हर बार इलाके का पुलिस वाला ही सस्पेंड क्यों होता है ? कभी उस क्षेत्र का पार्षद, विधायक, सांसद या मंत्री क्यों नहीं ? 

धौरहरा की सांसद महोदया रेखा वर्मा जी ने एक सिपाही श्याम सिंह को थप्पड़ मारा.. इस पूरे प्रकरण में लड़ा तो अकेला सिपाही श्याम सिंह, उसके साथ नेता तो दूर उसके विभाग वाले ही नही दिखे.. दिखते भी कैसे, उसने तो वो खाकी वर्दी पहनी है जिस पर कश्मीर में पत्थर तक मारना लोकतंत्र की आज़ादी और बच्चों की मासूम हरकत बताया जाता है , इस बेचारे सिपाही पर तो सिर्फ थप्पड़ लगे हैं..अपनी नौकरी दांव पर रख कर इस सिपाही ने मुकदमा तो पंजीकृत करवा लिया लेकिन शायद इसको ये नही पता कि कश्मीर में हजारों पत्थरबाजों के मुकदमे कुछ समय बाद वापस ले लिए गए थे जिन्होंने फौजियों को मार कर घायल कर दिया था, सिपाही द्वारा कायम मुकदमा सब तक कायम रहेगा इसका भगवान ही मालिक है.. असल मे ये लड़ाई सर्वशक्तिमान बनाम दुनिया के सबसे ज्यादा नियम कानून में बंधे पुलिस के सिपाही का है.. हार जीत किस की होनी है ये पहले से ही कई लोगों को अनुमान है..

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अगर कल्पना इसके उलट की जाय तो क्या नजारा होता.. सिपाही पर आरोप होता सांसद पर हाथ उठाने का तो.. यकीनन वर्दी उस सिपाही की खाल के साथ उतारने की प्रक्रिया चल रही होती.. कुछ बड़े अधिकारी दिन रात जाग कर क्या क्या बिगाड़ लें उस सिपाही का, इस पर मंथन कर रहे होते..नारी के सम्मान की दुहाई भी बीच मे दी जा रही होती, विपक्ष वाले भी पक्ष में बैठ गए होते.. इतना दूर सोचने के बजाय अगर माना जाय कि यही थप्पड़ उन अधिकारियों में से किसी के ऊपर पड़ा होता जिनकी यूनियन या एसोशिएशन है तो क्या हाल हुआ होता.. कार्यवाही न सही पर अब तक सर्वशक्तिमान को भी माफी मांगने पर मजबूर होना पड़ता.. लेकिन शायद यहां बात एक अराजपत्रित कर्मी की है जिसका वजूद क्या और कितना है, इसे वो खुद जानता होगा..

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सांसद महोदया के अनुसार सिपाही ने शराब पी रखी थी. लेकिन इसको हर कोई समझ सकता है कि “मरवा देंगे” कि धमकी किस ने दी..अगर सिपाही शराबी होता तो यकीनन होश से बाहर होने के चलते ये धमकी उसकी तरफ से आई होती.. जुबान भी सांसद महोदया की चली और हाथ भी.. फिर भी नशे में होने का आरोप सिपाही पर ? क्या एक निष्पक्ष जांच इसे स्वीकार करेगी.. शायद सांसद महोदया को सिपाही नशे में इसलिए लगा होगा क्योंकि किसी सिपाही की इतनी हिम्मत कैसे की वो एक सांसद के खिलाफ FIR लिखवाने पहुच जाए..ये बात हर किसी के लिए चौकाने वाली जरूर है पर इसका मतलब सिपाही नशे में हो, जरूरी नही है.. कुछ के लिए अपना मान, सम्मान और स्वभिमान भी सर्वोपरि होता है.. अब सवाल केंद्रीय सत्ता से भी बनता है कि नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में चल रही टीम मोदी किस किस से लड़ेगी ? आतंकवाद से , पाकिस्तान से , चीन से , भ्र्ष्टाचार से , अपराध से और क्या उसी के साथ साथ पुलिस वालों से भी ? जैसा कि सांसद रेखा वर्मा जी ने मोर्चा खोल रखा है..

