शंभू रैगर का खाता कुछ पैसे में ही सील करने वाली सरकार को आखिर जिहादी उमर ख़ालिद के पास आने वाले अथाह पैसे की जानकारी क्यो नहीं ?

क्या अपनी ही यूनिवर्सिटी में असफल रहा उमर खालिद अब बनेगा नया दलित नेता ? कयक अफ़ज़ल गुरु को अपना गुरु मानने वाले से बाबा भीम राव अंबेडकर के आदर की उम्मीद की जा सकती है ? आखिर बाबा भीमराव अंबेडकर क्या भारत तेरे टुकड़े जैसे जिहादी नारे सहन कर लेते ? क्या क्या बाबा अम्बेडकर के बनाये संविधान के द्वारा संचालित संसद पर हमला करना और उस हमलावर का समर्थन करने वाले से उनके ही लिखे संविधान का सम्मान करने की आशा की जा सकती है ?? आखिर किस आधार पर उमर खालिद को दलित नेता माना जा सकता है ?

यदि उपरोक्त में से किसी एक भी नियम में उमर खालिद फिट नहीं है तो क्यो बुलाया जाता है उसे दलितों के कार्यक्रम में ? आखिर वो कौन सा एजेंडा है जिसके लिए उसको तथाकथित राजनेता आगे कर रहे हैं  , वो कौन सी वजह है कि वो जहां भी जाता है वहां फैल जाती है अराजकता भले ही वो JNU हो, गुजरात हो या हजारों किलोमीटर दूर महाराष्ट्र का पुणे ? कहाँ से आते हैं इन सभाओं के पैसे जिसमे खर्च होता है लाखों रुपया पानी की तरह ? शंभूलाल रैगर के मुद्दे पर पूरी तरह से नजर गड़ाने और उनकी पत्नी के खाते में आने वाले पैसे को बैन कराने वाली एजेंसियां हजारों लोगों की जान खतरे में डालने वाले ऐसे जिहादियों के पास आने वाले अथाह पैसे की जानकारी क्यो नही जुटा पाती ?

जिस ब्लास्ट में साध्वी प्रज्ञा जी का नाम आया था उसमें सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान संपादक जी को एक बड़ा तथाकथित सेकुलर चैनल सवाल करने आ जाता है कि ब्लास्ट के तुरंत बाद आपने खबर को ब्रेकिंग बना कर कैसे चला दिया लेकिन अब तक किसी भी सरकार एजेंसी में ये साहस क्यों नही हुआ कि दो गुटों की झड़प का सीधा प्रसारण कर के उसे दलित बनाम हिन्दू का नाम दे कर चलाने वालों से पुलिस की रिपोर्ट से पहले ही अपनी रिपोर्ट कैसे चला कर इसे जहरीली मानसिकता से दलित बनाम हिन्दू का नाम दे दिया ? इसका हिसाब क्यो नही मांगा जाता ? आशा है कि इसका हिसाब स्वयं जनता करेगी ..

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