बड़ी आशा के साथ वो भारत से अमेरिका भेजे गये थे कि वो वहां भारत का नाम रोशन करेंगे.. लेकिन वो तो खड़े हो गये भारत की ही सरकार के खिलाफ


ये भारतीय थे जो पैसे कमाने के लिए अमेरिका गए थे . इन्होने वहां हिन्दुओ से अलग हो कर अपना खुद का मुस्लिमों का समूह बनाया और फिर शुरू कर दिया अमेरिका से ही भारत की नीतियों का विरोध करना और विदेशी धरती पर भारत की सरकार की खिलाफत .. इन्हे एक बार भी संकोच नहीं हुआ उस कृत्य के लिए जो इनकी लोकप्रियता की चाहत के लिए कर रहा था भारत का इतना गंभीर नुकसान.. 

ज्ञात हो की वर्तमान समय में मुख्य रूप से चर्चा का विषय बन चुके असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) की नई लिस्ट में 40 लाख भारतीयों के नाम ना होने के बाद से भले ही देश में आरोप प्रत्यारोप की राजनीति चल रही हो लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो भारत के बाहर विदेशी धरती पर भारत की निंदा करना शुरू कर दिए हैं . ज्ञात हो कि कांग्रेस और टीएमसी समेत अन्य विपक्षी पार्टियां लगातार इस ड्राफ्ट का विरोध कर रही हैं जिनसे प्रेरणा ले कर अब इस ड्राफ्ट का विरोध अमेरिका तक पहुँच गया है।

ध्यान देने योग्य है कि भारत से अमेरिका गए और वहां अपना समूह बना चुके भारतीय मुस्लिमों के एक समूह ने अमेरिका की धरती पर ही शुरू कर दिया है भारत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जिस से अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है . ये वही लोग हैं जो भारत से अमेरिका गए हैं इन्होने असम में NRC को तत्काल खारिज करने की मांग की है।  वहां जा कर इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (आईएएमसी) नामक इस संगठन का कहना है कि जब तक रजिस्ट्रेशन में बरती गई अनियमितताओं को दूर नहीं किया जाता है तब तक के लिए उसे खारिज कर देना चाहिए।

पूरी तरह से बंगलादेशियो के साथ खड़े होते हुए इस समूह ने NRC ड्राफ्ट में विदेशी धरती पर सीधे सीधे भारत सरकार को ही बदनाम करना शुरू कर दिया .. उनके अनुसार अनियमितताओं के कारण ही 40 लाख लोगों को शामिल नहीं किया जा सका है। जबकि वो ये नहीं बता पाए कि अमेरिका से उन्हें असम की इतनी जानकारी कहाँ से और कैसे मिली ? वहां जा कर मुसलमानो का समूह बना चुके ईएएमसी के प्रेसिडेंट अहसान खान ने कहा, “असम में मताधिकार से वंचित रहने वालों में सबसे ज्यादा वहां निवास करने वाला बांग्ला भाषी मुस्लिम समुदाय प्रभावित हुआ है। इनपर घुसपैठिया होने का आरोप लगाया जाता है जबकि ये लोग भारतीय नागरिक हैं। दरअसल, यह लोकतंत्र को नष्ट करने की कवायद है और साफतौर से यह पक्षपात और भेदभावपूर्ण एजेंडा है।” गौरतलब है कि असम में NRC की नई लिस्ट वहाँ पर अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने के लिए बनाई गई है। इनके आन्दोलन को अमेरिका में भारत वालों द्वारा ही भारत के विरोध के रूप में देखा जा रहा है . 


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