17 जून: “निर्वाण दिवस” राजमाता जीजाबाई.. भारतवर्ष की वो महान नारी शक्ति जिनके कारण आज भी गौरवान्वित है भारत का पावन इतिहास

इस पूरे मामले में सांसद जी के ऊपर मुकदमा भले दर्ज है लेकिन सिपाही को न्याय दिलाने के नाम पर खुद कुछ पुलिस वालों पर ही कार्यवाही कर डाली गई है.. कुछ अराजपत्रित लाइन आदि या ट्रांसफर कर दिए गए.. पुलिसकर्मी को न्याय देने के पहले कदम पर शायद पुलिसकर्मी पर कार्यवाही जरूरी होती है.. कम से कम जो कुछ धौरहरा में चल रहा है उसको देख कर तो यही लगता है.. अगर आप एक युवा हैं और अपने सिंघम आदि फिल्मों से प्रभावित हो कर पुलिस विभाग में आना चाह रहे हैं तो आपको फिल्मी नही बल्कि असल दुनिया को देखने की जरूरत है और वो असल दुनिया आपको सिपाही श्याम सिंह से बेहतर कहीं नही देखने को मिलेगी.. श्याम सिंह को देखने के बाद 4 साल से रायबरेली जेल में बंद इलाहाबाद कचहरी गोलीकांड के सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिंह से भी मिलना न भूलिएगा.. सवाल ये जरूर है कि अगर भारत का संविधान सबको बराबरी का अधिकार देता है तो उन “सब” मे पुलिसकर्मी भी शामिल हैं कि नही ? “सबका साथ , सबका विकास” में इन वर्दी वालों का साथ आता है या नही, क्योकि इनका विकास जिसमे इनके भत्ते, सुविधा, प्रमोशन आदि की बात करना भी इनके दर्द को कुरेदने जैसा माना जायेगा..

बाजार व वाहन स्टैंड से हटवाया गया अतिक्रमण, जाम से मिलेगा निजात.

बात चाहे धौरहरा की हो, अलीगढ़ की हो, चाहे बात कुशीनगर की हो.. अपराधी से ज्यादा चर्चा अगर किसी की सुनाई दी है , तो वो है पुलिस विभाग की.. सकारात्मक नहीं बल्कि नकारात्मक रूप में.. तथाकथित जागरूक समाज का एक उदाहरण बताना पड़ेगा कि न्यूज चैनल के कार्यालय में कुछ फोन आते है जिसमें अपने इलाके की इबादतगाह से लाउडस्पीकर के शोर की शिकायत की जाती है.. उस फोन पर न्यूज चैनल से ये मांग होती है कि समाचार में ये भी जोड़ा जाए कि पुलिस की निष्क्रियता के चलते ये सब हो रहा है.. जब ये फोन करने वाले ये रिपोर्टर सवाल करता है कि क्या आपके मुहल्ले में तेज आवाज से ये परेशानी महसूस करने वाला कोई भी आज तक एक बार भी एक भी शिकायती पत्र पुलिस को देने गया , तब उन्होंने कहा कि न नही चाहते कि हमारे रिश्ते ये शोर मचाने वालों से खराब हों इसलिए आप इस खबर को पुलिस की निष्क्रियता बता कर चलाइये.. साथ मे ही उन्होंने अपना नाम पता गुप्त रखने की मांग की..

सहारनपुर में फिर से शौर्य.. जांबाज़ पुलिस वालों से मुठभेड़ में मारा गया दुर्दांत अपराधी अदनान उर्फ मूसा

ऊपर की एक घटना बहुत छोटा सा प्रमाण है उस तथाकथित जागरूकता का जिसमें अपनी जिम्मेदारी लेने के लिए कई लोग जरा सा भी तैयार नही हैं.. जब उस इबादतगाह के बारे में और जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि उसके निर्माण में स्थानीय विधायक, सांसदों आदि का पूरा सहयोग रहा है और हर खास मौके पर वहां के पार्षद, सांसद, विधायक वहां मुख्य अतिथि बन कर जाते हैं… लेकिन हैरानी की बात है कि फिर भी उस मुहल्ले में किसी एक को भी पार्षद, विधायक, सांसद से कोई समस्या नही है.. उन्हें दिक्कत है तो सिर्फ और सिर्फ पुलिस से.. शिकायत करने वाले के पास इस बात का जवाब भी नही था कि अगर पुलिसकर्मी खुद से कोई कार्यवाही करते हैं तो वो उन्ही शिकायतकर्ता के पसंदीदा नेता जी को क्या जवाब देंगे जब वो कहेंगे कि बिना किसी एक शिकायती प्रार्थनापत्र के तुमने कैसे ये कार्यवाही की.. और अगले दिन नेता जी के ही नेतृत्व में उस पुलिसकर्मी को सांप्रदायिक बता कर उस के खिलाफ सड़को पर धरने प्रदर्शन और जुलूस निकल आते जिसमे शायद मजबूरी में ही सही, मौखिक शिकायतकर्ता को भी शामिल होना पड़ता क्योंकि बात माननीय की होती..

