मजहबी शरिया क़ानून की मांग करने वाले मुसलमान धर्मनिरपेक्ष लेकिन हर नागरिक के लिए समान क़ानून की मांग करने वाले हिन्दू सांप्रदायिक कैसे– श्री सुरेश चव्हाणके

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा देश भर में शरिया अदालतें लागू करने की घोषणा के बाद घमासान मचा हुआ है. लोग इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं तथा कह रहे हैं कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का ये कदम सरेआम संविधान की खिलाफत है क्योंकि जब देश में न्यायपालिका मौजूद है तब मजहब के आधार पर उस समुदाय के लिए अलग से अदालत कैसे लगाई जा सकती है. शरिया दलित पर मचे घमासान के बीच सुदर्शन टीवी के चेयरमैन तथा राष्ट्र निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री सुरेश चव्हाणके जी ने बड़ा बयान दिया है.

शरिया अदालत लगाए जाने पर टिप्पणी करते हुए सुदर्शन टीवी के चेयरमैन श्री सुरेश चव्हाणके जी ने कहा कि जब हिन्दू समाज, हिन्दू संगठन हिंदुस्तान के हर नागरिक के लिए बराबरी का हक़ मांगते हैं, हर नागरिक के लिए समान अधिकारों की बात करते हैं, जब हिन्दू समाज के लोग कहते हैं हिंदुस्तान के हर नागरिक के लिए समान कानून होना चाहिए तथा इसके लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग करते हैं तो हिन्दुओं को साम्प्रदायिक बोला जाता है, असहिष्णु बोला जाता है लेकिन जब मुस्लिम मजहबी आधार पर अपने लिए अलग कानून लागू करने की, शरिया अदालत लागू करने की न सिर्फ बात करते हैं बल्कि इसको लागू भी करते हैं लेकिन इसके बाद भी वह धर्मनिरपेक्ष बने रहते हैं. श्री सुरेश चव्हाणके जी ने कहा कि आखिर हर नागरिक के समान कानून की मांग करने वाले हिन्दू को साम्प्रदायिक बोला जाता है वहीं मजहबी कानून, मजहबी अदालत लगाने वालों को धर्मनिरपेक्ष.

श्री सुरेश चव्हाणके जी ने कहा कि हम संविधान की बात करें, संवैधानिक आधार पर समान नागरिक सहिंता तो हम साम्प्रदायिक हो गए लेकिन मुसलमान अरब का शरिया कानून, शरिया अदालत लागू करके धर्मनिरपेक्ष बने रहे. श्री सुरेश चव्हाणके जी ने कहा कि देश में न्यायापालिका के होते हुए भी शरिया अदालतें लगाना न सिर्फ संविधान का अपमान है बल्कि यह हिंदुस्तान को “गजवा-ऐ-हिन्द” बनाने की शुरुआत है. श्री सुरेश चव्हाणके जी ने कहा कि हिंदुस्तान की अदालतों के समानांतर मजहबी अदालतें लगाना दर्शाता है कि उनके लिए हिन्दुस्तान का क़ानून, हिंदुस्तान का संविधान मायने नहीं रखता है. श्री सुरेश चव्हाणजी ने हिन्दुओं से आह्वान करते हुए कहा कि वह तीव्र रूप से शरिया अदालतें लगाए जाने का विरोध करें तथा हिंदी, हिन्दू, हिंदुस्तान को बचाने के लिए, भारतमाता का चीरहरण होने से रोकने के लिए समान नागरिक सहिंता कानून की मांग करें.

Share This Post

Leave a Reply