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बाबा साहब किस रंग के ध्वज के समर्थक थे ये जानकर सन्न हैं जहरीले जातिवादी… आप भी जानिए

संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के बारे में देश में अक्सर भ्रम फैलाया जाता रहा है कि वह हिन्दू विरोधी थे. हिन्दू विरोधी जातिवादी जहर से संक्रमित कुछ लोग बाबा साहेब के बारे में कहते रहते हैं कि बाबा सहें ने हमेशा से हिंदुओं का विरोध किया, हिंदुत्व का विरोध किया, भगवा का विरोध किया. इस बहाने इन लोगों की कोशिश रहती है कि किसी प्रकार से हिन्दू समाज को तोड़ा जाए, हिंदुओं में फुट डाली जाए तथा हिंदू धर्म के एक अभिन्न वर्ण शूद्र(दलित) को हिंदू समाज से अलग कर दिया जाए. हालांकि अभी तक ये ताकतें हिंदुत्व को तोड़ने में वांछित सफलता हासिल नहीं कर सकी हैं.

लेकिन बाबा साहेब के बारे में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसे जानकर बाबा साहेब को भगवा विरोधी बताने वाले तथा समाज में जातिवाद का जहर खोलने वाले लोग सन्न हैं. दुनियां के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में बताया गया कि बाबा साहेब भीमराव रामजी आंबेडकर भगवा विरोधी नहीं थे बल्कि वह तो भगवा ध्वज को हिंदुस्तान का राष्ट्रीय ध्वज बनाना चाहते थे. उत्तर प्रदेश के कानपूर के गीतानगर पार्क में हुए कार्यक्रम में प्रान्त प्रचारक संजय जी ने कहा कि डॉ.आंबेडकर के विषय में समाज में भिन्न-भिन्न धारणाएं हैं. उनका ठीक विश्लेषण समाज के सामने नहीं हो पाया, इसके लिए संविधान सभा का बाबा साहेब का भाषण पढ़ना होगा.

बाबा साहेब के बारे में बताते हुए संजय जी ने कहा कि आंबेडकर जी कुशल अर्थ शास्त्री भी थे. वह खुद गरीबी से निकले, इसलिए उससे उबरने के बुनियादी सुझाव दिए. उनका ही प्रस्ताव था कि भगवा ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज बनाया जाए. प्रांत प्रचारक संजय जी ने वेद-उपनिषदों की भावनाओं की व्याख्या करते हुए कहा कि सभी परमात्मा का अंश हैं. किसी जीव की आत्मा छोटी-बड़ी नहीं होती. ऋषियों की उसी परिकल्पना को ¨हदुत्व चिंतन कहते हैं. उन्होंने कहा कि हिंदुत्व संकीर्णता नहीं, संपूर्णता का नाम है. हमारे देश में वर्गभेद अरब होते हुए ग्रीक से आया है. वह साहित्य से होकर हमारे दिमागों तक में पहुंच गया. यह हमारी परतंत्रता का प्रतीक है. अब संकल्प लेना होगा कि अपने मोहल्ले और गांव से जातिवाद, छुआछूत और भेदभाव की बीमारी को खत्म करने की पहल करें, डॉ. आंबेडकर भी यही चाहते थे.

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