वामपंथ शासित केरल में जिन्दा जला दी गई महिला पुलिसकर्मी सौम्या, घरों का दरवाजा पीट कर मांग रही थी मदद … जलाने वाले का नाम है एजाज

क्या पढ़ाया गया हमें पिछले 70 साल में . कईयों बुजुर्गों के मुह से भी सुना होगा कि पुलिस वाले की दोस्ती अच्छी नहीं . कारण पूछो तो इतना बताते हैं की बिना कागज़ के वाहन चलाते हुए उनका चालान हो गया .. असल मे ये भ्रम वो फैला रहे हैं जो आतंक का नंगा नाच देख कर भी आज तक आतंकवाद का मजहब नहीं खोज पाए पर समाज में अपने ही रक्षक पुलिस वालों के लिए भ्रम फैलाने में कामयाब हो गये कि पुलिस से दूर रहो ….

मैच से पहले ही गद्दारी.. UP शाहजहांपुर के निजाम अली ने लिखा – “जिंदाबाद था और रहेगा पाकिस्तान”.. अंत में लिखा – “मोदी मुर्दाबाद”

कहीं रेप हुआ……तो पुलिस वाला सस्पेंड … अक्सर रेप करने वाला कुछ दिन बाद जमानत ले कर सडक पर मुक्त घूमता है , जबकि सस्पेंड पुलिस वाला कोर्ट के चक्कर लगाता है … कहीं मर्डर हुआ….तो पुलिस सस्पेंड .. कई कत्ल करने वाले चुनाव लड़ कर उसी जनता के बीच से जीत कर आते हैं और फिर उसी पुलिस से सुरक्षा लेते हैं .. कहीं दंगा हुआ…..तो पुलिस सस्पेंड ..ये दंगे होते क्यों है क्या आप नहीं जानते ?, कुछ दंगाइयो को कुछ दिन बाद भाई भाई का बिल्ला मिल जाता है पर पुलिस वाला अंत तक बुरा बना रहता है ..

वो बदनाम कर रहे भारत को संसार भर में.. NIA की गिरफ्त में श्रीलंका ब्लास्ट के आतंकी का साथी

छोटा अपराध हो तो सिपाही सस्पेंड…
थोडा बड़ा हो तो थानेदार सस्पेंड…
और बड़ा हो तो क्षेत्राधिकारी सस्पेंड.

और भी बड़ा हो तो गाज पुलिस अधीक्षक पर..

ये हर दिन और आये दिन की व्यथा है..लेकिन पूरा इतिहास खंगाल कर देख लीजिए..आज का नही पुराने सदियों का भी , लेकिन क्या कोई बता सकता है कि –

लेकिन कभी पार्षद सस्पेंड क्यों नहीं होते…????
कभी जिला पंचायत सदस्य सस्पेंड क्यों नही होते..????
कभी विधायक जी सस्पेंड क्यों नही होते..????
कभी सांसद जी सस्पेंड क्यों नहीं होते..?????

और कभी मंत्री जी सस्पेंड क्यों नही होते ?

यहां तक कि जिन नेता के जहरीले भाषणों से दंगे भड़के हैं उन्ही को बाद में आरोप लगाते सुना गया है कि कानून व्यवस्था ठीक नही है.. अलीगढ़ में भले ही अभी कुछ तथाकथित सामाजिकों के रडार पर वहां का पुलिस बल और कप्तान आकाश कुलहरि हैं पर समय की प्रतीक्षा करिए और देखिएगा की उन दरिंदो की पैरवी कौन करते हैं और ये करना वो अपना किस अंदाज़ में संवैधानिक अधिकार बताते हैं..इन व्यथाओं के बाद कई सवाल खड़े होते है .. जैसे कि – क्या पुलिस ही देश में सारे अपराधों की जड़ है ? क्या एक वर्दी में कई कई दिन बिताने वाला वो पुलिस का जवान ही रेप करता है..??? क्या वही पुलिस ही मर्डर कराती है..??? क्या पुलिस ही दंगे कराती है..???

