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22 सितम्बर – आज ही खत्म हुआ था भारत पाकिस्तान के बीच 1965 का युद्ध जिसमे अमेरिका की गोद में बैठे पाकिस्तान को रौंद दिया था भारत की फ़ौज ने

आजादी के बाद वर्ष 1965 में भारत और पाकिस्‍तान के बीच जो कुछ भी हुआ वह, कई पीढ़‍ियों को आज भी याद है। दोनों देशों के बीच युद्ध ने दोनों देशों की दिशा और दशा बदलकर रख दी। इस युद्ध को 28 अगस्‍त को 50 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस जंग ने पिछले वर्ष ही 50 वर्ष पूरे किए हैं। हैरानी की बात है आज तक पाकिस्‍तान इस जंग में मिली शिकस्‍त को मानने को तैयार ही नहीं होता है।  भारत पाकिस्तान के बीच 1965 की लड़ाई में आज ही के दिन संयुक्त राष्ट्र की पहल पर युद्ध विराम हुआ. भारत पाकिस्तान की दूसरी जंग के नाम से विख्यात यह संघर्ष पाकिस्तान के ऑपरेशन जिब्राल्टर के तुरंत बाद शुरू हुआ था.

दोनों देशों की फौजों के बीच जंग प्रमुख रूप से कश्मीर में भारत पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सीमा रेखा के पास हुई. लड़ाई पैदल सेना और टैंक डिविजन के बीच हुई लेकिन पीछे से वायु सेना और नौ सेना ने भी अपनी भूमिका निभाई. यह पहली लड़ाई थी जिसमें भारत और पाकिस्तान की वायु सेना ने भी एक दूसरे पर हमला किया. लेकिन आख़िरकार पाकिस्तान को मुह की खानी पड़ी .  पांच हफ्ते चली लड़ाई में पाकिस्तान नेस्तानाबूद हो गया था और आख़िरकार उसको भाग कर संयुक्त राष्ट्र की शरण में जाना पड़ा था .संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता पर दोनों देश युद्धविराम पर सहमत हुए और उसके बाद ताशकंद समझौता हुआ.

1965 की लड़ाई को कश्मीर का दूसरा युद्ध भी कहा गया। 1965 का युद्ध पाकिस्तान के विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की महत्वाकांक्षा का नतीजा था। उन्होंने पाकिस्तानी प्रेसिडेंट(तब) अयूब ख़ान को समझाया कि हम अगर कश्मीर में घुस जाते हैं तो वहां की जनता हमारा साथ देगी। जंग की नौबत तक नहीं आएगी। उन्होंने मई में ऑपरेशन जिब्राल्टर तैयार किया अौर जुलाई के पहले हफ्ते में एक्शन करते हुए कश्मीर में घुसपैठ कर दी। वहां की जनता को ये पता तक नहीं था, उनका साथ देना तो बहुत दूर की बात थी। मोहम्मद्दीन गूजर वह शख्स था जिसने पहली बार तंग मर्ग के पास कुछ संदेहास्पद लोगों के होने की खबर स्थानीय पुलिस को दी। हम सक्रिय हुए। इसके साथ ही पाकिस्तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम लॉन्च कर दिया और जम्मू के अखनूर सेक्टर में एडवांसमेंट की।

एयरफोर्स ने अब तक कमान संभाल ली थी और इधर जीओसी वेस्टर्न कमांड ले. जन. हरबख्श सिंह ने योजना बनाकर पाकिस्तान का ध्यान जम्मू से हटाने का काम शुरू कर दिया। वे पंजाब फ्रंट खोलना चाहते थे, क्योंकि पाकिस्तानी इधर खेमकरण तक आ चुके थे। जनरल हरबख्श ने भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से अखनूर को बचाने के लिए इंटरनेशनल बॉर्डर पार करने की इजाज़त मांगी। यह बड़ा साहसिक कदम था, लेकिन शास्त्री जी ने तुरंत हां कर दी। इसके बाद भारतीय सेनाएं खेमकरण में बढ़ रही पाकिस्तानी फोर्सेस को रोकने लिए दीवार की तरह खड़ी हो गईं।

कश्मीर के मोर्चे पर पाकिस्तानी हमले की धार कमजोर करने के लिए भारत ने पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जवाबी हमला किया, लेकिन असल उत्तर में टैंक युद्ध ने दुश्मन के हौसले पस्त कर दिए। पाकिस्तनी सेना ने 8 सितंबर 1965 की सुबह खेमकरण सेक्टर में सबसे बड़ा हमला बोला। दुश्मन का पहला मकसद खेमकरण पर कब्जा कर वहां अपना मोर्चा बनाकर व्यास और सतलुज नदी पर बने पुलों को ध्वस्त करना था ताकि अमृतसर का इलाका भारत से कट जाए। पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने यहीं से जालंधर के रास्ते दिल्ली पहुंचने का ख्वाब देखा था और उनके हौसले की बुनियाद थे अमेरिकी पैटन टैंक।

पाक को लगने लगा था कि उसके सेना प्रमुख जनरल अयूब खान ने जब कच्‍छ सीमा के विवाद को हल तक पहुंचाने में मदद की है तो फिर वह भारत से कुछ भी हासिल कर सकते हैं। कच्‍छ के बाद पाक ने कश्‍मीर को अपने कब्‍जे में लेने के उसने रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी। इस रणनीति की दम पर उसने भारतीय सेना को कश्‍मीर में घेरने की योजना बनाई। लेकिन उसकी एक नहीं चली और भारतीय सेना ने उसे करारा जवाब दिया। पांच अगस्त 1965 को भारत के 26,000 और पाकिस्तान 33,000 सैनिकों ने लाइन ऑफ कंट्रोल को पार किया था। कश्मीरी लोकल्स के अंदाज में यह सैनिक कश्मीर के कई इलाकों में पहुंच गए। 15 अगस्त को भारतीय सैनिकों ने उस समय तय की हुई सीजफायर लाइन को पार कर डाला।

यह युद्ध भारत और पाक दोनों के लिए ही इंटेलीजेंस असफलता का सबसे बड़ा उदाहरण था। लेकिन इस युद्ध के बाद दुनिया और एशिया में भारत की एक नई पहचान बनी थी। उस समय टाइम मैगजीन ने लिखा था कि साफ हो गया है कि भारत अब दुनिया में नई एशियन ताकत बनकर उभर रहा है। 17 दिन तक चला युद्ध भारत और पाकिस्‍तान के बीच यह युद्ध 17 दिनों तक चला।डिफ़ेंस एक्सपर्ट नितिन गोखले ने अपनी किताब टर्निंग द टाइड ‘How India Won the War’ में भी बताया है कि 1965 में भारत पाकिस्तान पर भारी पड़ा था और उस जंग में भारत की जीत हुई है। किताब में उस वक्त के रक्षा मंत्री वाई बी चव्हाण के राज्यसभा में दिए बयान का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने बताया था कि पाकिस्तान के 5800 सैनिक मारे गए जबकि हमारे 2,862 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे . आज उस दिन को याद करते हुए सुदर्शन परिवार अपने प्राणों को  देश की रक्षा के लिए देने वाले सभी ज्ञात अज्ञात वीरो को बारम्बार नमन करता है और उनकी यश गाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है .

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