अप्रैल फूल पर भी आ गया देवबंद से फरमान .. जानिये जायज है या नाजायज

पिछले दिनों एक फतवा जारी हुआ था जिसमें कहा गया था कि अंगदान करना भे इस्लाम में गुनाह माना गया है. एक और फतवा आया था आला हजरत बरेली से कि मुस्लिम महिलाएं बारात मैं सेल्फी नहीं ले सकती हैं क्योंकि ये इस्लाम में हराम है. इस्लाम में अक्सर अलग अलग मुद्दों पर फतवे जारी होते रहते हैं. सहारन का देवबंद भी फतवा जारी करता है और देवबंद ने 1 अप्रैल यानी कि अप्रैल फूल को लेकर फतवा जारी किया है. देवबंद ने कहा है कि अप्रैल फूल इस्लाम में नाजायज है अतः कोई भी मुसलमान व्यक्ति अप्रिल फूल न अदि न करे.

गौरतलब है 1 अप्रिल को कुछ लोग अपनी हंसी मजाक के लिए प्रयोग करते हैं जैसे कि किसी से झूठ बोलना, परेशान मूर्ख मनाना. इसीलिये एक अप्रैल को अप्रैल फूल कहा जाता है. अब देवबंद उलेमाओं ने अप्रैल फूल मनाने को इस्लाम में नाजायज करार दे दिया है. देवबंदी उलेमाओं ने शरीयत का हवाला देते हुए अप्रैल फूल बनाने को इस्लाम में नाजायज बताया है. देवबंदी उलेमा की मानें, तो शरीयत में अप्रैल फूल बनाना नाजायज है तथा इससे जुड़े मैसेज भेजना भी गुनाह है.

मदरसा जामिया कुदसियात के मोहतमिम मौलाना कारी आमिर उस्मानी का कहना है कि इस्लाम में अप्रैल फूल बनाने के लिए मना किया गया है. मौलाना उस्मानी ने कहा कि अप्रैल फूल मनाने की इस्लाम में कतई इजाजत नहीं है. इस दिन को मनाना बिल्कुत नाजाईज व हराम है, लेकिन आमतौर पर देखने को मिलता है कि लोग अप्रैल फूल से जुड़े मैसेज व्हॉटसअप, फेसबुक और अन्य सोशल साइटों पर डालकर दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शरारतें करते हैं जो नाजाइज है. इंटरनेट से भी किसी को अप्रैल फूल बनाना इस्लाम में नाजाइज है.

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