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आज यानि 21 अगस्त 1947 का वो लेख, जिसमे साफ बोला गया था – “आबादी बढाओ , कल ये भी मुल्क हमारा होगा “.. कईयों का अभी तक काम चल रहा उसी साजिश पर

उस समय भी सरकारें थी और उस समय भी शक्ति थी, ग्राम प्रधान से ले कर प्रधानमंत्री तक सिर्फ वो ही वो थे.  पर शायद समस्याएं सुलझाने के बजाय उलझ रहीं थी.. कभी चीन समस्या, कभी कश्मीर समस्या .. एकतरफा हिंदुओं को ही सेक्युलरिज्म की घुट्टी कूट कूट कर पिलाई जा रही थी लेकिन दूसरी तरफ चल थी थी एक गहरी साजिश जो कईयों के दिमाग के साथ कार्यों में आज भी ज्यों की त्यों कायम है.. आबादी को बढ़ा कर भारत पर कब्ज़ा करने की कयावद सन 1947 से ही चालू है जिस पर छाई रही खामोशी और बड़नामिक रडार पर रहे वीर सावरकर जैसे देशभक्त जो आगाह करते रहे ऐसे खतरे के खिलाफ जनता को..राष्ट्र निर्माण संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश चव्हाणके जी भविष्य के उन्ही खतरों को पहले से भांप कर व इतिहास के उन्ही साजिशों का अध्ययन कर के सख्त जनसँख्या नियंत्रण कानून की मांग पर अड़े हुए हैं और उसे पारित करवा कर ही दम लेने की बात करते हैं..

आज भी लगभग वही हालात बने हैं और इन खतरों के प्रति सुरेश चव्हाणके जी पूरे भारत को घूम घूम कर जगा रहे हैं..लड़ के लिए हैं पाकिस्तान, हंस कर लेंगे हिंदुस्तान जैसी जहरीली सोच के लोगों को सार्वजनिक रूप से बेनकाब कर रहे हैं.. सन 1947 में रची गई इस सजिश को वो सब जानते थे जो आज भारत को यहां तक लाये हैं पर अफसोस कि उन्होंने धर्म निरपेक्षता की वो परिभाषा गढ़ रखी थी जो शायद हिन्दू विरोध से शुरू हो कर हिन्दू विरोध पर ही खत्म होती है..वामपंथी विचारधारा के तमाम लोगों में ठीक वही सोच आज भी आराम स्व देखी जा सकती है जिन्हें चीन और पाकिस्तान की चिंता भारत से ज्यादा रहती है ..फिलहाल जानते हैं सन 1947 में ही आबादी बढ़ा कर देश को कब्ज़ा करने की एक घृणित साजिश के बारे में जिस पर चल रहे हैं आज भी कई साजिशकर्ता..

बात आज़ादी के फौरन बाद की है .. जब धर्म के आधार पर देश को 2 टुकड़ो में बांट दिया गया था.. लेकिन हिंदुओं को एक ऐसी भूमि दी गयी जो सिर्फ उनकी नही थी और उस देश को ऐसा सेक्युलर घोषित किया गया जहां उन्ही के दमन को राजनीति का आधार बना दिया गया. भारत के तत्कालीन नेताओ की इसी नीति से उत्साहित हो गए मज़हबी चरमपंथी और लाहौर से प्रकाशित मुस्लिम पत्र ‘लिजट’ में कमरूद्दीन खान का एक पत्र प्रकाशित हुवा था। जिसका उल्लेख पुणे के ‘ मराठा ‘और दिल्ली के ओर्गनायजर में २१ अगस्त १९४७ को छपा था, ” हिन्दुस्थान बट जाने के पश्चात् भी शेष भारत पर भी मज़हबी उन्मादियों की गिध्द दृष्टी किस प्रकार लगी हुई है,इस लेख में छपा था। चारो ओर से घिरा मुस्लिम देशों का, इसलिए समय आने पर हिन्दुस्थान को जीतना बहुत सरल होगा..

कमरुद्दीन खान अपनी अखंड पाकिस्तान योजना को लेख में लिखते है, ” इस बात से यह नग्न रूप में प्रकट है की ५ करोड़ मुसलमानों को जिन्हें पाकिस्तान बन जाने पर भी हिन्दुस्थान में रहने के लिए मजबूर किया है,उन्हें अपनी आज़ादी के लिए एक दूसरी लडाई लड़नी पड़ेगी और जब यह संघर्ष आरम्भ होगा , तब यह स्पष्ट होगा की,हिन्दुस्थान के पूर्वी और पश्चिमी सीमा प्रान्त में पाकिस्तान की भौगोलिक और राजनितिक स्थिति हमारे लिए भारी हित की चीज होगी और इसमें जरा भी संदेह नहीं है की,इस उद्देश्य के लिए दुनिया भर के मुसलमानों से सहयोग प्राप्त किया जा सकता है. ” उसका कहना था कि हिन्दुओ की वर्ण व्यवस्था की कमजोरी से फायदा उठाकर ५ करोड़ अछूतों को हजम करके मुसलमानों की जनसँख्या को हिन्दुस्थान में बढ़ाना.

इस इतिहास और इसके जैसे न जाने कितने बयानों और प्रयासों का ही परिणाम है आज देश के तमाम हिस्सों में फैल रहा मज़हबी उन्माद और कहीं पाकिस्तान समर्थक नारे तो कहीं कश्मीरी के गद्दार मुफ़्ती की तरह देश के एक और विभाजन की मांग ..इस आने वाली घोरतम विपदा को टालने के लिए ही राष्ट्रनिर्माण संस्था के अध्यक्ष श्री सुरेश चव्हाणके जी ने 1947 से रची जा रही इस साजिश को न सिर्फ बेनकाब करने अपितु ऐसे मंसूबे वालों को धूल चटाने के उद्देश्य से मांग कर रहे जनसँख्या नियंत्रण कानून की ..बनिये उनके प्रयासों के हमराह और देश की कीजिये रक्षा क्योकि ये धरती हमारे पुरखों की दी गयी थाती है हमें …

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