भाजपा के मुख्यमंत्री से बसपा के नेता की मात्र एक औपचारिक मुलाक़ात ही बन गई उसके ऊपर कहर की बजह..

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती जो अक्सर बोलने की आजादी की बड़ी पैरोकारी करती हैं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करती हैं लेकिन खुद उनकी पार्टी में अभिव्यक्ति की कितनी स्वतंत्रता है ये दिखाई दिया है ऊतराखंड में जहाँ बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद को बसपा से इसलिए निष्कासित कर दिया गया क्योंकि उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात की थी.

आपको बता दें कि बहादराबाद से पूर्व विधायक और बसपा नेता मोहम्मद शहजाद की बेटे की शनिवार को शादी थी. जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक सहित कई भाजपा के नेताओं को आमंत्रित किया था. यह सभी लोग पार्टी में पहुंचे थे, लेकिन इन लोगों को दावत देना मोहम्मद शहजाद को भारी पड़ गया. भाजपा से नजदीकियां बढ़ाने को पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को मोहम्मद शहजाद के दोबारा निष्कासित करने के आदेश जारी कर दिए हैं. मोहम्मद सहजाद की सिर्फ इतनी गलती थी कि उन्होंने बेटे बेटे की शादी में मुख्यमंत्री तथा भाजपा नेताओं को भी आमंत्रित किया था जो बसपा नेतृत्व को पसंद नहीं आया.

इसके बाद रविवार को बसपा के प्रदेश स्तर के नेताओं ने प्रेस वार्ता कर शहजाद के निष्कासन की पुष्टि की है. पार्टी नेताओं ने साफ किया कि बार-बार पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलग्न होने के कारण इस बार शहजाद का स्थाई रूप से निष्कासन किया गया है. सपा के प्रदेश महासचिव सतीश का कहना है कि हाल ही में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल ना होने के आश्वासन के बाद मोहम्मद शहजाद को पार्टी में वापस लिया गया था, लेकिन 10-15 दिन बीतने के बाद ही उन्होंने दोबारा पार्टी विरोधी कार्य करने शुरू कर दिए. यदि उन्हें भाजपा के लिए ही काम करना है तो उसी में चले जाएं पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते ही पार्टी अध्यक्षा मायावती ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है. बसपा का मानना है कि पूर्व विधायक भाजपा के साथ मिलकर बसपा को कमजोर करने का काम कर रहे थे, इसलिए उन्हें निष्कासित किया गया है.

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