महिला को खुलेआम मारने वाले मौलाना पर छाई खामोशी ही बन रही हंगामे की बजह.. राष्ट्र पूछ रहा सवाल

मुस्लिम महिलाओ के हक़ के लिए लड़ने वाली वकील फराह फैज को एक मौलाना जो मुस्लिम पर्सनल बोर्ड का सदस्य था, लाइव टीवी पर थप्पड़ मार देता है जिससे पूरा देश आक्रोशित हो जाता है लेकिन वो लोग अपनी जुबान नहीं खोलते जो खुद को महिला हक़ का सबसे बड़ा नंबरदार बताते हैं, जो खुद को नारी स्वाभिमान सबसे बड़ा पैरोकार बताते हैं. देश सवाल कर रहा है स्वरा भास्कर से, जावेद अख्तर से, पुरस्कार वापसी गैंग से कि आखिर उनकी जुबान एक महिला की सरेआम पिटाई पर बंद क्यों है ? गौरतलब है कि टीवी चैनल जी हिन्दुस्तान के शो ‘बताना तो पड़ेगा’ में जिस वक्त मुफ्ती कासमी महिला को थप्पड़ मार रहा था. उस वक्त इस देश में एक मुहिम चल रही थी. वो मुहिम भी मुस्लिमों के नाम पर है यानी #TalkToAMuslim. इस मुहिम में खास जमात से ताल्लुक रखने वाले फिल्मी सितारे बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे. लेकिन ये सितारे एक महिला पर मौलाना के हमले पर कुछ नहीं बोल रहे हैं. सवाल है कि ये दोहरा रवैया क्यों?

आज जब पूरा देश मौलाना कासमी की हरकत पर शर्मसार है तथा उसे कड़ी सजा देने की मांग कर रहा है लेकिन लेकिन बॉलीवुड से लेकर साहित्य जगत के वो झंडाबरदार चुप्पी साधे हैं. जो तमाम मुद्दों पर दनदनाते ट्वीट दागते हैं, बैनर लहराते हैं, कैंडल मार्च निकालते हैं. फिल्मी दुनिया से लेकर लेखन जगत की ये जानी-मानी हस्तियों के जुबान पर अब ताले लटके हए हैं. ये सवाल उन तमाम सितारों से जो बात-बात पर हिन्दुस्तान में शर्मिंदा होते हैं. जो बात-बात पर कैंडल मार्च निकालते हैं और कैंपेन चलाते हैं. देश में सिर्फ नफरत देखने वाली ये ब्रिगेड कहां बिजी है?  टीवी, फिल्म, मॉडलिंग इन सभी जगह मौजूदगी दर्ज कराने वाली गौहर खान, जो सोशल मीड़िया पर धुआंधार कैंपेन चलाती हैं. हाथों में तख्ती लिए फोटो क्लिक करवाती हैं, जिस पर लिखा होता है, ‘मैं एक भारतीय मुस्लिम हूं. मैं एक इंसान भी हूं. आप मुझसे बात कर सकते हैं. #TalkToMuslim, #StopThisHate.’ गौहर खान खुद को भारत में नफरत का शिकार बता रही हैं. इनका दुख-दर्द इतना है कि पोस्टर चिपकाए तस्वीर सोशल मीडिया में पोस्ट कर रही हैं, लेकिन इसी गौहर खान की जुबान से टीवी डिबेट के दौरान एक महिला से मौलाना की मारपीट पर एक शब्द भी नहीं निकालता है. बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर अलग तरह के किरदार निभाने के लिए फिल्म जगत में जानी जाती हैं. फिल्मों से ज्यादा स्वरा की सुर्खियां उनकी बातों से बनती हैं. हर मसले पर स्वरा बेबाकी से बयान देती हैं. कठुआ रेप कांड हो या फिर बॉलीवुड में कास्टिंग काऊच स्वरा ने बड़ी बेबाकी से राय रखी हैं. लेकिन आज स्वरा के कंठ से एक भी शब्द नहीं निकल रहा है. थप्पड़बाज मौलाना के खिलाफ स्वारा कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं.

