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आरटीआई से खुलासा- गंगा का पानी दूषित होने के कारण हो सकती है अनेक बीमारियां

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, अब हरिद्वार में गंगा का पानी ना पीने के लायक रहा और ना ही नहाने के लिए। गंगा को साफ-सुथरा बनाने के सभी दावों और अभियानों के बीच की यह भी खबर आयी है कि इस नदी का पानी अब हरिद्वार में ही नहाने लायक तक नहीं रह गया है। यह सूचना  केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के जरिये एक पत्र के जवाब में दी है। सीपीसीबी ने बताया है कि हरिद्वार में गंगा का पानी करीब करीब सभी मानकों पर असफल रहा है।

 आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हरिद्वार के 20 से ज्यादा घाटों पर रोजाना 50,000 से एक लाख तक श्रद्धालु स्नान करते हैं जिससे वहां का पानी हर रोज गंदगी से भरा होता है और उस पानी से हमारे शरीर मे अनेक बीमांरिया पनपती है। गंगा में नहाते वक्त पानी में रहने वाले सूक्ष्म जीव प्राणी के शरीर की रगड़ के साथ मर जाते है। अब तो विज्ञान ने भी चौकाने वाली बात कही है। इस पानी को इतना गंदा बताया है कि पीने की तो दूर बात इससे नहाने पर भी व्यक्ति बीमार हो सकता है।

 सूत्रों के अनुसार, सीपीसीबी ने नहाने के 1 लीटर पानी में बायलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड का स्तर 3 mg से कम रहना चाहिए, जबकि यहां के पानी में यह स्तर 6.4 mg से ज्यादा पाया गया। इसके अलावा कॉलिफॉर्म की मात्रा 100ml पानी में 90 मोस्ट प्रॉबेबल नंबर (MPN) होना चाहिए जो 1,600 MPN तक पाई गई। बोर्ड का कहना है कि नहाने के पानी में इसकी मात्रा प्रति 100 ml में 500 MPN से उपर शरीर के लिए घातक होती है। गंगोत्री से लेकर हरिद्वार तक 11 जगहों से नमूने लेकर उनकी जांच की थी। सीपीसीबी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक आरएम भारद्वाज ने बताया कि इसमें पानी के तापमान, उसमें घुली ऑक्सीजन, जैविक ऑक्सीजन की मांग (बीओडी) और कोलिफॉर्म (बैक्टीरिया) की जांच शामिल थी।

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