जो भी शी जिनपिंग के फैसलों के विरुद्ध आवाज़ उठाएगा उसे भुगतना पड़ेगा उसका अंजाम.. कहकर वकील को किया गिरफ़्तार और फिर…

चीन का तानाशाह व्यवहार को पूरी दुनिया जानती है यही उसका रूप उसके अपने घर में देखने को मिला। चीन किस तरह से अपने देश में विरोधीयो को जेल में

नजरबंद कर देता है। आज चीन की जनता भी जान गयी है कि चीन अपने देश के जनताओ पर तानाशाह शासन करता है और अगर कोई तानाशाह का विरोध

करता है तो उसे सूली पर चढ़ा देता है।

चीन ने एक प्रमुख मानवाधिकार वकील जियांग तियानयोंग को राज्य के खिलाफ विद्रोह उकसाने के आरोप में दो साल की सजा दी. वकील ने अदालत में सरकार

विरोधी मुवक्किलों का बचाव किया था. दक्षिण चीन में एक अदालत ने जियांग तियानयोंग को राज्य के खिलाफ विद्रोह उकसाने का दोषी पाया.

नागरिक अधिकार

एक्टिविस्टों ने इस फैसले को अनुचित बताया है. वकील के रूप में अपने करियर मे जियांग ने ऐसे मुकदमे लड़े हैं जिन्हें चीन की सरकार संवेदनशील मानती है.

चांगशा की लोक अदालत ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट वाइबो पर एक बयान में कहा है कि जियांग को तीन साल के लिए राजनैतिक अधिकारों से भी वंचित कर दिया

जायेगा.

चीन की अदालत ने कहा जियांग ने चीन की सरकार, न्यायपालिका और न्यायिक व्यवस्था को बदनाम किया और विदेशों में यह सीखने के लिए वर्कशॉपों में

हिस्सा लिया कि चीन की राजनीतिक व्यवस्था को कैसे नष्ट किया जाए. अदालत ने जियांग पर अपने साथी नागरिक अधिकार समर्थक शी यांग को हिरासत में

उत्पीड़ित किये जाने की अफवाह फैलाने का आरोप भी लगाया.

कुछ महीने पहले इस 46 वर्षीय वकील अगस्त में चले मुकदमे में अपनी गलती मान ली थी।

बचाव में एक्टिविस्टों का कहना है कि उनसे दबाव में अपराध कबूल कराया गया है.उधर वकील जियांग की पत्नी जीन बियानलिंग ने कहा है कि वे इस फैसले को

कभी वैध नहीं मानेंगी. 15 साल की बेटी के साथ अमेरिका में रह रही जिन ने एक संदेश में कहा, “मैं सोच भी नहीं सकती कि मेरे पति से कैसे अपराध कबूल

कराया गया, किस तरह की यातना और धमकियों के जरिये.” जिन ने कहा कि वे अपने पति के स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हैं.

उन्होंने जियांग को परिवार से

मिलने की अनुमति देने की मांग की. मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के रिसर्चर विलियम नी ने कहा है कि जियांग ने कोई अपराध नहीं किया है.उन्हें

दी गयी सजा आज के चीन में मानवाधिकारों के लिए लड़ने की बहादुरी दिखाने वालों को चीनी अधिकारियों द्वारा व्यवस्थित तरीके से उत्पीड़ित किये जाने की एक

और मिसाल है.

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