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पहली बार हुआ है ऐसा जब मुस्लिम लडकी पुलिस के बजाय पहुँची बजरंग दल कार्यालय.. बोली- “मुझे यकीन था आप पर”

एक आम धारणा है कि मुस्लिम समाज बजरंग दल से बेहद नफरत करता है, इसका कारण ये है कि बजरंग दल मजहबी उन्माद के खिलाफ आवाज उठाता है. शायद आप सी बात की कल्पना तक भी न कर पायें कि कोई मुस्लिम व्यक्ति या महिला किसी संकट की घड़ी में पुलिस के पास न जाकर मदद के लिए बजरग दल कार्यालय जाए. लेकिन ऐसा हुआ जब एक मुस्लिम महिला आपने पति से अलगाव के चलते पुलिस के पास न जाकर बजरंग दल कार्यालय पहुँच गयी तथा कहने लगी कि भैया एक आप ही हो मेरी मदद कर सकते हो.

मामला देवभूमि उत्तराखंड के देहरादून का है. 40 वर्षीय रईस कुरैशी ने दो शादियां कर रखी हैं. जो 21 वर्षीय महिला बजरंग दल कार्यालय पहुँची थी मदद मांगने के लिए वह महिला रईस की दूसरी पत्नी थी जिससे रईस ने कुछ महीने पहले ही शादी की थी. कुछ दिन तक तो ठीक चला लेकिन हाल ही में रईस कुरैशी ने इस लड़की को तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया. बताया जा रहा है कि लड़की को ऐसे समय में घर से बाहर किया गया जब वह गर्भवती थी. बताया गया है पीडिता बेहद गरीब परिवार से संबंध रखती है जो रईस कुरैशी की मीट की दुकान पर काम करती थी वहीं रईस ने बैटन में लेकर उससे शादी कर ली थी.

शादी को बीते कुछ ही महीने हुआ था कि रईस और उसकी पहली पत्नी ने लड़की पर अत्याचार शुरू कर दिया. जब लड़की ने उनके जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना चाहा तो उसे उसके पति ने तीन तलाक दे दिया.पीड़िता ने कोई रास्ता ना निकलता देख स्थानीय बजरंग दल के सदस्यों से खुद को न्याय दिलाने की मांग की. बजरंग दल के सदस्यों ने युवती की मजबूरियों को देखते हुए उसकी मदद की और उसे पुलिस मुख्यालय लेकर गये. पुलिस महानिदेशक ने लड़की को न्याय दिलवाने का भरोसा दिलवाया है.

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