महाराष्ट्र की पवित्र सांस्कृतिक पालकी यात्रा आलंदी से पंढरपुर तक शुरू हुई.. दिल्ली में रहने वाले मराठी बढ़ चढ़ कर हुए शामिल


भारतीय संस्कृति को बनाये और बचाए रखने में मराठों के योगदान को कोई भी भुला तो दूर , नजरअंदाज भी नहीं कर सकता है. सर पर भगवा साफा बाँध कर आज भी अगर कोई जय भवानी का उद्घोष करता दिखाई देता है तो उसको महान छत्रपति शिवाजी महराज की उस परम्परा का संवाहक माना जाता है जिस परम्परा के चलते उन्होंने हिन्दवी साम्राज्य की स्थापना की थी . महाराष्ट्र की उन तमाम परम्पराओं में से एक यात्रा के रूप में शुरू हुई है जिसको ले कर पूरे देश में जबर्दस्त उत्साह है .

ध्यान देने योग्य है कि महाराष्ट्र के पुणे क्षेत्र अंतर्गत आयोजित होने वाली इस यात्रा को ले कर सभी तैयारियां पूरी होने के बाद आख़िरकार इस यात्रा का शुभारम्भ हो ही गया है . जब भी सासंकृतिक वैभवता की बात आएगी तब तक पूरा देश महाराष्ट्र की तरफ ही देखता है अब उसी महाराष्ट्र राज्य में आज संत श्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज और जगदगुरु तुकाराम महाराज आषाढी वारी पालकी यात्रा का आज 25 जून तीर्थक्षेत्र अंलदी से पंढरपुर के और प्रस्थान होने जा रहा है.
उसी पालकी यात्रा प्रस्थान के लिए देश के सभी राज्यों के अलावा विदेशों से भी तमाम भावपूर्ण भक्त आज लाखों की संख्या मे आलंदी से पंढरपुर की तरफ प्रस्थान हुए ..ये मार्ग आज पूरा भक्तिमय और भगवामय दिखाई दे रहा है .. इस महाकुंभ मे आज शामिल होने वाले सभी श्रद्धालु आंलदी आकर पवित्र इंद्रायणी गंगा मे स्नान करके संत ज्ञानेश्वर महाराज जी का संजवानि समाधी का दर्शन करते हैं और संत ज्ञानेश्वर महाराजी के पालकी यात्रा में पंढरपुर की और प्रस्थान करते हैं..
इस बार की पालकी यात्रा की विशेषता ये भी है कि इसमें महाराष्ट्र से हजारो किलोमीटर दूर रहने वाले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली मे स्थाई या अस्थाई रूप से रहने वाले महाराष्ट्र के लोगो ने  अपनी मूल संस्कृति को दूर न होने का संकल्प लेते हुए अपनी संस्कृति को जागृत रखने के लिए दिल्ली मराठी प्रतिष्ठान के संस्थापक अध्यक्ष वैभव डांगे,और महेंद्र सिंह लड्डाजी ने दिल्ली के सभी मराठी लोगों को और दिल्ली के स्थानीय लोगों को साथ लेकर इस यात्रा में सम्मिलित हुए .
कई सालों से आंलदी से लेकर पंढरपुर तक पैदल यात्रा मे शामिल होकर एक आनोखा उपक्रम जारी किया है.  यहाँ बताना जरूरी है कि संत ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज की यह पालकी सोहळा हजारों वर्ष से अनवरत चलती आ रही है . यह पवित्र पंरपरा है जो बहुती प्रेरणादायी है. ये यात्रा 25 जून से लेकर 12 जुलाई तक चलेगी . समापन में ये यात्रा दोनो पालकी आषाढी एकादशी के पर्व पर पंढरपुर मे पहुंचेगी जहाँ भगवान श्री विठ्ठल रुखुमाई के दर्शन करती है.

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