इस्लामिक आतंकियों से लड़ कर वीरगति पाए सैनिक की पत्नी बनी सेना में लेफ्टिनेंट.. जंग वहीँ से फिर शुरू जहाँ से रुकी थी

अगर भारत की वर्तमान नारी शक्तियों की बात की जाय तो आप को तमाम प्रकार के उदाहरण गिनाये जायेंगे .. इनमे से तो वो भी साजिशन शामिल होने की कोशिश कर रही हैं जो खुद को अर्बन नक्सल बोल कर ट्विटर पर खुलेआम उसको टैग भी करती हैं . लेकिन दुर्भाग्य की बात ये है कि उन वीरांगनाओ के बारे में किसी को भी नहीं बताया जाता है जो आज के समय में भी देश में वो सब कुछ कर रही हैं जो किसी के मन को आंदोलित और देशभक्ति से भर देगा .

ये घटनाक्रम शुरू होता है इस्लामिक आतंकियों द्वारा प्रभावित कश्यप ऋषि की घाटी कश्मीर से . यहाँ के देशद्रोही गद्दार आतंकियों का सफाया करते हुए भारत के एक वीर को वीरगति प्राप्त हुई थी जिसका नाम था शिशिर .. देश के गद्दारों से देशभक्तों की टोली की मुठभेड़ हुई थी बारामुला के जंगलों में जहा पर बहादुरी से लड़ते हुए गोरखा रेजिमेंट के वीर शिशिर सदा के लिए अमर हो गये थे . शिशिर को उनके बलिदान के बाद सेना मेडल मिला था .

लेकिन यहाँ पर एक वीरंगन के संघर्ष की कहानी है . जो उनके पति ने अधूरी लड़ाई छोड़ी थी उसको पूरा करना और देश के उन गद्दारों का सफाया करना उनका लक्ष्य था जिन्होंने उनके ही नहीं न जाने कितने सिंदूरों को पोंछा है , न जाने कितनी कलाइयां सूनी कर दी हैं और न जाने कितनी गोद खाली कर डाली हैं . उनकी इच्छा थी कि पति के वीरगति के बाद वो अपने परिवार ही नहीं बल्कि देश के लिए कुछ कर सकें इसलिए आँखों में आंसू और मन में देश के गद्दारों के प्रति आक्रोश पलता रहा .

आख़िरकार उस लगन को दुनिया ने न सिर्फ देखा और जाना ही बल्कि अब उसको झुक कर श्रद्धा भाव से प्रणाम भी किया है . न्नै के ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) में अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के साथ ही संगीता मल्ल भारतीय सेना में शामिल हो गई हैं। संगीता की कहानी बेहद मोटिवेशनल और भावुक कर देने वाली है। सैनिक पति के वीरगति के बाद वीरांगना संगीता ने अपनी सास की सेवा के लिए टीचिंग की जॉब छोड़ दी। एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसारसंगीता को न सिर्फ अपने पति की मौत से उबरना था, बल्कि इसी दौरान उनका गर्भपात भी हो गया था।

यह उनके लिए दोहरे झटके जैसा था। संगीता के देवर सुशांत मल्ल ने बताया, ‘मेरी मां ने उन्हें हमेशा सपॉर्ट किया और उन्हें आगे पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और इसके बाद बैंक की नौकरी करने के लिए कहा।’ उन्होंने बताया कि 2016 में उत्तराखंड के रानीखेत में इंवेस्टीचर सेरेमनी में शामिल होने के बाद संगीता सेना जॉइन करना चाहती थीं।  सुशांत ने कहा, ‘उन्होंने कड़ी मेहनत की और ओटीए एग्जाम पास कर लिया।’ अकादमी में कठिन ट्रेनिंग के बाद वह अब शॉर्ट सर्विस कमीशन में लेफ्टिनेंट के रूप में सेना में कार्यरत हो गई हैं। सुदर्शन परिवार ऐसी वीरांगना को बारम्बार नमन करता है ..

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