चन्द्रशेखर आज़ाद की दाह स्थली पर आज भी सोते हैं कुत्ते और रात में होता है जुआ. जगह वही है जहाँ से जीत कर आये हैं UP के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य

इसे भारत का दुर्भाग्य न कहा जाय तो और क्या कहा जाय ? एक वीर बलिदानी जिसने जीवन का एक भी पल अपने लिए नहीं जिया और देश के लिए मात्र अल्पायु में ही संसार की उस समय की सबसे बड़ी सैन्य सत्ता ब्रिटिश से लड़ते हुए अमरता को प्राप्त हो गया उसकी दाह स्थली पर आज कुत्ते सोते हुए और जुआ खेलते जुआरी मिल जायेगें ..  क्या ये पीड़ा उन अमर बलिदानियों की पवित्र आत्मा को नहीं होती होगी ? चन्द्रशेखर आज़ाद जो यकीनन संसार के सबसे महानतम क्रांतिकारी थे . जो बल बुद्धि के ऐसे जीवंत रूप थे जिन्होंने भारत के लिए अपने जीवन की पहली और अंतिम सांस ली .

उस क्रांतिवीर की दाहस्थली इलाहाबाद के चन्द्रशेखर आज़ाद पार्क से लगभग 5 किलोमीटर दूर तेलियरगंज के रसूलाबाद श्मशान घाट पर है . ये स्थान उत्तर प्रदेश की राष्ट्रवादी सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का संसदीय इलाका भी माना जाता है लेकिन उस स्थान पर जहाँ संसार का सबसे महान क्रांतिवीर का अंतिम संस्कार हुआ था वहाँ एक टूटी फूटी मीनार जो किसी ने अपने खुद के पैसे से बनवाई थी , बेहद जर्जर हालत में पड़ी है . उस स्थान पर आज भी जुआ होता है और उस वीर की दाह स्थली पर कुत्ते और अन्य जानवर सोते हैं .. आज तक वहां कोई तथाकथित राजनेता झाँकने भी नहीं गया…  गत वर्ष सुदर्शन न्यूज़ ने दिल्ली के एक राष्ट्रवादी संगठन सुदर्शन वाहिनी के साथ मिल कर सामूहिक रूप से इस पावन स्थल का जीर्णोद्धार करवाया था वो भी खुद के सामर्थ्य से जिसमे किसी राजनेता का प्रतिशत मात्र भी सहयोग नहीं था .

इसके अतिरिक्त सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान सम्पादक श्री सुरेश चव्हाणके जी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी से UPUday नाम के कॉन्क्लेव में भी इस पावन स्थल को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसति करने की मांग की थी जो आज तक अनुत्तरित है . सुदर्शन न्यूज़ एक क्रूर आक्रान्ता के इस निरर्थक सम्मान और एक वीर बलिदानी के इस अपमान की आवाज यथासम्भव उठाता रहेगा जब तक कि तुष्टिकरण की नीति से पोषित इस तथाकथित राजनीति अपने असल स्वरूप में नहीं आ जाती .. सवाल ये है कि इस प्रकार का दंश कब तक झेलेगा राष्ट्र का वो बलिदानी जिसने अपने जीवन की एक एक सांस और रक्त का एक एक कतरा समर्पित कर दिया देश को .. जिसके दम पर आज नेताओं की नेतागीरी कायम है . 

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