धर्म के साथ पर्यावरण की रक्षा को आगे आये सुरेश चव्हाणके जी.. सुदर्शन पार्क में भारतीय पौधों का किया वृक्षारोपण और कामना की फिर से शस्य श्यामला भारत भूमि की

हिन्दू शास्त्रों में जब भी कोई कार्य किया जाता है तो उसके पीछे सबके मंगलमय होने की कामना की जाती है . आदि से अनादि काल तक मात्र सत्य सनातन ही एक ऐसा धर्म है जो अपनी प्रार्थना में हर किसी का कल्याण मांगता है और सबके स्वस्थ और सक्षम होने की कामना करता है . हिन्दू धर्म के मुख्य शास्त्रों के एक सर्वविदित श्लोक के अनुसार सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्। ॐ शांतिः शांतिः शांतिः. ..

अर्थ – “सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना …  उसी क्रम में आगे कबीर ने कहा था कि वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी  संचै नीर । परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर ॥ वृक्ष कभी अपने फल नही खाते और नाही नदी कभी अपना जल संचित करती है लोक कल्याण… यहाँ वृक्ष को परमार्थ का का प्रतीक बताया गया है जिसमे ये कहा गया है कि वो अपना खुद का फल कभी नहीं खाता और उसके फल पर समाज का अधिकार होता है ..

इस समाज में हर किसी का हिस्सा होता है .. वृक्ष आक्सीजन देता है जो जीवन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है , वृक्ष पुष्प और फल देता है जो अन्य लोगों के ही काम आता है . वृक्ष अपने अवसान के बाद लकड़ियाँ भी देता है जो समाज के कार्य आती है. कबीर तक ने साधुता की तरफ बढने वाले इंसानों को वृक्ष से प्रेरणा लेने की बात कही थी . उसी वृक्ष को सुरेश चव्हाणके जी ने रोपित किया है और एक बार फिर से भारत भूमि को उसके वैदिक स्वरूप में ले जाने की कामना की है .

हिन्दू परम्परा में इन्सान के जीवन का अंतिम चरण वानप्रस्थ हुआ करता था .. जीवन के अंतिम चरण में हर कोई वनों में जा कर इश्वर के भजन आदि और परमात्मा के सानिध्य की आशा करता था. लेकिन समय के साथ वनों का क्षरण होता चला गया और कभी शस्य शायमला रही भारत भूमि अब बंजर होती जा रही है . उसी शस्य शायमला भूमि को एक बार फिर से हरा भरा करने के एक अभियान में आज सुरेश चव्हाणके जी ने वृक्षारोपण किया जिसमे हर प्रकार से पौधे रोप गये .

रोप गए पौधों में सभी किस्मे भारतीय वृक्षों की थी जिसमे आम , नीम , जामुन , पीपल आदि प्रमुख थे.. पौधों का ये रोपण सुदर्शन परिसर के पास बने सुदर्शन पार्क मे किया गया था.. पिछले समय दिल्ली NCR को हवा की गुणवत्ता के मानको पर सबसे बुरा पाया गया था इसलिए हरित अभियान की शुरुआत सुरेश चव्हाणके जी ने नॉएडा के सेक्टर 57 स्थित सुदर्शन पार्क से की है . सुरेश चव्हाणके जी ने अपने इस अभियान को आगे भी जारी रखने का संकल्प दोहराया है और सबसे अधिक से अधिक वृक्षों को रोपित करने की मांग की है .

देखिये वृक्षारोपण के कुछ दृश्य –

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