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अगर ऐसा होता तो दुर्दांत देशद्रोही ओवैसी ये न कहता कि 15 मिनट के लिए पुलिस को हटा दो …. ओवैसी जैसे गद्दार को पता है कि पुलिस रक्षक है समाज की पर ये बात न जाने क्यों खुद को राष्ट्रभक्त कहने वाले तमाम लोगों की समझ में नहीं आती .. क्या कोई उस देश की कल्पना कर सकता है जो देश पुलिस मुक्त हो ? क्या बार बार पुलिस का निलंबन मांगने वाले वो तमाम नकली नेता क्या गारंटी लेते हैं समाज की रक्षा करने की ? वो पुलिस को हटा कर पुलिस को ही क्यों नियुक्त करते हैं ? खुद क्यों नहीं गारंटी लेते समाज को सुरक्षित रखने की जबकि चुनाव के समय उतने वादे कर लेते हैं जो शायद अमेरिका व् रूस मिल कर भी नहीं कर सकते ..

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पुलिस हमारी आन बान शान है…पर क्या आन बान व शान का यही नियम कुछ गिने चुने नेताओं को छोड़ कर बाकी तमाम नेताओं पर लागू होती है ? 70 साल की आज़ादी के बाद हजारों पुलिस वालों के नाम है जो आतंकवाद , नक्सलवाद , अपराध से समाज को बचाते हुए अपना बलिदान दिए हैं लेकिन क्या कोई इन 70 सालों में मात्र 10 नेताओं के नाम बता सकता है जिन्होंने देश को भयमुक्त बनाने के लिए अपनी जान दी हो और यदि नहीं हैं तो वो 10 लोग कौन होते हैं उन हजारों बलिदानियो के विभाग पर ऊँगली उठाने वाले ?

पूरे भारत में टिकट दलालों के विरुद्ध रेलवे सुरक्षा बलों की बड़ी कार्यवाई.. ऑपरेशन थंडर के तहत ध्वस्त की गई टिकटों की कालाबाजारी
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हर बार बलि पुलिस की ही क्यों दी जाती है…..क्या कोई बताएगा।।।
सब जानते हैं कि दंगे कौन कराते हैं..?
हड़ताल कौन कराते हैं….?
उत्पात कौन कराते हैं……?
बाजार कौन जलवाते हैं….?

संसार के सबसे ताकतवर देश रूस के सबसे प्रतिष्ठित कार्यक्रम ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में मुख्य अतिथि होंगे पीएम नरेंद्र मोदी

जनता खुद बताये कि उसने आधी रात को कंपकंपाती ठंड में , चिलचिलाती दुपहरी में या बरसते पानी में कितने नेताओं को चौराहों पर अपनी रक्षा के लिए खड़े देखा है ? यदि नहीं तो वो कौन है किसी पर आरोप लगाने वाले .. एक पुलिस वाला एक छोटे से आरोप में भी सस्पेंड होता है पर अनगिनत लूट , भ्रष्टाचार और आपराधिक मुकदमे ले कर भी एक लम्बी लिस्ट है नेताओं की .. लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी , ये सभी चीजें सामने आने के बाद भी सज़ा सिर्फ पुलिस कर्मियों को ही क्यों मिलती है.. पुलिस विभाग में गलत करने वाले को विभाग अपनी तरफ से ऐसी सज़ा देता है कि उनकी रूह कांप जाती है..नोएडा में पिछले दिनों कई उदाहरण सामने आए, आगरा GRP का इंस्पेक्टर भी अपने ही विभाग द्वारा जेल भेज दिया गया.. लेकिन प्रतीक्षा अब नेताओं में ऐसी संवेदनशीलता की है..वो कब अपने इलाके में होने वाली अव्यवस्था, अपराध आदि के लिए खुद को दंड दें न दें, कम से कम कब खुद को जिम्मेदार बताते है?

 

रिपोर्ट- 

राहुल पांडेय

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज

मुख्यालय नोएडा

मोबाइल – 9598805228

 

 

 

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