पुलवामा आतंकी हमले में बलिदान जवानों की संख्या हुई 44.. लेकिन इसकी जिम्मेदारी सिर्फ जैश ए मोहम्मद की है या फिर छद्म सेक्यूलर नेता, बुद्धिजीवी तथा पत्थरबाजों के समर्थकों की भी

कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर हुए इस्लामिक आतंकी दल जैश ए मोहम्मद के हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. आतंकी हमले के बाद सबसे पहले खबर आई थी कि इस हमले में CRPF के 8 जवान बलिदान हुए हैं, लेकिन अब्ब ये आंकड़ा बढ़कर 44 पहुँच गया है. हालांकि इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. जी हाँ, सूत्रो से मिली खबर के मुताबिक पुलवामा आतंकी हमले में 44 जवान बलिदान हुए हैं. इस हमले के बाद पूरा देश अमर बलिदानियों को अश्रुपूरित नेत्रों से अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दे रहा है तथा बदले की मांग कर रहा है.

सरकार इस हमले से किस तरह निपटेगी या क्या कार्यवाई करेगी ये तो आने वाले समय में ही पाता चलेगा लेकिन इस आतंकी हमले के बाद हमारे में कई सवाल उठ रहे हैं. ये सवाल सिर्फ सत्ता से ही नहीं है बल्कि विपक्ष से भी हैं. ये सवाल सिर्फ सत्ता से ही नहीं है बल्कि उन कथित पत्रकारों तथा बुद्धिजीवियों से भी हैं, मानवाधिकारियों से भी है, छद्म सेक्यूलर नेताओं से भी हैं जो कश्मीर में भारतीय सेना के खून के प्यासे जिहादी पत्थरबाजों के समर्थन में ये कहते हुए खड़े हो जाते हैं कि ये भटके हुए नौजवान हैं. यही नहीं बल्कि ये लोग तो दुर्दांत इस्लामिक आतंकी बुरहान वानी तथा जीनत उल इस्लाम का वध करने वाली जांबाज भारतीय सेना के ही खिलाफ खड़े हो जाते हैं.

हमारा सवाल ये है कि पुलवामा में जो आतंकी हमला हुआ है, उसकी जिम्मेदारी इस्लामिक आतंकी दल जैश ए मोहम्मद ने ली है, लेकिन क्या सच में पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी सिर्फ जैश ए मोहम्मद की ही है या फिर छद्म सेक्यूलर नेता, बुद्द्धिजीवी तथा पत्थरबबाजों के समर्थकों की भी. इस्लामिक आतंकी दल जैश ए मोहम्मद ने तो कह दिया कि ये आतंकी हमला उसने कराया है लेकिन इसका जिम्मेदार उनको क्यों न माना जाए जिन्हें बुरहान वानी, मन्नान वानी जीनत उल इस्लाम मासूम लगते हैं? पुलवामा आतंकी हमले का जिम्मेदार उन अलगाववादियों को क्यों न माना जाए जो हिंदुस्तान के टैक्स के पैसों पर पलते है तथा हिंदुस्तान के ही खिलाफ साजिशें रचते हैं?

पुलवामा आतंकी हमले का जिम्मेदार जैश ए मोहम्मद के साथ उन डिजायनर पत्रकारों- बुद्धिजीवियों तथा छद्म सेक्यूलर नेताओं को क्यों न माना जाए जो मेजर गोगोई तथा मेजर शुक्ला को अपराधी बताकर उनके खिलाफ कार्यवाई की मांग करते हैं तथा पत्थरबाजों तथा अन्य आतंकियों से हमदर्दी जताते हैं. फ़िलहाल इस आतंकी हमले में देश के रक्षक 44 जवानों को खो देने के बाद देश के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक की आँखें ये सोचते हुए नम हैं जो सेना सीमा पर इसलिए जागती है ताकि हम हिन्दुस्तानी चैन की नींद सो सकें, जो जिस सेना के कारण हम सुरक्षित हैं, हिंदुस्तान सुरक्षित है लेकिन वही सेना सुरक्षित क्यों नहीं है?

आपको बता दें कि पुलवामा हमले की जांच के लिए 12 सदस्यीय NIA टीम का गठन किया गया है जो कश्मीर जाकर पूरे मामले की तहकीकात करेगी. NIA की तहकीकात में जो भी परिणाम सामने आये लेकिन एकतरफ जैश ए मोहम्मद इस हमले की जिम्मेदारी ले चुका है लेकिन इस हमले के जिम्मेदार वो तमाम डिजायनर पत्रकार, बुद्धिजीवी, छद्म सेक्यूलर नेता तथा मानवाधिकारी भी हैं जिन्हें आतंकियों, आतंकियों के आकाओं से तो प्यार है लेकिन इनकी नजरों में भारतीय सेना हमेशा खटकती रहती है… और आज इन्ही लोगों से मिले हौसले के कारण भारतमाता ने अपने 44 जांबाज सपूतों को खोया है तथा जिनके गम में आज आसमान भी रोया है.

 

प्रभु श्रीराम, मां भवानी! अमर बलिदानियों की आत्मा को शांति देना, उन्हें अपने चरणों में स्थान देना.. मेरे देश के रक्षक मेरी सेना के जवानों की रक्षा करना..!!

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