मारे गये 100 आतंकियों में 76 भारत के, सिर्फ 24 बाहरी… खतरा कहाँ से ? बाहर से या अंदर से ?

जहा आज राष्ट्र को सुकून देने वाली खबर ये आई है कि देश की सेना ने जांबाजी दिखाते हुए जनवरी २०१९ से अब तक अर्थात जून २०१९ तक १०१ आतंकियों को मार गिराया है तो वहीँ इस आंकड़े में कुछ ऐसे तथ्य भी हैं जो देश और देशवासियों के लिए विचार का विषय है.. ख़ास कर उन देशवासियों के लिए जो चिंता रखते हैं भारत की एकता और अखंडता की.. वो सभी देशभक्त आंकड़ो पर गौर करें और सोचिये कि राष्ट्र को असल खतरा कहाँ से है और सतर्कता कहाँ होनी चाहिए .

विदित हो कि कश्मीर पुलिस की प्रेस कांफ्रेस में ये बताया गया है कि वर्ष २०१९ में मारे गये १०१ आतंकियों में 76 आतंकी स्थानीय अर्थात भारत के अन्दर के ही हैं और मात्र 25 आतंकी बाहरी अर्थात पाकिस्तान आदि देशो के हैं.. इसके साथ बताया ये भी गया है कि हर माह लगभग 20 आतंकियों को ढेर किया है . इन आतंकियों को तथाकथित मानवाधिकार और स्वघोषित सेकुलरिज्म का सहारा ढाल की तरह मिलता रहा है लेकिन सरकार और समय दोनों बदला तो इनका अंत हुआ .

अब सवाल ये है कि १०१ में से 76 आतंकियों का देश के अन्दर से होना अर्थात लगभग 75 % आतंकवाद को देश से गद्दारी और देशद्रोही भी माना जा सकता है आतंकी कहने के साथ .. किसी और देश से भारत में घुस कर हमला करना निश्चित तौर पर मजहबी आतंकवाद कहा जाएगा लेकिन भारत के ही अन्दर रह कर , भारत सरकार की अल्पसंख्यको के लिए तमाम सुविधाएँ उठा कर, विशेष राज्य के दर्जे का विशेष फायदा उठा कर भी देश से गद्दारी करना आतंकवाद ने साथ साथ नमकहरामी , गद्दारी , देशद्रोह भी कहा जाएगा .. फिलहाल समय इस बात का है कि ये समझा और जाना जाय आंकड़ो के हिसाब से कि देश के लिए असल खतरा कौन है .. भारत को सबसे पहले बाहरी आतंकियों से निबटने की जरूरत है या देश के अंदर रह रहे गद्दारों से ?

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