“जनसँख्या नियंत्रण कानून” के लिए सुरेश चव्हाणके जी के संघर्षों के एक और सुखद परिणाम..अब असम में 2 से ज्यादा बच्चे वाले नहीं पाएंगे सरकारी नौकरी


जिस अभियान के लिए राष्ट्र निर्माण संस्था के हजारों कार्यकर्ताओ का नेतृत्व करने व उसको देश की आवाज़ बनाने हेतु सुरेश चव्हाणके जी ने 3 माह तक घर को त्याग कर सम्पूर्ण भारत की प्रदक्षिणा की थी, उसी महाभियान के अब सुखद व सार्थक प्रतिफल आने शुरू हो गए हैं.. कई प्रदेशों की सरकारों के साथ खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने जनसँख्या की बेतहाशा वृद्धि को देश के विकास में बाधक बताया था और अब उसी अभियान को बेहद मजबूती से लागू करते हुए बंगलादेशी घुसपैठ से बेहद बुरी तरह से प्रभावित असम को दी गई है एक बहुत बड़ी राहत..

ध्यान देने योग्य है कि असम के मुख्यमंत्री सर्वानन्द सोनोवाल ने एक क्रांतिकारी फैसला लेते हुए असम में वर्ष 2020 के बाद  बच्चों से ज्यादा जिस भी व्यक्ति के होंगे, उनको सरकारी नौकरी न देने का फैसला किया है.. इसका बाकायदा कानून भी जल्द असम में लागू कर दिया जाएगा जिसके बाद आबादी के आधार पर कभी अतिरिक्त सुविधा लेने, विकास को प्रभावित करनव हंगामा और दंगा फैलाने वालों के मंसूबे पस्त हो गए हैं.. पूरे भारत मे इस निर्णय की दिल खोल कर प्रसंशा की जा रही है.. सुरेश चव्हाणके जी ने भी अपने भागीरथ प्रयासों के सफल होने की दिशा में इस कदम के लिए मुख्यमंत्री सर्वानन्द सोनोवाल की दिल खोल कर प्रसंशा की है..

इस अतिमहत्वपूर्ण फैसले के बाद अब असम प्रदेश में अब एक जनवरी 2021 के बाद से दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी. इस संबंध में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में फैसला लिया गया. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद असम जनसंपर्क विभाग की ओर से इस फैसले के संबंध में एक बयान भी जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि छोटे परिवार के मानक के अनुसार एक जनवरी 2021 से दो से अधिक बच्चे वालों को सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी.


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