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कौन है वो जो देशभक्तों की चारित्रिक बदनामी का ले लेता है ठेका ? चाहे वो मेजर गोगोई हों या फिर UP पुलिस के कुछ जांबाज़

आख़िरकार कश्मीर में खौफ का नाम बन चुके मेजर गोगोई पर गाज गिर ही गयी है . एक लम्बी जांच के बाद उस जांबाज़ को डिमोशन दिया जा रहा है और साथ ही साथ कश्मीर के बाहर करने का आदेश दिया गया है . मेजर गोगोई पर हुई इस कार्यवाही के बाद वहां के पत्थरबाजो और आंतकियो में ख़ुशी की लहर जैसी दिखाई दे रही है क्योकि उन्होंने पत्थरबाजो से निबटने के लिए ऐसा तरीका खोजा था जो बन गया था भारत ही नहीं संसार की तमाम सेनाओं के लिये एक नजीर .

लेकिन उन्ही मेजर गोगोई को एक लड़की के मामले में फंसाया गया और फिर उनको रंगे हाथो पकड़ने के दावे आदि कर के पूरे भारत में बदनाम कर दिया गया.. मेजर गोगोई की जो छवि थी ये सब उसके उलट हो रहा था जो खुद मेजर के लिए भी सहन करने योग्य नहीं था . इसमें सबसे ख़ास बात ये रही कि सेना की जांच किसी निष्कर्ष पर पहुचती इस से पहले ही पत्थरबाजो को मासूम बताने वाला भारत की ही मीडिया का एक वर्ग जोर जोर से ऐसे चिल्लाने लगा था जैसे कि वो सब कुछ प्रमाणित कर दिया हो .

अब सवाल ये है कि आखिर देश के लिए कुछ बड़ा करने वाले और उसी के चलते चर्चा में आ जाने वाले अधिकारियो के खिलाफ विषकन्याओं का दुरूपयोग कौन करता है . सेना के कई जांबाज़ अधिकारियो को इसी मामले में सजा मिली है . वामपंथी सोच के कुछ लोगों ने तो खुल कर कैमरे पर कहा कि कश्मीर में सेना महिलाओं के साथ जो करती है वो गलत है .. इतना ही नहीं , भारत के तमाम साधू संत भी इसी दायरे में लाये गये और उसमे से कई निर्दोष भी साबित हुए बाद में पूज्य शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी की तरह ..

पर बात यहीं नहीं रूकती आ कर . इस साजिश के शिकार खुद पुलिस वाले भी हो रहे हैं . अकेले उत्तर प्रदेश पुलिस में ही कई ऐसे जांबाज़ है जो ऐसी साजिशो का शिकार बनाये गये और वो बाद में सही साबित हुए .. पर अफ़सोस उस दौरान उनको भारी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा था जिसका असर सीधे सीधे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर पडा था . इसमें फर्जी खबरों और खबरबाजो का भी काफी योगदान रहा. उत्तर प्रदेश के एक अतिचर्चित एनकाऊंटर स्पेशलिस्ट IPS अधिकारी को जिस प्रकार से बदनाम किया गया उसका बुरा असर अब प्रदेश में अपराधियों के हौसलों को देख कर जाना जा सकता है . इतना ही नहीं रामपुर , बिजनौर , मुरादाबाद , सहारनपुर जैसी जगहों पर भी पुलिस को ऐसे ही आरोपों में लपेटने की कोशिश की गयी है जिसमे एक लम्बी मानसिक प्रताड़ना के बाद पुलिस वाले निर्दोष साबित हुए थे .

एक अधिकारी जा अपराधियों और आतंकियों आदि के खिलाफ अभियान चलाता है तो उसके खिलाफ अपराधी या आतंकी पहले तो सीधे सीधे उतरने की कोशिश करते हैं, लेकिन जब वो उसमे असफल रहते हैं तो वो ऐसी ही साजिशों को रचते हैं . अफ़सोस की बात ये है कि जेल या जंगल में रहने वाले आतंकी / अपराधी के इन साजिशों को अंजाम देने के लिए वो लोग ही मोहरे होते हैं जो समाज में कई बार सफेदपोश के रूप में कुख्यात होते हैं. ये जनता की जिम्मेदारी है कि वो इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखे और भ्रामक खबरों से दूर रह कर अपने रक्षको और अपने लिए संघर्ष करने वालों को पहचाने क्योकि चारित्रिक आरोप किसी भी कर्तव्यनिष्ठ के लिए भी गोली के घाव से ज्यादा बुरा होता है जिसके बाद उसके आत्मबल पर असर जरूर पड़ता है .

 

 

रिपोर्ट –

राहुल 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

नॉएडा 

मो0 – 9598805228

 

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