रहे हैं जहाँ इन्होने रक्षक की वर्दी का दुरूपयोग भक्षक के रूप में किया था .. लेकिन इतने के बाद भी ये इंस्पेक्टर SP GRP आगरा की आँख के तारे कैसे और किस शर्त पर बने रहे, ये विचार का विषय है और जांच का भी हो सकता है .

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आगे सवाल और भी उठ रहे हैं .. जैसे कि क्या इंस्पेक्टर बाकायदा आधिकारिक रूप से रवानगी कराकर गया था ? यदि नही तो G D पर C O क्या आपत्ति करते थे ? क्या SP GRP आगरा इस बात को ले कर सतर्क नहीं थे कि इनके कही और होने के समय रेल यात्रियों पर आई आपदा का सामना कौन करेगा ? क्या कोई वैकल्पिक व्यवस्था थी जब सिपाही और इंस्पेक्टर बाहर रहें तो यात्रियों की सुरक्षा के लिए ? क्या SP GRP आगरा को सहारनपुर पुलिस या पूरी UP पुलिस अपनी तरफ से क्लीन चिट दे रही है ? एक सवाल ये है कि जिसको ये भी न पता हो कि मेरा इंस्पेक्टर और सिपाही कहाँ हैं , उसको अपराधियों , जहरखुरानो और लुटरों की जानकारी होगी क्या ? और क्या आगरा यात्रा कर रहे रेल यात्री सुरक्षित हैं ?

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सहारनपुर पुलिस प्रमुख भी ऐसे कई मामलों से परिचित होंगे या स्वयं संज्ञान में होंगे जब एक सिपाही की गलती की सजा थानेदार को दी गई है ..  फिर २ सिपाही और 1 इंस्पेक्टर के ऐसे कुकृत्य में मामला उन्ही से चल कर उन्ही पर खत्म कैसे हो रहा है ? एक व्यक्ति की गलती पर पूरे परिवार को थाने में हिरासत में रखने वाली पुलिस क्या सिर्फ सिपाहियों और इंस्पेक्टर तक की कार्यवाही को उचित और दूसरे  शब्दों में न्यायोचित मान रही है ? सहारनपुर पुलिस की इसी मामले में गिरफ्तार हुए अपराधियों को दिखाने वाली प्रेस कांफ्रेंस में इंस्पेक्टर का न दिखना कहीं न कही इस तरफ जरूर इशारा कर रहा था कि पुलिस विभाग अपने विभाग के लिए कुछ तो सहानभूति दिखा रहा.

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बस एक बार कल्पना करने योग्य है कि अगर ये मामला किसी थाने का होता, और उस थाने के २ सिपाही डकैती में गिरफ्तार हुए होते तो क्या आज जो मित्रवत व्यवहार SP GRP आगरा के साथ चल रहा है वही व्यवहार उस थाने के थानेदार के साथ होता ? क्या इस पूरे मामले में जांच करने वाली पुलिस को एक बार भी आरोपी इंस्पेक्टर के उच्चाधिकारियों से पूछताछ की जरूरत नहीं महसूस हुई ? फिलहाल आम जनमानस  इस कार्यवाही का समर्थन कर रहा है  लेकिन वो ये भी मानता है कि कहीं न कहीं अभी इस मामले में और भी बहुत कुछ सामने आना बाकी है .. जिस से न्याय अधूरा न लगे और कोई ये न कह पाए कि “निर्बल के बहाने बल दिखाया जा रहा ” ..फिलहाल सुदर्शन न्यूज आगे इस मामले की पूरी पड़ताल सामने रखेगा जिस से समाज में ये संदेश किसी भी हालात में न जाए कि पुलिस विभाग में गलती सिर्फ और सिर्फ सिपाहियों या दरोगाओं से ही होती है और हर बार कार्यवाही और जांच के पात्र भी सिर्फ और सिर्फ वही हैं ..

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रिपोर्ट – 

राहुल 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

नॉएडा 

Mobile- 9598805228

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