बॉलीवुड में मोस्ट सेक्यूलर अगर कोई माना जाता है तो वो शबाना आजमी और जावेद अख्तर हैं. दोनों मियां-बीवी मजहबी मसलों पर खुलकर बोलते हैं. हर दकियानूसी बातों का पुरजोर विरोध जताते हैं, लेकिन थप्पड़बाज मौलना पर इन्होंने भी कुछ नहीं कहा. न ही किसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर और न ही टीवी कैमरों पर. मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान की भी बोलती बंद है. एक वक्त इन्हें इस देश में डर लगता था. उस दौरान बीवी की कही बातों से आमिर इतने परेशान हो गए थे कि देश छोड़ने तक सोच बैठे थे. लेकिन आज जब एक महिला को कैमरे पर एक मौलाना ने थप्पड़ मारे हैं तब आमिर खान चुप हैं. वो थप्पड़बाज मौलाना पर कोई रायशुमारी नहीं है. आमिर जैसे सितारों की पूरी फौज है बॉलीवुड में जो बात-बात पर देश में शर्मिंदा होती है. इनकी लिस्ट काफी लंबी है लेकिन हम यहां आपको कुछ चुनिंदा नाम बता है. करण जौहर (डायरेक्टर और प्रोड्यूसर) सोनम कपूर (फिल्म एक्ट्रेस), हुमा कुरैशी (फिल्म एक्ट्रेस), राधिका आप्टे (फिल्म एक्ट्रेस), विशाल ददलानी (म्यूजिक डायरेक्टर). इनमें हीरो, हीरोइन, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर. हर फन के उस्ताद लोग इस लिस्ट में शामिल हैं. किसी भी विवादित मसले पर ये सब इतने बेबाक हो जाते हैं कि सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया तक अपना विरोध दर्ज कराते हैं.

पूरे देश को याद होगा कि साल 2015 में जब असहिष्णुता के नाम पर कुछ चुनिंदा साहित्यकारों और फिल्मी हस्तियों ने देश से मिला सम्मान लौटाए थे. ये अवॉर्ड वापसी गैंग थी, जिसने विरोध का नायाब तरीका ईजाद किया था. सहिष्णुता की दुहाई देने वाली इस लिस्ट में मशहूर शायर मुनव्वर राणा से लेकर जावेद अख्तर और बॉलीवुड के बड़े-बड़े दिग्गज शामिल थे. लेकिन आज ये सब चुप हैं. इन सबको मुस्लिम महिलाओं की बेबसी नहीं दिखती. उनके दर्द पर ये चुप्पी साध लेते हैं. तीन तलाक के मुद्दे पर निंदा जैसे शब्द भी इनकी जुबान से नहीं निकलते. ये सब तीन तलाक के मुद्दे पर चुप हैं.  अशोक वाजपेयी, राजेश जोशी, नयनतारा सहगल, मुनव्वर राणा, कुंदन शाह, अजय रैना, मधुश्री दत्ता, सुधाकर रेड्डी, अमिताभ चक्रवर्ती, अभिमन्यु डांगे जैसे 40 से ज्यादा लोगों की इस फौज को आज निदा खान जैसी हजारों मुस्लिम महिलाओं की बेबसी नहीं दिखाई देती. अब उन्हें इनके दाना-पानी उठने के फतवों से भी कोई फर्क नहीं पड़ता. ना ही इन्हें लाइव टीवी डिबेट में मौलाना का ये अत्याचारी रूप दिखता है. आज पूरा देश इस कांड पर आवाज उठा रहा है लेकिन अवॉर्ड वापसी गैंग के ये लोग चुप्पी साधे हैं. इनकी पास इस मुद्दे पर बोलने के लिए शब्द नहीं हैं. अंतरात्मा की बात करने वाली अवॉर्ड वापसी गैंग गूंगी हो चुकी है शायद इसलिए कि थप्पड़ मारने वाले का नाम एजाज कासमी है. अगर थप्पड़ किसी रमेश, सुशील अजय ने मारा होता तो संभवतः आज पुनः देश में पुरस्कार वापसी हो रही होती.

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